कलश सजाकर द्वार पर, दीप जलाएँ आज। माँ दुर्गा के नाम से, महके आँगन साज।।
नौ दिन माँ के नाम हैं, नौ रूपों का ध्यान। शक्ति, भक्ति और प्रेम से, मिलता नया विधान।।
धूप, दीप और पुष्प से, कर माता का ध्यान। मन-मंदिर में ज्योति हो, दूर रहते अज्ञान।।
शैलपुत्री के ध्यान से, शुभ आरंभ महान। माँ के चरणों में मिले, श्रद्धा और सम्मान।।
ब्रह्मचारिणी दे हमें, संयम का वरदान। कर्म-पथों पर हम चलें, रखकर सच्चा ज्ञान।।
चंद्रघंटा की कृपा से, निर्भय हो संसार। संकट से रक्षा करें, जग की पालनहार।।
कूष्मांडा की शक्ति से, जग में फैले नूर। जीवन के सब कष्ट हों, माँ कृपया से दूर।।
स्कंदमात का यूँ सदा, मिलता रहे दुलार। संतानों के भाग्य में, खुशियाँ हों अपार।।
कात्यायनीति नाम से, जागे शक्ति अपार। अन्यायों के अंत का, हो जग में संचार।।
कालरात्रि के रूप में, माँ का तेज महान। दुष्ट विचारों से सदा, बच जाए इंसान।।
महागौरी की कृपा से, निर्मल हो व्यवहार। मन में करुणा प्रेम हो, मिट जाए अंधकार।।
सिद्धिदात्री माँ करें, सबके पूरे काज। सद्बुद्धि और सद्भाव से, जीवन निर्मल आज।।
ढोल, नगाड़े बज रहे, गूँजे जय-जयकार। माँ के चरणों में झुका, भक्तों का संसार।।
कन्या पूजन के समय, दें सम्मान अपार। नारी माँ का रूप है, समझ सकल संसार।।
व्रत रख माँगें नहीं, केवल धन और धाम। सेवा, सुमति, शांति हों, जीवन के सब काम।।
गरबा खेले भक्तजन, डांडिया की झंकार। भक्ति-रंग में रंग गया, सारा घर-संसार।।
असत्य पर सत्य की, विजय सदा हो आज। माँ दुर्गा के नाम से, मिटे बुराई राज।।


