पिछड़ों को दरकिनार कर काँग्रेस को मजबूत करना असम्भव-लौटनराम निषाद

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“राज्यसभा चुनाव में नवसंकल्प चिन्तन शिविर में लिए गए निर्णय को भी नहीं दिया गया महत्व”।पिछड़ों को दरकिनार कर काँग्रेस को मजबूत करना असम्भव।

लखनऊ।देश व प्रदेश के जातिगत समीकरण में पिछड़ी जातियों की सर्वाधिक आबादी है।राजनीति की दिशा-दशा में परिवर्तन में इस वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।भाजपा पिछड़े वर्ग की सबसे बड़ी विरोधी पार्टी रही है,पर वर्तमान में मुखौटा राजनीति के चलते वह सफलता को अर्जित करती आ रही है।दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी पिछड़ों को जोड़ने का कोई विशेष अभियान नहीं चला पा रही।राजस्थान के 3 दिवसीय चिंतन शिविर में पिछडों,वंचितों को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व संगठन व टिकट वितरण में दिए जाने का निर्णय हुआ।पर,राज्यसभा चुनाव में ऐसा नहीं किया गया।कांग्रेस के 10 घोषित उम्मीदवारों में 5 ब्राह्मण,1 दलित व 4 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार हैं।भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ.लौटनराम निषाद ने पिछड़ी जातियों को विश्वास में लेने के लिए इन्हें हर स्तर पर हिस्सेदारी देने का कदम उठाना चाहिए।कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ से 1-1 ओबीसी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाना अपेक्षित था।


निषाद ने कहा कि भाजपा बार बार सफलता पा रही है क्योंकि सबसे ज्यादा उसका जोर ओबीसी,एससी,एसटी को जोड़ने पर दे रही।बताया कि राज्यसभा की 57 सीटों में से भाजपा ने 23 उम्मीदवार उतारा है जिसमें 10 ओबीसी,एमबीसी व दलित हैं। 3 कुनबी/पटेल के साथ 1-1 निषाद, कम्मा,वोक्कालिगा, मौर्य/यादव,गुजर,सैनी,साहू जाति के हैं।यह भाजपा की मुखौटा राजनीति का हिस्सा है।उत्तर प्रदेश से भाजपा के 22 सांसद व 90 विधायक ओबीसी वर्ग के हैं।तमिलनाडु, कर्नाटक,आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल,पुड्डुचेरी में 62 से 71 प्रतिशत व उत्तर प्रदेश,बिहार,राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़,झारखण्ड,ओडिशा में 50 से 60 प्रतिशत ओबीसी की संख्या हैं।देश के पिछड़ों में यादव, निषाद, कुर्मी, कम्मा, कोर्चा, कुरुबा,लिंगायत,वोक्कालिगा,सफ़ालिगा,मोगाविरा,बंजारा,धीवर,कश्यप,गुजर,कोली,आगरी,वन्नियार,अग्निकुला क्षत्रिय, वन्नियाकुला क्षत्रिय,कापू आदि प्रमुख जातियाँ हैं।


निषाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 43 प्रतिशत से अधिक हिन्दू पिछड़ी जातियाँ हैं।जिसमें यादव के बाद निषाद/कश्यप,कुर्मी,मौर्य/शाक्य/सैनी कुशवाहा, राजभर, चौहान, जाट, गुजर, पाल,साहू,विश्वकर्मा,नाई/सबिता,लोधी/किसान आदि प्रमुख हैं।जिसमे से कुछ प्रदेश कर हर क्षेत्र तो कुछ क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावशाली हैं।निषाद/कश्यप/बिन्द-10.25%, यादव-8.6%, कोयरी/काछी/सैनी-4.55%,कुर्मी-4.1%,लोधी/किसान-3.60 प्रतिशत,पाल-2.38%,जाट-1.97%,विश्वकर्मा-1.72%,साहू-1.61%,राजभर-1.31%,चौहान-1.26%,नाई/सबिता-1.11%,कानू/भुर्जी-1.01%,गुजर-0.72% हैं।

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