सौर ऊर्जा से देश में क्रांति हो सकती है-ब्रजेश पाठक

मैं अपने विद्यार्थी जीवन से इस मत का रहा हूं कि हमारे देश में धूप अपार मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए सौर ऊर्जा का भरपूर उपयोग कर हम अपने यहां क्रांति कर सकते हैं तथा इस ओर समुचित ध्यान दिया जाना चाहिए। लेकिन मैं अपने विचार जब किसी के सामने रखता था तो कोई उसे महत्व नहीं देता था।

१९६१ में मैं पत्रकार हो गया तो उस समय वर्ष १९६६ में प्रयागराज का महाकुम्भ आयोजित हुआ था। उस विशाल महाकुम्भ में एक पंडाल लगा था, जिसमें पहली बार सौर ऊर्जा का चित्रण किया गया था। उसे देखकर मुझे बड़ी खुशी हुई थी। उक्त पंडाल के अधिकारियों की यह बात लोगों को भा रही थी कि सौर ऊर्जा संयत्र लगवा लेने पर बिजली के झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी।उस समय प्रदेश में बिजली की घोर दुर्दशापूर्ण स्थिति थी तथा गरमियों में तो भयंकर हाहाकार मचा रहता था। लेकिन सौर ऊर्जा संयत्र की लागत इतनी अधिक थी कि उसे लगाने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी।कई वर्ष पूर्व जब मायावती के बाद मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो मायावती के समय महत्वपूर्ण पदों पर रहे लगभग सभी उच्चाधिकारी महत्वहीन पदों पर भेज दिए गए थे। शशांक शेखर सिंह, कुंवर फतेह बहादुर आदि ऐसे अनेक अधिकारी बापू भवन में प्रथम तल पर बैठते थे। मैंने उस समय ‘बापू भवन की दुखिया मंजिल’ शीर्षक आलेख लिखा था, जो बहुत चर्चित हुआ था। गोपबंधु पटनायक ने मुझे फोन कर कहा था कि वह दुखी नहीं हैं तथा उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा का जो विभाग मिला है, उसमें बहुत कार्य कर रहे हैं।


गोपबंधु पटनायक ने मुझे बताया था कि वह सौर ऊर्जा के प्रसार के लिए प्रयासरत हैं तथा उनकी यह भी कोशिश है कि सौर ऊर्जा संयत्र लगाने के लिए मिलने वाली मदद- राशि(सब्सिडी) को समाप्त कर वैकल्पिक ऊर्जा को वास्तविक रूप में लोकप्रिय बनाया जाय। उन्होंने मुझे उन जनपदों में जहां महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है, साथ चलने के लिए आमंत्रित किया था, ताकि मैं उक्त कार्य प्रत्यक्ष देख सकूं। समयाभाव के कारण मैं उस समय नहीं जा सका था।मैंने गोपबंधु पटनायक से कहा था कि सौर ऊर्जा संयत्र लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए तथा सुझाव दिया था कि सभी सरकारी दफ्तरों, विद्यालयों आदि में सौर ऊर्जा संयत्र लगाकर वर्तमान परम्परागत बिजली की खपत कम की जा सकती है। इस पर उन्होंने कहा था कि उसे लगाना बहुत अधिक महंगा है।मैंने विचार व्यक्त किया था कि इस दिशा में शोध कार्य किए जाने चाहिए, जिससे लागत कम हो सके। मैंने यह भी कहा था कि गांवों में बड़े सौर ऊर्जा संयत्र लगाकर उनसे उन गांवों के सभी घरों में बिजली दी जा सकती है।


