पूर्व विधायक स्वर्गीय रामदेव आचार्य की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भारी जनसैलाब उमड़ा। इस अवसर पर उनकी मूर्ति का अनावरण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि जनहित में रामदेव आचार्य द्वारा किए गए कार्य आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं। उन्होंने राम मंदिर की भव्यता में भी उनके योगदान को याद किया।
अंकुर श्रीवास्तव
अयोध्या/रुदौली। पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता स्वर्गीय आचार्य रामदेव आचार्य की प्रथम पुण्यतिथि पर मंगलवार को श्रद्धांजलि समारोह एवं मूर्ति अनावरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने स्वर्गीय आचार्य रामदेव आचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया। मूर्ति अनावरण के दौरान पूरा परिसर जयघोष और श्रद्धांजलि नारों से गूंज उठा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, पूर्व सांसद लल्लू सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री सतीश शर्मा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के प्रदेश अध्यक्ष वैजनाथ रावत, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मां कामाख्या नगर पंचायत अध्यक्ष सीता प्रसाद शुक्ला, मिल्कीपुर विधायक चंद्रभान पासवान सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्ण कुमार खुन्नू, दिलीप मिश्रा, रवि तिवारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए रुदौली विधायक रामचंद्र यादव ने कहा कि स्वर्गीय रामदेव आचार्य उनके राजनीतिक गुरु थे। वह बेहद विनम्र, सहज और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना और हमेशा कार्यकर्ताओं तथा आम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान कराने का प्रयास किया।
राज्य मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय रामदेव आचार्य ने जमीन से जुड़कर जनता और संगठन के लिए काम किया। विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाया और विकास कार्यों को गति दी। उन्होंने कहा कि आज भी क्षेत्र की जनता स्वर्गीय आचार्य का सम्मान करती है और उनके द्वारा कराए गए कार्यों की चर्चा करती है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पूर्व विधायक स्वर्गीय रामदेव आचार्य ने जनहित में बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और कॉलेज सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य कराए। वह कार्यकर्ताओं की बात ध्यान से सुनते थे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करते थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की आज दिखाई देने वाली भव्यता के पीछे जिन लोगों ने लंबे समय तक संघर्ष और प्रयास किया, उनमें रामदेव आचार्य का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समारोह में मौजूद पुराने कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के बुजुर्गों ने स्वर्गीय आचार्य रामदेव आचार्य से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि आचार्य अक्सर कहा करते थे—“दिल और दल नहीं बदले जाते।” उनके इस कथन को पुराने कार्यकर्ताओं ने उनके राजनीतिक सिद्धांत और विचारधारा के प्रति निष्ठा का प्रतीक बताया।
मूर्ति अनावरण के बाद उपस्थित जनसमूह ने पुष्प अर्पित कर स्वर्गीय आचार्य को श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि किसी नेता की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के बीच छोड़े गए उसके कार्य और विश्वास से होती है। इस दृष्टि से रामदेव आचार्य की स्मृतियां आज भी क्षेत्रवासियों के बीच जीवित हैं। समारोह में उनके आदर्शों और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया।



