Monday, March 23, 2026
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मजदूर विरोधी कारखाना अधिनियम संशोधन-कामरेड कन्हैया

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मजदूर विरोधी कारखाना अधिनियम संशोधन-कामरेड कन्हैया
मजदूर विरोधी कारखाना अधिनियम संशोधन-कामरेड कन्हैया

उत्तर प्रदेश सरकार द्बारा काम के घंटे 12 करने का मतलब है मजदूरों की आधुनिक गुलामी – भाकपा माले

मजदूर विरोधी कारखाना अधिनियम संशोधन कानून वापस ले योगी सरकार -कामरेड कन्हैया

ब्यूरो निष्पक्ष दस्तक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कल विधानसभा में कारखाना अधिनियम संशोधन कानून और बोनस संदाय संशोधन कानून पारित करने के लिए पेश किए जाने पर भाकपा माले रेडस्टार उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने गम्भीर चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा विरोध जताया है। पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव कामरेड कन्हैया ने ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा कि उत्तर प्रदेश में कॉर्पोरेट घरानों के पूंजी निवेश को आकर्षित करने और उत्तर प्रदेश की इकोनॉमी को 1 ट्रिलियन बनाने के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार मजदूरों को आधुनिक गुलामी में धकेल देने में लगी है। पार्टी राज्य सचिव कामरेड कन्हैया ने कहा कारपोरेट घरानों की एजेंट उत्तर प्रदेश सरकार द्बारा कारखाना अधिनियम में संशोधन करके काम के घंटे 12 करने का कानून बनाना और बोनस ना देने वाले मालिकों की गिरफ्तारी से छूट देने का कानून बनाना मजदूर विरोधी है। पार्टी ने मजदूर बिरोधी दोनों कानूनो को फौरन वापस लेने की मांग फासिस्ट योगी सरकार से की है। मजदूर विरोधी कारखाना अधिनियम संशोधन-कामरेड कन्हैया

पार्टी राज्य इकाई ने कहा कि काम के घंटे 12 करने से मजदूरों की कार्य क्षमता पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ेगा और वह उत्पादन करने में लगातार असक्षम होते जाएंगे। इतना ही नहीं पहले से ही भीषण बेरोजगारी का दंश झेल रहे उत्तर प्रदेश में कानून में यह संशोधन बेरोजगारी को और बढ़ाने का काम करेगा और उद्योगों में कार्यरत करीब 33 परसेंट मजदूरों की अभी छटंनी हो जाएगी, जो 8 घंटे की तीन शिफ्ट में आज काम कर रहे हैं। यह संशोधन कानून काम के घंटे 8 करने के इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के कन्वेंशन, जिसका भारत सरकार भी हस्ताक्षर कर्ता है, का सरासर उल्लंघन है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के समय भी उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे लागू करने का प्रयास किया था। जिसे एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जवाब तलब करने के बाद सरकार ने वापस ले लिया था। पार्टी ने इस मजदूर विरोधी संशोधन कानूनों के खिलाफ सभी बामपंथी दलों, मजदूर संगठनों,ट्रेड यूनियन संगठनों से एकजुट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की है।

पार्टी राज्य सचिव कामरेड कन्हैया ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन 2019 से ही लंबित पड़ा हुआ है और इसे करने को सरकार तैयार नहीं है। परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी केंद्र सरकार के सापेक्ष बेहद कम है। यही नहीं असंगठित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 2008 में कानून बना है। प्रदेश में ई-श्रम पोर्टल पर 8 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूरों का पंजीकरण हुआ है। लेकिन उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए कोई भी योजना सरकार चलाने को तैयार नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की हिन्दूत्व फासीवादी भाजपा सरकार चरित्र कॉर्पोरेट पक्षधर और मजदूर विरोधी है। मजदूर विरोधी कारखाना अधिनियम संशोधन-कामरेड कन्हैया