- -कांवड़ पथ पर लहराया आस्था और राष्ट्रभक्ति का संगम।
- -जेन-जी की कांवड़ों पर भगवा के साथ शान से फहरा रहा तिरंगा।
- -‘बोल बम’ के जयघोष संग गूंज रहे देशभक्ति के गीत।
मेरठ। सावन के शिवमय मौसम में इस बार कांवड़ यात्रा आस्था के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी जीवंत उत्सव बन गई है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों शिवभक्तों, खासकर जेन-जी के युवाओं की कांवड़ों पर भगवा ध्वज के साथ तिरंगा भी पूरी शान से लहराता नजर आ रहा है। कांवड़ मार्ग पर हर कुछ कदम की दूरी पर ऐसी कांवड़ दिखाई दे रही है, जिस पर सनातन की आस्था और राष्ट्र गौरव का प्रतीक तिरंगा साथ-साथ संदेश दे रहे हैं।
युवाओं के इस नए अंदाज ने कांवड़ यात्रा को अलग पहचान दी है। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के उद्घोष के बीच देशभक्ति के गीतों की गूंज माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना रही है। बड़ी कांवड़ों से लेकर पैदल यात्रा करने वाले शिवभक्तों तक, तिरंगे का सम्मान और सनातन के प्रति समर्पण एक साथ दिखाई दे रहा है।
दिल्ली के रणवीर सिंह अपनी कांवड़ के एक ओर तिरंगा और दूसरी ओर सनातन ध्वज लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि सनातन संस्कृति और राष्ट्र, दोनों उनकी आस्था के केंद्र हैं। गुरुग्राम के विवेक बताते हैं कि उन्होंने अपने वाहन पर दोनों ध्वज इसलिए लगाए हैं क्योंकि धर्म व्यक्ति को संस्कार देता है और तिरंगा देश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है। वहीं सिकंदराबाद के महादेव ग्रुप के 25 युवाओं का दल भी बड़ी कांवड़ के साथ दोनों ध्वज लेकर चल रहा है। दल के सदस्य सोनू कहते हैं कि भगवा उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ता है, जबकि तिरंगा राष्ट्र के लिए समर्पण की प्रेरणा देता है। कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्त जितेंद्र ने कहा कि भगवा हमारी संस्कृति की पहचान है और तिरंगा हमारे राष्ट्र का गौरव। दोनों का सम्मान करना हर भारतीय का कर्तव्य है।
हर बाजार में तिरंगे की बढ़ी मांग
कांवड़ यात्रा के असर से शहर के बाजारों में तिरंगे की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। सदर बाजार, हापुड़ अड्डा, घंटाघर, शास्त्री नगर और मोदीपुरम में भगवा ध्वज के साथ विभिन्न आकार के राष्ट्रीय ध्वज की दुकानें ग्राहकों से गुलजार हैं। सबसे अधिक मांग युवाओं के बीच देखने को मिल रही है।
पूजा सामग्री के थोक व्यापारी राकेश बताते हैं कि पहले पूजा सामग्री के साथ राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री बहुत कम होती थी, लेकिन इस बार युवाओं की पसंद बदलने से तिरंगे की मांग कई गुना बढ़ गई है। उनका अनुमान है कि मेरठ में ही तिरंगे की बिक्री का कारोबार 20 लाख रुपये से अधिक पहुंच सकता है।



