भाजपा का बयान झूठ का पुलिंदा-लौटनराम निषाद

17 अतिपिछड़ी जातियों के एससी में शामिल किए जाने सम्बंधित भाजपा नेता का बयान झूठ का पुलिंदा।20 दिसम्बर को मुख्यमंत्री ने मझवार के सम्बन्ध में आरजीआई को जो पत्र भेजे,उसका क्या हुआ…?

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार को सुने”] लखनऊ। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पूर्व विधायक के के राज ने 4 दिन पूर्व इटावा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बयान दिए कि 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल कर लिया गया है।राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौ.लौटनराम निषाद के के राज के बयान को झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह का झूठा बयान आपत्तिजनक व गैरजिम्मेदाराना है।यूपीएससी कमीशन के सदस्य का यह बयान कि भाजपा सरकार ने निषाद, मल्लाह,केवट,बिन्द, धीवर,कहार,रैकवार,बाथम,राजभर,कुम्हार को सरकार ने अनुसूचित जाति में शामिल कर लिया,सत्यता से परे है।उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि मुख्यमंत्री ने मझवार की पर्यायवाची जातियों के सम्बंध में आरजीआई को 20 दिसम्बर,2021 को पत्र भेजकर जो जानकारी मांगे थे,उसका क्या हुआ?उन्होंने उत्तर प्रदेश अनुसूचित आयोग के सदस्य के के राज द्वारा इटावा में दिए गए बयान के सम्बंध में स्पष्टीकरण की मांग किया है।भाजपा सरकार 17 अतिपिछड़ी जातियों को झूठा भुलावा दे रही है।


निषाद ने बताया कि 22 दिसम्बर व 31 दिसम्बर 2016 को 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने शासनादेश सपा सरकार ने जारी किया था।24 जनवरी 2017 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ ने डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय एवं जनकल्याण समिति गोरखपुर की याचिका के आधार पर स्थगन आदेश दे दिया था।29 मार्च 2017 को राष्ट्रीय निषाद संघ के पक्ष को इसके अधिवक्ता सुनील कुमार तिवारी ने साक्ष्य सहित मजबूती से अपना तर्क दिया।मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्टे वैकेट करते हुए इन जातियों का प्रमाण पत्र बनाने का निर्णय दिया।उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय का अनुपालन करते हुए मण्डलायुक्तों व जिलाधिकारियों आदेश जारी न कर नया शासनादेश उस विषयक जारी किया।2017 से अब तक दर्जनों बार न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से काउंटर एफिडेविट की मांग किया,परन्तु प्रदेश सरकार ने काउंटर एफिडेविट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया।न्यायालय ने 13 अप्रैल को उक्त मामले की सुनवारी करते हुये सरकार को कड़ी फटकार लगाई।उच्च न्यायालय ने मई महीने में लगने वाली तारीख को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया।


निषाद ने कहा कि भजपा सरकार निषाद सहित 17 फ़अतिपिछड़ी जातियों से वादाखिलाफी व अन्याय कर रही है।2017 से उत्तर प्रदेश सरकार अतिपिछड़ी जातियों के अधिकारों को छिनती आ रही है।मत्स्य पाल[/Responsivevoice]न, बालू मोरंग खनन जैसे परम्परागत पेशों को सार्वजनिक नीलामी द्वारा छीनकर बाहुबलियों व सामंती माफियाओ के हाथों नीलाम करवा रही हैं।उन्होंने बताया कि मल्लाह,केवट,माँझी, बिन्द, धीवर, धीमर,रैकवार, तुरहा गोड़िया,कहार आदि अनुसूचित जाति में 10 अगस्त,1950 से शामिल मझवार,बेलदार,तुरैहा, गोंड़ की पर्यायवाची व वंशानुगत जाति नाम हैं।सेन्सस-1961 के अनुसार माँझी, मल्लाह,केवट,गोंड़ मझवार,मुजाबीर को मझवार की पर्यायवाची व जेनरिक नाम माने जाने के बाद भी इन जातियों के साथ अन्याय व सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

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