अनाथों के नाथ सन्त श्री कृष्ण दास

“अनाथ के नाथ सन्त श्री कृष्ण दास की पुण्य तिथि”

तू ही मेरा ज्ञान है,तू ही मेरा धर्म है,तू ही मेरा अन्तर्मन,तू ही मेरा लक्ष्य है,तू ही मेरे शरीर का प्राण,मैं तेरी वंदना करता हूं।।

श्री कृष्ण दास अनाथ के नाथ आप हो, सुख-दुख जीवन प्यारे साथ हो, हरि चरणों में शीश नवाऊँ, सन्त श्री कृष्ण दास तेरी आरती गाऊं।।

वर्ष था 1984 का पंजाब के कई जिले लुहलुहान थे उस वर्ष पंजाब के गंगानगर के बुद्धसिंह वाला गांव में दंगाइयों ने एक ही परिवार में घर के दो लोगों को तलवार से शरीर को अंग भंग कर मार दिया था,एक लड़की जान बचाकर भाग रही थी दंगाइयों ने दौड़ा कर उसके गले को काट दिया था और घर के कोने में डर भय में दुबकने व मासूमियत के कारण दो ज़िन्दगी बख्स कर वे चले गए थे।

जिस लड़की का गला काट दिया गया था वह 01 माह तक अस्पताल में लडती तड़फती रही और अंततः दुनियां छोड़ कर चली गई इंसानियत ने कदम रखा और परिवार में बचे 02 मासूमों को सरपंच ने सरण दी थी -यूपी का ये परिवार पंजाब में रह रहा था समय समय पर पारिवारिक रिश्तों में जुड़े संत यूपी से पंजाब परिवार से मिलने जाया करते थे। इस बार भी वे जब पहुँचे तो देर हो चुकी थी। मोहल्ला वीरान था दूर बाशिन्दे ने बताया था सन्त को कि घटना में सब साफ हो गया जो बचे हैं वे सरपंच के यहां है।अयोध्या के चर्चित सन्त महंत धर्मदास पहलवान हनुमान गढ़ी के संपर्क व इन सन्त की 03 माह के मेहनत के बाद दो मासूम यूपी आ सके थे।सन्त की कृपा से अनाथ हुए बच्चों को नाथ मिले और ज़िन्दगी में माता व पिता की भूमिका इन संत ने अदा की।

सन्त श्री कृष्ण दास

पिछले वर्ष कोरोना अपने उफ़ान पर था और सन्त जी की तबियत खराब होने लगी थी मेरे एक पत्रकारीय भाई के मदद से उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। काफ़ी प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नही जा पाया। वैश्विक महामारी कोरोना ने बहुतों को दर्द दिया है। किसी का वंश खत्म हो गया है तो कोई अनाथ हो गया है। सन्त जी का पिछले वर्ष 29 अक्टूबर को कैंसर के कारण निधन हो गया। सन्त जी का नाम -श्री कृष्ण दास था उन्होंने जिन 02 व 03 साल के मासूमो को पालपोश कर बड़ा किया उन मासूमो में एक मैं था व एक मेरी बड़ी बहन है।मैंने माता पिता जी को तो नही देखा भगवान के रूप में मैंने अपने जीवन में ईश्वर देखा हूँ । बार बार देखा हूँ -सन्त के रूप में -सन्त की कृपा थी कि मैं आज समाज मे हूँ ज़िंदा हूँ पर दुःखद आज हमे ज़िन्दगी देने वाले हमारे बीच नही हैं ।आज इन सन्त की प्रथम पुण्य तिथि है नमन करता हूँ इन्होंने एक अनाथ के लिए नाथ बनकर जितना किया उतना माँ बाबू जी शायद न करते -ईश्वर इन्हें अपने चरणों मे स्थान दिए रखें यही प्रार्थना हैं।आज आश्रम पर संतो का भोजन कार्यक्रम व पाठ कार्यक्रम था उनकी प्रथम पुण्य तिथि थी ।

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