अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने जनसमर्थन खो दिया है। जनता भाजपा के साथ नहीं खड़ा होना चाहती है। भाजपा और उसके अनरजिस्टर्ड, दरारवादी, नकारात्मक लोग जानते हैं कि अब वे सीधा मुकाबला नहीं कर सकते हैं इसीलिए चुनाव आयोग के माध्यम से साजिश कर रहे हैं। कुछ दिन पहले मतदाता सूची का एसआईआर हो चुका है लेकिन अब फिर से एसएसआर कराया जा रहा है। इस एसएसआर का उल्टा आरएसएस है, भाजपा अपने निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर नए-नए षड्यंत्र और साजिश करती है।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के सभी नेता, कार्यकर्ता और पीडीए प्रहरी मिलकर इन साजिशों और षडयंत्रों को विफल करेंगे। षडयंत्रकारियों को हर स्तर पर रोकने का काम करेंगे। समाजवादी पार्टी के सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं, आम जनता से अपील की कि 17 अक्टूबर और 24 अक्टूबर को अपने-अपने बूथों पर रहें। अपना वोट जुड़वाएं। फर्जी वोट बनने से रोके। मतदाता सूची पर निगरानी रखें।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से कहा कि एक वोटर लिस्ट का एक ही रिवीजन करें, रिवीजन के ऊपर रिवीजन न करें। यह तय होना चाहिए कि एसएसआर के बाद अब मतदाता सूची का कोई रिवीजन नहीं हो। जब एसएसआर का फैसला ले लिया है तो अब वही आखिरी होना चाहिए। समाजवादी पार्टी डबल रिवीजन के पक्ष में नहीं है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी वोट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची में डबल और ट्रिपल वोट का मामला उठाया। आजमगढ़ के एक नौजवान का दस वोट बन गया है। इसी तरह से मतदाता सूची में कई लोगों के दो-दो, तीन-तीन और चार-चार वोट बने हैं। श्री अखिलेश ने प्रेस कांफ्रेंस में आजमगढ़ के विकास यादव का परिचय कराते हुए कहा कि सीधे-साधे नौजवान का दस वोट बना दिया। इसने सिर्फ एक वोट बनवाया लेकिन इसका कई जगह वोट बना दिया गया। एक वोट इसका पड़ेगा और 9 वोट भाजपा डालेगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का भंडाफोड़ हो गया है, उन्हें पता नहीं था कि जनता इतना बड़ा भंडाफोड़ कर देगी। जब चुनाव आयोग की चोरी सबूतों के साथ पकड़ी गयी तो अब कहा जा रहा है कि छोटी-मोटी गलती है। दरअसल यह छोटी-मोटी नहीं, बहुत मोटी और खोटी साजिश है। श्री यादव ने कहा कि एसआईआर और एसएसआर का कोई विरोध नहीं है। विरोध भाजपा की साजिश, षडयंत्र और चालबाजी है। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा से उसका आधार वोट दूर जा रहा है, इसीलिए वह साजिश कर रही हैं। प्रमुश्री राम के मंदिर में चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी के बाद बड़े पैमाने पर सनातनी और श्रद्धालु दुखी हैं। सच्चा सनातनी चढ़ावा और रामधन की चोरी कभी नहीं कर सकता है। अब भाजपा को वोट देकर कोई सनातनी उस पाप में शामिल नहीं होना चाहता।
महिला, मध्यम वर्ग, किसान, छात्र-नौजवान, जेनजी और जेन अल्फा सब भाजपा से दुखी है। लखनऊ में आग लगने की घटना में मुख्यमंत्री ने एक दुखी मां का अपमान किया था। भाजपा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को माला पहनाकर स्वागत करती है। मध्यम वर्ग भाजपा की महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान है। भाजपा ने मध्यम वर्ग का सबसे ज्यादा शोषण और अपमान किया। परीक्षाओं में धांधली हुई। भाजपा ने धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर जेन जी का अपमान किया। मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी के बाद लाभार्थी वर्ग भी दुखी हैं, वह अब भाजपा से पीछा छुड़ाना चाहता है।

अखिलेश यादव ने कहा कि वन नेशन वन-इलेक्शन, भाजपा का वन करप्सन, वन इलेक्शन है। भाजपा चाहती कि एक बार बेईमानी, भ्रष्टाचार और वोटों की लूट कर चुनाव हो जाए जिससे बार-बार घपला न करना पड़े। इनके वन नेशन-वन इलेक्शन के षडयंत्र को जनता समझ गयी है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त है। प्रदेश में लगातार हत्याएं हो रही हैं। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। पश्चिमी यूपी के शामली से लेकर राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के हर जिलें में हत्या और लूट की घटनाएं हो रही है। पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा हैं। अपराधियों को सत्ता का संरक्षण है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पाप का घड़ा तो पहले ही भर गया है, इनके पाप की टंकी भी भर गयी है।जनता भाजपा को हटाने जा रही है। समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है। समाजवादी पार्टी सरकार बनाकर सामाजिक न्याय के राज की स्थापना करेगी। पीडीए समाज को न्याय दिलाएगी। सबको सम्मान दिया जाएगा।
एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि हम लोग वोट चोरी और चुनावी घपलेबाजी के खिलाफ चुनाव आयोग से लड़ रहे हैंं, भाजपा क्यों उसके साथ खड़ी है। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में कुंदरकी, मीरापुर, उपचुनाव लूटने के बाद फैसला कर लिया था कि सीसीटीवी फुटेज नहीं दी जाएगी। चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए एफिडेविट पर कोई कार्रवाई नहीं। क्योंकि भाजपा की आयोग से सांठगांठ हैं। उन्होंने कहा कि टीएससी जैसी कम्पनी भी मतदाता सूची के घपले में भाजपा के साथ शामिल है। अब इनकी भी विश्वसनीयता खत्म हो गयी है। अगर टाटा जैसी कम्पनी की क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाएगी तो उसे कौन पूछेगा?



