Thursday, March 12, 2026
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विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी बसपा-मायावती

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गठजोड़ की खबरें आनी शुरू हो गई हैं। खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव औवेसी की पार्टी AIMIM और बसपा  मिलकर लड़ेगी। इन कयासों के बीच बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश और उत्तरांखड के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी बीएसपी अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। मायावती का बड़ा ऐलान, बसपा अकेले लड़ेगी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव।

मायावती ने रविवार सुबह ट्वीट कर लिखा कि मीडिया के एक न्यूज चैनल में कल से यह खबर प्रसारित की जा रही है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव औवेसी की पार्टी AIMIM व बीएसपी मिलकर लड़ेगी। यह खबर पूर्णतः गलत, भ्रामक व तथ्यहीन है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है तथा बीएसपी खण्डन करती है।मायावती ने आगे लिखा कि वैसे इस सम्बन्ध में पार्टी द्वारा फिरसे यह स्पष्ट किया जाता है कि पंजाब को छोड़कर, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड प्रदेश में 2022 में विधानसभा का यह आमचुनाव बीएसपी किसी भी पार्टी के साथ कोई भी गठबन्धन करके नहीं लड़ेगी यानि अकेले ही लड़ेगी।

  • उत्तर प्रदेश में मायावती ने अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान।
  • पिछले कई चुनावों से बहुजन समाज पार्टी का वोट बैंक खिसक रहा है।
  • 2017 के चुनाव में 403 में से सिर्फ 19 सीटें ही जीत सकी थी बीएसपी।
  • 2019 में सपा के साथ लड़ने के बावजूद माया का वोट 19 फीसदी रहा।

मायावती ने कहा कि बीएसपी के बारे में इस किस्म की मनगढ़ंत व भ्रमित करने वाली खबरों को खास ध्यान में रखकर ही अब बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सतीश चन्द्र मिश्र को बीएसपी मीडिया सेल का राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर बना दिया गया है। साथ ही, मीडिया से भी यह अपील है कि वे बहुजन समाज पार्टी व पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष आदि के सम्बन्ध में इस किस्म की भ्रमित करने वाली अन्य कोई भी गलत खबर लिखने, दिखाने व छापने से पहले एससी मिश्र से उस सम्बंध में सही जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।

उत्तर प्रदेश में वोट गणित के हिसाब से किस जाति के कितने वोट हैं। जातियों के आंकड़े को देखें तो प्रदेश में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और दलित (अनुसूचित जाति) के वोटों का शेयर सबसे ज्यादा है। दलितों में जाटव (चमार), वाल्मीकि, पासी, धोबी और कोरी जातियां आती हैं। वहीं ओबीसी में यादव, कुर्मी, लोधी, जाट, निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, राजभर, मौर्य, कश्यप, कुम्हार, प्रजापति जैसी जातियां हैं। दलितों की प्रमुख जातियों में 66 उपजातियां हैं। इसमें जाटव यानी चमार समुदाय का वोट सबसे ज्यादा 56% है। वहीं पासी 16%, धोबी, कोरी और वाल्मीकि 15% जबकि गोंड, धानुक और खटीक 5% हैं। ओबीसी जातियों के 41 प्रतिशत वोट शेयर में यादव 13 प्रतिशत और कुर्मी 12 प्रतिशत हैं। इसके साथ ही 3.6 फीसदी जाट वोट बैंक भी है।

गठबंधन की खबरों पर बिफरीं मायावती, कहा- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में अकेली लड़ेगी BSPवहीं मायावती ने विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी है। वह स्वयं प्रत्येक मंडल की समीक्षा कर रही हैं। मुख्य सेक्टर प्रभारियों को माह के अंत तक बूथ स्तर तक संगठन को दुरस्त करने को कहा है, जिससे अगले दो महीनों में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी जाएं। बसपा सुप्रीमो के निर्देश पर संगठन को बूथ स्तर तक गठन करने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है।

क्या वेस्ट उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर और उनकी आजाद समाज पार्टी के उभार से अब मायावती का जाटव वोट बैंक भी खिसक सकता है? इस पर एक वरिष्ठ सियासी विश्लेषक कहते हैं कि चंद्रशेखर अभी इस स्टेज में नहीं आए हैं कि यूपी में अपना कैंडिडेट हर जगह खड़ा कर सकें। उनका अभी स्थानीय दायरा ही है। विधानसभा या लोकसभा में जाटव वोट ये देखेगा कि जीतने वाली स्थिति में कौन कैंडिडेट है। ऐसे में मायावती के अकेले लड़ने से बीजेपी को कोई खास लाभ वाली स्थिति नहीं दिख रही है।