मेरी मान्यता रही है कि भले ही शुरू में सौर ऊर्जा संयत्र लगाने में भारी खर्च बैठता हो, लेकिन बाद में उससे बचत वाली सुखद स्थिति हो जाएगी। उक्त अभियान के लिए सरकार को अपने बजट में पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए तथा धीरे-धीरे ऐसा कर दिया जाय कि भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा देश में ऊर्जा का मुख्य स्रोत बन जाय। इससे वर्तमान समय में परम्परागत बिजली वाले तमाम झंझट कम होंगे तथा तापीय बिजली पैदा करने में कोयले की जो भारी खपत होती है, वह बचेगी। सौर ऊर्जा महंगी होने के कारण अभी लोग घरों में उसके उपयोग के लिए अधिक उत्साहित नहीं हो सकते हैं। लेकिन सरकार तो सौर ऊर्जा का भरपूर उपयोग कर ही सकती है। समस्त सरकारी कार्यालयों आदि में तथा सभी सरकारी आयोजनों में सिर्फ सौर ऊर्जा के उपयोग की अनिवार्यता कर दी जानी चाहिए। गौतमबुद्धनगर में जो फिल्म-नगरी का निर्माण हो रहा है, वहां केवल सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाय। गांवों में बड़े-बड़े सौर ऊर्जा संयत्र लगाकर उससे सभी ग्रामीण घरों को बिजली दी जा जाय।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिमाग नए-नए जनोपयोगी विचारों से ओतप्रोत रहता है। इसीलिए मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने गुजरात में सौर ऊर्जा के महत्व को समझकर उसे बढ़ावा देने का कदम उठाया था। विगत सत्तर वर्षों में मोदी की भांति वैकल्पिक ऊर्जा की ओर ध्यान दिया गया होता तो आज हमारा देश ऊर्जा-क्रांति के शिखर पर होता तथा हमारे देश में गुप्तकाल की तरह पुनः स्वर्णयुग आ जाता।उत्तर प्रदेश का भी सौभाग्य है कि यहां प्रधानमंत्री मोदी की तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रचनात्मक विचारों वाले हैं तथा वैकल्पिक ऊर्जा की ओर, विशेषकर सौर ऊर्जा पर, बहुत अधिक ध्यान दे रहे हैं।


उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ब्रजेश पाठक के बारे में आम धारणा है कि वह मददगार स्वभाव के हैं तथा जो कहते हैं, वह करते भी हैं। अन्य तमाम नेताओं की तरह उनमें झांसा देने की प्रवृत्ति नहीं है। अपने परिश्रम एवं सक्रियता से वह उत्तर प्रदेश सरकार के अत्यंत श्रेष्ठ मंत्री के रूप में चर्चित हो गए। कुछ समय पूर्व जब उनके पास वैकल्पिक ऊर्जा विभाग था तो उन्होंने वैकल्पिक ऊर्जा की संभावनाओं पर बहुत ध्यान दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि सौर ऊर्जा हमारे देश में ‘प्रकाश क्रांति’ लाने में तो सक्षम होगी ही, उससे कार्बन का उत्सर्जन रुकेगा और फलतः प्रदूषण पर लगाम लगेगी।


ब्रजेश पाठक ने उस समय मुझे बताया था कि उनके विभाग का प्रयास है कि सौर ऊर्जा के प्रति जनता में अधिकाधिक जागरूकता एवं रुचि पैदा की जाय, ताकि सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक विस्तार और उपयोग हो। लाभार्थियों को अनुदान देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका नतीजा यह होगा कि लखनऊ ‘सौर ऊर्जा नगर’ के रूप में परिवर्तित हो जाएगा। धीरे-धीरे पूरे प्रदेश का यही रूप होगा। उन्होंने बताया था कि लखनऊ में विधानभवन को भी सौर ऊर्जा से जगमग किए जाने का प्रस्ताव है। उनके विभाग द्वारा सभी विधायकों, सांसदों, जिला पंचायत अध्यक्षों, खंडप्रमुखों, ग्रामप्रधानों को पत्र लिखकर अपने घरों एवं कार्यालयों में छतों पर सौर ऊर्जा संयत्र लगाने का अनुरोध किया गया है तथा पांच वर्षों में 10700 मेगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।


उस समय ब्रजेश पाठक ने वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में, उनका तत्कालीन विभाग, जो तमाम महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, उनकी विस्तार से चर्चा की थी। ब्रजेश पाठक की यह विशेषता भी है कि वह दूसरों के अच्छे सुझावों पर पूरा तवज्जो देते हैं। इसी से मैंने उस समय जो अच्छे सुझाव दिए थे, उन पर अमल करने का अपने अधिकारियों को निर्देश दिया था। ब्रजेश पाठक ने यह भी बताया था कि रिहंद बांध के जलाशय में १५० मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा तथा बांध पर सचल सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए चयन-प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

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