सच्चर कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

“मुसलमानों को पिछड़े वर्गों के लिए उपलब्ध लाभ प्राप्त करने के हकदार विशेष वर्ग के रूप में नहीं माना जा सकता” : सच्चर कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका ।

मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के पक्ष में कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करने वाली सच्चर समिति रिपोर्ट की सिफारिश लागू करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

सनातन वैदिक धर्म के छह अनुयायियों द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि सच्चर समिति की रिपोर्ट के कारण उनके साथ साथ समान रूप से हिंदुओं के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर याचिका में तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय से दिनांक 9.3.2005 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है। जस्टिस राजेंद्र सच्चर की अध्यक्षता में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था।

इसके अलावा याचिका में भारत सरकार को 17 नवंबर 2006 को समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर कार्यवाही करने और उसे लागू करने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि यह स्पष्ट है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने अपनी मर्जी से मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति की जांच के लिए समिति नियुक्त करने का निर्देश जारी किया था, क्योंकि 2005 की अधिसूचना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कैबिनेट से चर्चा के बाद इसे जारी किया जा रहा था।

यह कहते हुए कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत, किसी भी धार्मिक समुदाय के साथ अलग से कोई विशेष व्यवहार नहीं किया जा सकता, याचिकाकर्ताओं ने आगे तर्क दिया है कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थितियों की जांच के लिए एक आयोग नियुक्त करने की शक्ति भारत के संविधान का अनुच्छेद 340 के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास है।

एससी और एसटी वर्ग के लोगों के साथ मुस्लिम समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की तुलना करते हुए याचिका में कहा गया है कि “मुस्लिम समुदाय किसी विशेष उपचार का हकदार नहीं है, क्योंकि यह समुदाय लंबे समय तक शासक के रूप में रहा है और यहां तक ​​कि ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने सत्ता का आनंद लिया और साझा किया, जबकि हिंदू समुदाय के एससी / एसटी वर्ग और ओबीसी को दबा दिया गया, प्रताड़ित किया गया, कुचला गया, या तो बल या लालच से कन्वर्ट किया गया और आज़ादी से पहले इन्हें अत्याचार का सामना करना पड़ा।

अधिवक्ता हरि शंकर जैन द्वारा तैयार याचिका में शीर्ष न्यायालय से निम्नलिखित राहत देने की मांग की है। कार्यालय से जारी अधिसूचना संख्या 850/3/सी/3/05-पोल के अनुसरण में दिनांक 17.11.2006 को प्रस्तुत सच्चर समिति की रिपोर्ट पर भरोसा करने/कार्य करने और लागू करने से भारत सरकार को रोकने के लिए एक उपयुक्त रिट, आदेश या निर्देश जारी करना मुस्लिम समुदाय के पक्ष में या किसी अन्य उद्देश्य के लिए किसी भी योजना/योजनाओं को चलाने/शुरू करने के लिए माननीय प्रधान मंत्री, भारत सरकार द्वारा 9.03.2005 को

मुस्लिम समुदाय के पक्ष में या किसी अन्य उद्देश्य के लिए किसी भी योजना/योजनाओं को चलाने/शुरू करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार द्वारा 9.03.2005 को जारी अधिसूचना संख्या 850/3/सी/3/05-पोल के अनुसरण में दिनांक 17.11.2006 को प्रस्तुत सच्चर समिति की रिपोर्ट पर भरोसा करने/कार्य करने और इसे लागू करने से भारत सरकार को रोकने के लिए एक उपयुक्त रिट, आदेश या निर्देश जारी करें।

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