बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान। बूँद-बूँद में खिल उठा, बचपन का सम्मान॥
खिड़की पर बरसात ने, लिख दी नई किताब। जल की निर्मल लिपि लिखे, जाग उठे सब ख़्वाब॥
हवा पढ़े हर पंक्ति को, लेकर मधुर जुबान। ज्यों स्मृतियों की भीगती, महकी हर पहचान॥
बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान। भीगी माटी बोलती, मन सुनता हर बात॥
सोंधी-सोंधी गंध में, छिपी हुई सौगात। कागज़ की वह नाव फिर, ढूँढ़े अपना स्थान॥
भीगे आँगन लौटकर, मुस्काए मुस्कान। बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान॥
पगडंडी के मोड़ पर, बचपन बैठा मौन। छींटों ने पहचान की, मन में बैठा कौन॥
पीपल की वह छाँव भी, गाए मधुरस तान। भीगी यादों से सजा, जीवन का वरदान॥
बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान। बूँदों में इतिहास है, बूँदों में विश्वास॥
बीते कल की धड़कनों, मिलता फिर एहसास। प्रेम जहाँ निर्मल बहे, वहीं बसे भगवान॥
बरखा देती आज भी, जीवन को पहचान। बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ



