कोविड-19 महामारी में आयी बेकारी-मुकेश सिंह चौहान

लखनऊ, कोविड-19, 4 माह से वैश्विक महामारी के चलते रोजगार में प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के कारण लाखों मध्यम आय वर्ग के अभिभावकों को अपने बच्चों की फीस जमा कराने, समस्त न्यायालयों में कार्य बंद होने के कारण अधिवक्ता बंधुओं की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव एवं मध्यम आय वर्ग को हो रही दिक्कतों को लेकर आज जिलाधिकारी कार्यालय लखनऊ पर जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में धरना- प्रदर्शन कर महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा गया। 


धरना-प्रदर्शन में शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान , जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वेद प्रकाश त्रिपाठी, पूर्व विधायक श्याम किशोर शुक्ला, पार्षद मो0 हलीम, डॉ0 शहजाद आलम, इस्लाम अली, आर0बी0 सिंह, राजेंद्र शुक्ला, प्रदीप सिंह, जगदीश बाल्मीकि, सुशील तिवारी सोनू पंडित, शाहिद अली, के0के0 आनंद, के0के0 शुक्ला, अशोक उपाध्याय, श्री संजय कश्यप, आर0बी0 हल्दिया, ज्ञान प्रकाश राय, हरिओम अवस्थी, संतोष यादव, अकबर खान, श्री दिनेश दीक्षित, प्रभात गुप्ता, उमाशंकर यादव सहित सैंकड़ों की संख्या में जिला एवं शहर कांग्रेस के कांग्रेसजन मौजूद रहे।


शहर कांग्रेस के अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान ने बताया कि ज्ञापन में मांग की गयी है कि -प्रदेश में संचालित यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई बोर्ड एवं अन्य बोर्डों के छात्रों की विगत 4 माह की फीस माफ की जाये। इन शिक्षण संस्थानों में कार्यरत मान्यता/गैर मान्यता प्राप्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सरकार से कम से कम 8 हजार रूपये प्रतिमाह सहायता प्रदान की जाये। नए साल की पाठ्य पुस्तकों में बदलाव न किया जाये। बच्चों की ड्रेस बार-बार न बदली जाये, उ0प्र0 जैसे बड़े राज्य में स्थित विभिन्न न्यायालयों में लाखों की संख्या में प्रेक्टिस कर रहे वकीलों की आमदनी इस कोविड-19 महामारी में लाकडाउन के चलते नगण्य हो गयी। ऐसे में उन्हें सरकार द्वारा कम से 10 हजार रूपये महीने के हिसाब से सहयोग राशि मानदेय के रूप में प्रदान की जाये तथा मध्यम वर्ग के वह परिवार जिन्हें न तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिला है न ही सरकार की अन्य पेंशन आदि योजनाओं का लाभ मिला है और उनकी वार्षिक आमदनी दो लाख रूपये से कम है ऐसे लोग जिन्होने मकान, वाहन या अन्य बुनियादी जरूरतों के लिए लोन ले रखा है उनकी 4 मीने की ईएमआई या मनरेगा मजदूरों के मानदेय के बराबर 20 हजार रूपये तक की रकम माफ करके उनको इस कोविड-19 महामारी में आयी बेकारी से सरकार द्वारा राहत दिलाई जाये। 

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