अखिलेश यादव का भाजपा सरकार पर हमला: कानून, संविधान और लोकतंत्र को लेकर उठाए सवाल।अखिलेश यादव के बयान में कानून-व्यवस्था, लोकतंत्र, रोजगार, स्वास्थ्य, उद्योग और कृषि जैसे कई मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। उन्होंने भाजपा सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जनता से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
लखनऊ। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कानून और संविधान के अनुसार काम नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में सत्ता का मनमाने तरीके से इस्तेमाल हो रहा है और पुलिस को खुली छूट मिली हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक भाजपा सरकार सत्ता में रहेगी, तब तक कानून के मुताबिक काम होने की उम्मीद कम है।अखिलेश यादव ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि गुण्डा एक्ट के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी बेहद गंभीर है। भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कानूनों का दुरुपयोग कर रही है और लोगों पर झूठे मुकदमे लगाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
विपक्ष को बदनाम करने के लिए सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष को बदनाम करने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए वीडियो बनवाए जा रहे हैं और इस मामले में हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने एक महिला द्वारा वीडियो बनवाने वाले अधिकारी पर लगाए गए आरोप का भी उल्लेख किया और कहा कि महिला आयोग को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए।
आउटसोर्स व्यवस्था खत्म कर पक्की नौकरी का वादा
पूर्व मुख्यमंत्री ने पंचायत सहायकों समेत विभिन्न संगठनों के धरना-प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों और संगठनों को धोखा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों से काम लिया, लेकिन बाद में उन्हें अपमानित किया। अखिलेश यादव ने कहा कि सभी लोग मिलकर भाजपा को सत्ता से हटाने का काम करें। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ग्राम स्तर की नौकरियों की विसंगतियों को दूर किया जाएगा। आउटसोर्स व्यवस्था को समाप्त कर पक्की नौकरी देने और वेतन विसंगतियों को दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही चरम पर है और मरीजों को कभी-कभी उनकी बीमारी के अनुरूप दवा तक नहीं मिल पाती। उन्होंने झांसी की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी का इलाज नहीं करा पाया और मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं होने के कारण शव को नदी में बहा दिया। इस घटना का हवाला देते हुए उन्होंने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए।
एमएसएमई सेक्टर को लेकर सरकार पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने लखनऊ के सरोजनी नगर और कानपुर के औद्योगिक क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति खराब है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार बड़ी मात्रा में सामान बाहर से आयात करेगी तो प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर कैसे आगे बढ़ेगा। उन्होंने स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत बताई।
“लोकतंत्र में सवाल पूछने की आजादी होनी चाहिए”
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार विकसित भारत के सपने दिखा रही है, लेकिन सरकार से सवाल पूछने की आजादी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव, शहर या स्कूल की समस्या उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और सवाल पूछने वालों को धमकाया तथा प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को सवाल पूछने की पूरी आजादी होनी चाहिए। सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समिट और विकास के दावों पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न समिट और विकास संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि पर्यावरण, कृषि, स्पेस टेक्नोलॉजी, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्षेत्र में वास्तव में कितनी प्रगति हुई है।
उन्होंने शहरी क्षेत्रों में जाम, ठोस कचरा प्रबंधन और नदियों की सफाई जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि केवल समिट आयोजित करने और दूसरे देशों के नेताओं के आने से आम जनता की समस्याएं हल नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए।
किसानों की आय और फसल की कीमत पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि कृषि क्षेत्र में वास्तविक प्रगति कितनी हुई है और किसानों को किस फसल की उचित कीमत मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को खाद और बीज उपलब्ध कराने में भी सरकार विफल है। आलू, गन्ना और मक्का समेत कई फसलों की उचित कीमत नहीं मिलने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।



