पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी के भतीजे हनी के घर 10 करोड़ नकद..?

  • हनी के घर से 10 करोड़ रुपए नकद और करोड़ों की संपत्तियों के कागजात मिले हैं।
  • कांग्रेस हाईकमान की बुलबुल नहीं बनना था तो नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष क्यों बने..?
  • राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बताएं कि पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी के भतीजे भूपेंद्र सिंह हनी के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय कार्यवाही क्यों नहीं करें..?

एस0 पी0 मित्तल

केंद्रीय जांच एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर सबसे ज्यादा हमला राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत करते हैं। गहलोत का हर भाषण में कहना होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इनकम टैक्स, सीबीआई, ईडी आदि के जरिए अपने विरोधियों को डराते हैं। इसलिए देश में डर और भय का वातावरण है। गहलोत अपने बयानों में सुप्रीम कोर्ट और मीडिया को भी घसीटते हैं। ऐसे आरोपों के बीच हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे भूपेंद्र सिंह हनी पर छापा मार कार्यवाही की है। हनी पर बजरी के अवैध खनन का आरोप है। ईडी की इस कार्यवाही के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने आरोप लगाया है कि सीएम चन्नी के भतीजे हनी के ठिकानों से जो 10 करोड़ रुपए नकद मिले हैं, वो सिर्फ अवैध खनन से नहीं बल्कि अफसरों के तबादले से प्राप्त हुए हैं।

चड्ढा ने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी 111 दिन प्रभावी मुख्यमंत्री रहे। इस अवधि में उन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया। उन्होंने कहा कि भले ही यह छापामार कार्यवाही राजनीतिक नजरिए से की गई हो, लेकिन चन्नी के भतीजे के पास से 10 करोड़ रुपए नकद मिले है, इस हकीकत पर कोई पर्दा नहीं डाल सकता। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के प्रशंसक रहे हैं। गहलोत अब बताएं कि क्या भूपेंद्र सिंह हनी पर ईडी की कार्यवाही पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी को डराने के लिए है? यदि कोई व्यक्ति बेईमानी करेगा तो जांच एजेंसियां कार्यवाही तो करेंगी ही। यदि कोई नेता ईमानदार है तो उसे मोदी सरकार की किसी भी जांच एजेंसी से डरने की जरुरत नहीं है। जांच एजेंसियों की कार्यवाही पर टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन किसी भ्रष्टाचारी को नहीं बचाया जा सकता। बेईमान व्यक्ति को कभी भी पकड़ा जाए यह अच्छी बात है।

तो सिद्धू कांग्रेस में क्यों आए….?
कांग्रेस की ओर से पंजाब चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इसकी घोषणा 6 फरवरी को राहुल गांधी करेंगे। लेकिन कांग्रेस की ओर से पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी प्रचार सामग्री भिजवा दी गई है, जिसमें मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को ही चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया गया है। इस स्थिति को देखते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि कांग्रेस आला कमान को ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए जो उनके इशारे पर नाचे। सिद्धू ने एक सार्वजनिक सभा में मुम्बईया हिन्दी फिल्मों का गाना, नाच मेरी बुलबुल पैसा मिलेगा, मेरा जैसा कद्र दान कहा मिलेगा के शब्द भी सुनाए। सवाल उठता है कि जब सिद्धू को हाईकमान की बुलबुल बनना पसंद नहीं है तो फिर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद क्यों स्वीकारा।

कांग्रेस की परंपरा तो यही रही है कि राज्यों में ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए जो हाईकमान की जी हजूरी करे। यदि कोई मुख्यमंत्री हाईकमान यानी गांधी परिवार की जी हजूरी नहीं करता है तो उसका हश्र कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह ही होता है। चुनाव के पांच माह पहले अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री के पद से हटाकर कांग्रेस आला कमान ने अपनी परंपरा को बनाए रखा है। मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाए जाने पर सिद्धू अब भले ही नाराज हो, लेकिन कैप्टन को सीएम के पद से हटवाने में सिद्धू की ही महत्वपूर्ण भूमिका थी। सिद्धू ने जो बागी तेवर दिखाए हैं उससे पंजाब में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पंजाब में प्रभाव रखने वाले सुनील जाखड़ पहले ही हाईकमान के रवैये से नाराज हैं। कहा जा सकता है कि कांग्रेस आला कमान इस समय पंजाब में सिर्फ चरणजीत सिंह चन्नी पर निर्भर हो गया है। मालूम हो कि पंजाब में आगामी 20 फरवरी को मतदान होना है।

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