क्यों रहता है दरोगा जी का पारा हाई जो अधिकतर कड़वा बोलते है…

लखनऊ, खाकी वर्दी पहनकर हमेशा ताव में रहने वाले दारोगाजी को देखकर लोग अक्सर बोल देते हैं, अरे वर्दी की गर्मी है। ऐसा नहीं है, इस ताव का कारण वर्दी की गर्मी नहीं, वो तनाव है, जो इस ड्यूटी के दौरान उन्हें मिल रहा है। यह बात एक शोध के दौरान सामने आई है। शोध के अनुसार सामाजिक दबाव के साथ ही अफसर, ड्यूटी और परिवार के प्रेशर दारोगाजी के दिमाग का दही बना देते हैं। इन्हीं सबके चलते वो तनाव ग्रस्त रहते हैं, जिसका प्रभाव कई बार उनके व्यवहार में दिखने में लगता है।

लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, रायबरेली, गाजीपुर और नोएडा जिलों में तैनात दारोगा (इंस्पेक्टर), पुलिस अधिकारी (सीओ, डिप्टी एसपी, एसपी) और सिपाही में तनाव का स्तर जानने के लिए वैज्ञानिकों ने शोध किया। पता चला कि इन तीनों में सबसे अधिक तनाव इंस्पेक्टर में मिला। इंस्पेक्टर में तनाव का स्कोर 39.89 मिला। तनाव के मामले में पुलिस अधिकारी दूसरे नंबर पर रहे। इनमें तनाव का स्कोर 37.03 मिला। सिपाहियों में सबसे कम तनाव देखने को मिला। इनमें 36.0 स्कोर मिला। शोध के मुताबिक पुलिस अफसरों और कर्मचारियों का तनाव कम करने के विशेष योजना की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक सात से अधिक स्कोर होने पर तनाव माना जाता है इंस्पेक्टर में तनाव का स्कोर 39.89 मिला। इस मामले में पुलिस अधिकारी दूसरे नंबर पर रहे। सबसे कम तनाव सिपाहियों में मिला। शोध पत्र में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में तनाव कम करने के लिए विशेष योजना की जरूरत है।

कारण जानने के ल‍िए पूछे गए ये सवाल…

ड्यूटी के दौरान चोट की आशंका,सामाजिक जीवन कैसा,परिवार और दोस्तों को कितना समय दे पाते है,समय पर भोजन,थकान,समाज से नकारात्मक कमेंट,सामाजिक जीवन में बाध्यता,अपने स्वास्थ्य के लिए समय,ड्यूटी के कारण शारीरिक परेशानी,कार्य के अवधि,रात में अकेले कार्य,ओवर टाइम,ड्यूटी से जुड़ी अन्य गतिविधि जैसे कोर्ट, सामाजिक क्रियाशीलता,पेपर वर्क,परिवार और,दोस्तों को हमारे काम को लेकर परेशानी की समझ,हमेशा ड्यूटी पर रहने की सोच,इस तरह हुआ शोध।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग की डॉ0 श्वेता सिंह, डॉ0 वंदना गुप्ता, डॉo दिव्या शर्मा और लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ0 प्रेम चंद्र मिश्र ने ए स्टडी ऑफ स्ट्रेस कोपिंग सोशल सपोर्ट एंड मेंटल हेल्थ इन पुलिस पर्सनल ऑफ उत्तर प्रदेश विषय पर शोध किया। इंस्पेक्टर, अफसर और सिपाही पद पर तैनात सौ-सौ लोगों लोगों में तनाव का स्तर जानने के लिए प्रश्नपत्र तैयार किया गया। जवाब के आधार पर तनाव का आकलन किया। इस शोध को हाल में ही इंडियन जर्नल आफ आक्यूपेशनल एंड एनवायर्मेंटल मेडिसिन ने स्वीकार किया है।

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