देश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि “मन की बात करने वालों का मन साफ नहीं है।” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। डिंपल यादव ने इशारों-इशारों में सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाए, जिससे सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। अब देखना यह होगा कि इस बयान पर सत्ता पक्ष की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और यह मुद्दा आगे कितना तूल पकड़ता है।
डिम्पल यादव का कहना है कि भाजपा का एक ही काम है भ्रम फैलाना। वास्तविकता है कि सन् 2023 में महिला वंदन अधिनियम सन् 2023 में ही पास हो गया था। उसका सभी दलों ने समर्थन किया और साथ दिया था। लेकिन जो नया महिला आरक्षण बिल संशोधित लाया गया है उसके पीछे मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं थी। संविधान में प्रक्रिया है कि पहले जनगणना हो जब जनगणना के आंकड़े नहीं हो तो किस आधार पर सीटे बढ़ाएंगे। हम चाहते है कि पहले गिनती हो ताकि सही ढंग से परिसीमन किया जा सके। सरकार को तो बस एक भूमिका बनाना है। श्रीमती यादव का कहना है कि 5 राज्यों में चुनाव होने जा रहे है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष चुनाव होने है। उनकी नीयत ठीक नहीं। चुनाव के बीच में क्यों जल्दबाजी की। जब परिसीमन के बाद होती है तो फिर पहले ही निष्कर्ष कैसे और क्यों निकाल रहे हैं।
डिम्पल यादव ने कहा कि भाजपा चाहे जो कर ले, इलेक्शन टाइम में पैसे बांट ले, जुमलेबाजी कर ले कोई साजिश काम आने वाली नही है। लोग समझ गए है कि भाजपा नकली और भटकाने वाले काम करती है। हम चाहते है पंक्ति में आखिरी खड़ी महिला को भी उसके अधिकार मिले। कुछ तक सीमित न रह जाए। अल्पसंख्यकों को भी हम मिले। भाजपा को उनसे चिढ़ है। भाजपा का मन साफ नहीं है। वे ओबीसी को भी आरक्षण नहीं देना चाहते हैं। वे अब चुनाव में उनके बीच जाकर कैसे वोट मांगेंगे।

अखिलेश यादव ने कहा है कि जनता के बढ़ते विरोध और आक्रोश से ध्यान हटाने के लिए साज़िशन लाए गए ‘तथाकथित महिला आरक्षण बिल’ की हार भाजपा की हार है। ये भाजपा की बदनीयत की भी हार है। भाजपा का हर प्रयास, हर बिल या तो कुछ लोगों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए होता है या समाज को बाँटने का छल-छलावा होता है। इस बार भाजपा इस बिल के माध्यम से महिलाओं की एकता में दरार डालकर उनको ठगना चाहती थी लेकिन विपक्ष की एकता ने भाजपाई मंसूबों को धूल चटा दी। ये भाजपा के खि़लाफ़ देश की सक्रिय हो चुकी जन चेतना की जीत है, जिसका प्रतिनिधित्व देश का विपक्ष कर रहा है। भाजपा ने सरकार में बने रहने का नैतिक आधार खो दिया है।
भाजपा महिलाओं की हिमायती कहां से हो सकती है जबकि उसकी सोच घोर पुरातन पंथी है। जो लोग परिवार को नकारते हैं, वे लोग दूसरी तरह से परिवार की धुरी मतलब महिला को नकारते है। भारतीय जनता पार्टी उस बिल में और चीजों को छुपाकर ला रही थी, उसका विरोध था संसद चल रहा है, संसद पूरा हो जाए, उसके बाद इस बात को आगे बढ़ाते तो शायद सब पक्ष में होते। आज इंडिया की एकजुटता ने साबित कर दिया है कि ‘नैतिक रूप’ से भाजपा ने सरकार में बने रहने का आधार खो दिया है। संसद में जो सरकार हार जाती है, वो बाहर जाती है। जनता को विश्वास हो गया है कि ‘बुरे दिन जाने वाले हैं।



