आधुनिक जीवन में योग क्यों महत्वपूर्ण….?

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के0 डी0 मिश्रा0

योग केवल व्यायाम करने भर नहीं है, अपितु यह विज्ञान पर आधारित एक ऐसी शारीरिक क्रिया है, जिसमें हम अपने मस्तिष्क, हृदय और अपने संपूर्ण शरीर को एक-दूसरे से तादात्म्य स्थापित करने का सद् प्रयास करते हैं। यह एक वैज्ञानिक तौर पर की गई एक सुनियोजित और प्रतिबद्धता पूर्ण प्रयास है। इसके साथ ही मानव और प्रकृति के बीच एक ईमानदार, करूणामयी और जनकल्याणकारी सामंजस्य भी बनता है। आधुनिक जीवन शैली ने मन-शरीर के संबंधों में सामजंस्य खो दिया है जिससे उच्च रक्तचाप, कोरोनरी हृदय रोग और कैंसर जैसी कई तनाव-आधारित बीमारियां हो गई हैं। इन बीमारियों को रोकने और उनका इलाज करने के प्रयास ने बेहतर जीवन शैली और बेहतर रणनीतियों की खोज को गति दी, जो कि योग जैसे प्राचीन विषयों की पनुर्खोज में परिवर्तित हो गए, जीवन शैली को स्थायी मानसिक शांति के लिए शक्तिशाली अचकू नुस्खे के साथ जोड़ना जैसा कि नैदानिक अध्ययनों द्वारा पुष्टि की गई है।योग आधुनिक जीवन जीने का, सही जीवन जीने का विज्ञान है और इसे हमारे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह सप्ताह में एक बार सिर्फ दो घंटे की हॉबी क्लास नहीं है। योग में दिमाग को शांत करने, लचीलापन बनाए रखने, शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का दोहन करने और एक एकीकृत व्यक्तित्व विकसित करने में मदद करने के लिए तकनीकी प्रणालियां हैं। यह भावनाओं को संतुलित करने और मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक तरीका है। एक व्यक्ति अपनी जीवन शैली के अनुसार योग के कई मार्गों – हठ, भक्ति , राज, ज्ञान और कर्म योग में से एक या दो या अधिक के संयोजन को चुन सकता है।

व्यक्ति प्राणायाम, आसन, विश्राम, ध्यान और प्रत्याहार तकनीकों का अभ्यास कर सकता है, साथ ही जहां संभव हो व्यक्तिगत और सामाजिक विषयों का पालन कर सकता है। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह यह पता करे कि उसकी आवश्यकताओं, जीवन शैली और व्यक्तित्व के लिए कौन सा मार्ग सबसे उपयुक्त है। एक सामान्य जीवन शैली का नेतृत्व करते हुए योग का अभ्यास किया जा सकता है, लेकिन विभिन्न आकांक्षाओं, मानसिकता और स्वयं के प्रति दृष्टिकोण और जीवन में बातचीत के साथ।योग का अभ्यास करने की कला व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह एक शांतिपूर्ण शरीर और मन को प्राप्त करने के लिए शारीरिक और मानसिक विषयों को एक साथ लाता है, तनाव और चिंता को प्रबंधित करने में मदद करता है और आपको तनावमुक्त रखता है। यह लचीलेपन, मांसपेशियों की ताकत और बॉडी टोन को बढ़ाने में भी मदद करता है। यह श्वसन, ऊर्जा और जीवन शक्ति में सुधार करता है। योग का अभ्यास करना सिर्फ स्ट्रेचिंग जैसा लग सकता है, लेकिन यह आपके शरीर के लिए आपके महसूस करने, देखने और चलने के तरीके से बहुत कुछ कर सकता है।

11दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी है। योग की परिभाषा हमारे ग्रंथों में अलग अलग है परंतु इसका सीधा संबंध मानव शरीर के स्वास्थ्य से ही जुडा है योग हमें प्रकृति से जोडता है।योग हर वर्ष अब मनाया जाता है क्योंकि योग मानव के लिए एक सहारे का कार्य करेगा, यह आधुनिक जीवन जहां अचानक से मौसम बदल रहे है वनस्पति कम हो रही है, पर्यावरण दूषित हो रहा है तो ऐसे में मानव शरीर का नुकसान होना समझ में आता है, मानव शरीर को सुरक्षित रखने के उपायों में से एक योग है।आधुनिक जीवन में लोगो के पास समय कम कार्य ज्यादा है और बीमारियां बढ़ रही है जिसका तुरन्त निवारण नही है लोग तनावों से घिर रहे है, इस आधुनिक युग में मस्तिष्क का कार्य बहुत बढ़ गया है आबादी बढ़ने से दुर्घटना स्तर का बढ़ना और तनाव स्तर का बढ़ना मामूली बात है। ऐसे में मस्तिष्क संबंधी बीमारी भी बढ़ रही है, ज्यादातर बाहरी देशों में मस्तिष्क संबंधी बीमारी या डिसऑर्डर मिलते है जिनका जीवन बहुत तनावपूर्ण होता है इसीलिए योग को आज इतनी बडी महत्ता दी जा रही है क्योंकि स्नायु विज्ञान अभी बाल्यावस्था में है अर्थात स्नायु विज्ञान अभी भी शोध के अवस्था में हैं, इसलिए स्नायु संबंधी बीमारी वाले मानव को डॉक्टर हमेशा योग की सलाह जरूर देता है क्योंकि योग हमारी नाडियों (तंत्रिका) को सुधारता है और उन्हें जगाता है जिसकी फिलहाल अभी तक कोई दवा नहीं है जो नुकसान हुई न्यूरॉन्स को एकदम से सही कर सके।

योग हमारे मन की स्थिति को स्थिर रखता है, जब हम मंत्र योग करते है तो जो उच्चारण होता है वह ११० हर्ट्ज की ध्वनि उत्पन्न करता है जिससे एक कंपन का अनुभव होता है अर्थात हमारे न्यूरॉन को मसाज का अनुभव सा होता है, और हमारा मस्तिष्क इस समय शांत और एकाग्र हो जाता है इसीलिए सुबह सुबह ॐ उच्चारण ११० हर्ट्ज की ध्वनि में करने से मस्तिष्क रोग काबू में आता है, उदहारण के लिए हम माइग्रेन जैसी बीमारियों से मुक्त हो जाते है और इस समय में माइग्रेन जैसी बीमारी को कोई दवा पूर्ण रूप से सही नही कर सकती केवल योग के सिवा। भारत योगों का घर है यहााँ तंत्र मंत्र योग से कर्म योग, ज्ञान योग हठ योग आदि आदि प्रकार के योग मौजूद है जिनका हमारे जीवन में अलग अलग रूप से महत्व है। लोग इस आधुनिक जीवन में बहुत व्यस्त है, जब मस्तिष्क को आराम नही मिलता तो यह योग ही हमारे मस्तिष्क को 8 घंटे की नींद जितना आराम देता है, योग द्वारा कई प्रकार की न्यूरो बीमारियों को ठीक होते देखा गया है, और आजकल के युग में न्यूरो बीमारियों से ग्रसित लोग योग को ज्यादा महत्व देते है क्योंकि योग उन्हें एक प्रकार से बीमारी से सुकून प्राप्त करवाता है। योग में बताए गए आसन हमारे शरीर की सभी नसों और तंत्रिकाओं को खींचती है जिनसे हमारी नसें सही रूप से कार्य कर सके योग में अलग अलग आसन मस्तिष्क के अलग अलग तंत्रिकाओं को सक्रिय करती है और उन्हें ठीक करती है। और यह एक बहुत सटीक कारण है की अन्य देशों में योग को क्यों एकदम से अपना लिया। क्योंकि वो यह जानते है की योग बहुत कारगर है मानव शरीर को स्वस्थ रखने हेतु। इसीलिए योग आधुनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

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