बचपन की मुस्कान में…

मिलकर बैठे बाल सब, खोले ज्ञान-किताब।

चित्रों से सीखें नए, सुंदर रहे जवाब॥

पढ़ना-लिखना खेल सा, मन में भरे उजास।

ज्ञान-सुमन खिलने लगे, मिटे अज्ञान-निवास॥

छोटे-छोटे हाथ हैं, बड़े-बड़े अरमान।

मेहनत से आगे बढ़ें, पाएँ सच्चा मान॥

मित्र बने जब साथ में, बढ़ता खूब लगाव।

हँसी-खुशी के संग सदा, सीखें अच्छे भाव॥

चित्र-पुस्तिका देख कर, जागे नई उड़ान

जिज्ञासा के पंख से, छू लें वे आसमान॥

बचपन की मुस्कान में, छिपा सुनहरा काल।

पढ़-लिखकर जग में करें, अपना नाम कमाल॥

….. डॉ. प्रियंका सौरभ

Related Articles

Back to top button