Saturday, March 14, 2026
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जानें हनुमान जी के जन्म का रहस्य

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जानें हनुमान जी के जन्म का रहस्य
जानें हनुमान जी के जन्म का रहस्य

हनुमान जी को भगवान राम ने अमरत्व का वरदान दिया था। इसलिए, वे कलयुग के अंत तक पृथ्वी पर रहेंगे। कलयुग का अंत अभी भी बहुत दूर है, इसलिए हनुमान जी अभी भी पृथ्वी पर हैं और रहेंगे। कौन नहीं जानता होगा हनुमान जी को। पर आज हम जानेंगे। हनुमान जी के जन्म का रहस्य। हनुमान का जन्म राम जी के जन्म से सम्बन्ध। हनुमान जी को शिव जी का 11वां रूप माना जाता है। हनुमान जी को महावीर हनुमान के नाम से भी जाना जाता है। हनुमान जी के पिता का नाम वानरराज केसरी है। माता का नाम अंजनी था। जिसके कारण इन्हें अंजनिपुत्र हनुमान भी कहा गया। हनुमान जी श्री राम के परम भक्त माने जाते हैं। हनुमान जी का प्रेम श्री राम के प्रति था। जैसे हनुमान श्री राम के भाई हों। जानें हनुमान जी के जन्म का रहस्य

हनुमान जी के जन्म का श्री राम के जन्म से संबंध-

आइये जानते हैं। हनुमान जी के जन्म का रहस्य। हनुमान जी का जन्म श्री राम के जन्म से कैसे सम्बंधित है। एक बार अंजनी पुत्र प्राप्ति के लिए शिव जी की पूजा कर रही थी। दूसरी तरफ राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करा रहे थे। यज्ञ के दौरान राजा दशरथ को एक बर्तन मिला। जिसमे हलवा था। यह हलवा रानियों को खिलाने से पुत्र की प्राप्ति होती। यह हलवा जब राजा महल ले जा रहे थे। तभी रास्ते में एक बाज आया। थोड़ा हलवा अपनी चोंच में दबाकर उड़ गया। यह हलवा बाज ने जहां अंजनी ध्यान कर रही थी। वहां गिरा दिया।

वेदों और पुराणों के अनुसार, पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म चैत्र मंगलवार के ही दिन पूर्णिमा को नक्षत्र व मेष लग्न के योग में हुआ था। इनके पिता का नाम वानरराज राजा केसरी थे। इनकी माता का नाम अंजनी थी। रामचरितमानस में हनुमान जी के जन्म से संबंधित बताया गया है कि हनुमान जी का जन्म ऋषियों द्वारा दिए गए वरदान से हुआ था।

अंजनी ने हलवे को शिव का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लिया। इस पश्चात अंजनी ने हनुमान जी को जन्म दिया। इसी हलवे से राजा दशरथ की रानियों को पुत्र प्राप्त हुए। कौशल्या ने राम को जन्म दिया। कभी कभी यह भी सवाल उठता है। क्या भाई थे राम और हनुमान। दोनों का जन्म एक ही हलवे से हुआ था। इसलिए यह हनुमान जी के जन्म का श्री राम के जन्म से संबंध था। यह रहस्य जानकर आप चौंक गए होंगे।  हनुमान जी के जन्म से जुड़ा रहस्य यह था।

श्रीमद् भागवत में मिलता है कि कलयुग में हनुमान जी गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं। यह पर्वत कैलाश के उत्तर में स्थित है। महाभारत के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान भीम सहस्त्रदल लेने के लिए गंधमादन पर्वत पर पहुंचे थे, तब हनुमान जी ने उनका रास्ता रोका था। इसलिए महाभारत के अनुसार गंधमादन पर्वत पर ही हनुमान जी का निवास है। जानें हनुमान जी के जन्म का रहस्य