अन्तर्राष्ट्रीय गायन परीक्षा में सी.एम.एस. के संगीत शिक्षक अव्वल

लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के संगीत शिक्षक दम्पत्ति श्री सुचेन्द्र कुमार दुबे एवं नम्रता द्विवेदी ने एसोसिएटेड बोर्ड ऑफ रायल स्कूल ऑफ म्यूजिक (ए.बी.आर.एस.एम.), लंदन के तत्वावधान में आयोजित ग्रेड-3 की अन्तर्राष्ट्रीय गायन परीक्षा में विशेष योग्यता (डिस्टिंशन) अर्जित कर लखनऊ का नाम अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गाँधी ने विद्यालय के दोनों संगीत शिक्षकों की इस उपलब्धि पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। डा. गाँधी ने कहा कि सी.एम.एस. संगीत समेत सभी विषयों में अपने छात्रों को सर्वोत्कृष्ट शिक्षा प्रदान कर रहा है। सी.एम.एस. शिक्षकों की बदौलत ही विद्यालय के छात्र भारतीय शाष्त्रीय संगीत के साथ ही पाश्चात्य संगीत में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि श्री सुचेन्द्र कुमार दुबे सी.एम.एस.स्टेशन रोड कैम्पस के संगीत शिक्षक हैं जबकि उनकी पत्नी श्रीमती नम्रता द्विवेदी सी.एम.एस. कानपुर
रोड कैम्पस में संगीत शिक्षिका हैं।


श्री शर्मा ने बताया कि ए.बी.आर.एस.एम. की गायन प्रतियोगिता में विशेष योग्यता अर्जित करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस अन्तर्राष्ट्रीय गायन परीक्षा के अन्तर्गत आप दोनों संगीत शिक्षकों ने 17वी शताब्दी में हेनरी पर्सल द्वारा संगीतबद्ध गीत से लेकर समकालीन पाश्चात्य संगीत के चार-चार गायन प्रस्तुत किये। जहाँ एक ओर सुचेन्द्र ने 1960 में लियोनल बर्ट के संगीत एलबम ‘ओलिवर’ का गीत ‘हू विल बॉय’ एवं बेट्टी रो के गीत ‘आइ’म लर्निंग टु रीड’ आदि गाकर अपनी गायन प्रतिभा का परचम लहराया तो वहीं दूसरी ओर नम्रता द्विवेदी ने ‘आह! हाउ प्लीजेन्ट दिस टु लव’ एवं ‘द सनफ्लावर, बिलीव मी, इफ ऑल दोज इन्डेयरिंग यंग चार्म्स’ आदि गाकर अपनी गायन प्रतिभा की चमक बिखेरी।


श्री शर्मा ने बताया कि एक अनौपचारिक वार्ता में श्री सुचेन्द्र कुमार दुबे ने कहा कि मेरा प्रयास है कि मेरे छात्र भारतीय व पाश्चात्य दोनों प्रकार के संगीत में महारत हासिल करें। मैं पाश्चात्य शाष्त्रीय संगीत कन्सर्ट हेतु अपने छात्रों के समूह गान हेतु प्रयास कर रहा हूँ। श्री दुबे ने कहा कि
ए.बी.आर.एस.एम. की ग्रेड-3 परीक्षा में विशेष योग्यात अर्जित करने के उपरान्त अब मेरा लक्ष्य ग्रेड-8 की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करना है।
श्री शर्मा ने बताया कि ए.बी.आर.एस.एम. संगीत शिक्षा प्रदान करने वाली विश्व की सबसे बड़ी संस्था है जो प्रति वर्ष दुनिया के 90 से अधिक देशों के साढ़े छः लाख से अधिक संगीत प्रेमियों का मूल्यांकन करती है एवं प्रतिभाशाली संगीतज्ञ को परीक्षा के आधार पर डिप्लोमा प्रदान करती है।ए.बी.आर.एस.एम. की संगीत परीक्षा सभी आयुवर्ग के संगीत प्रेमियों के लिए डिजाइन की गई है और जिसे पूरे विश्व में मान्यता प्राप्त है।

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