
मिर्जापुर। अपना दल कमेरावादी की शीर्ष नेता व सिराथू विधायक डॉ पल्लवी पटेल कानून व्यवस्था के सवाल पर सड़क पर उतरी। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार शनिवार को मध्यान्ह लगभग 12:00 बजे कार्यकर्ताओं के साथ जिला मुख्यालय कचहरी पर पहुंची डॉ पल्लवी पटेल ने धरना प्रदर्शन किया। जिसके माध्यम से जिलाध्यक्ष श्याम बहादुर पटेल पर दर्ज किए गए फर्जी मुकदमों की उच्चस्तरीय जांच करवाकर वापसी की मांग की गई।
इस दौरान अपना दल कमेरावादी की शीर्ष नेता व सिराथू विधायक डॉ पल्लवी पटेल ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार में पुलिस जुल्म की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। खासकर मिर्जापुर की पुलिस प्रशासन मंत्री के हाथ की कठपुतली बन गई है। इन घटनाक्रमों से आम लोगों में काफी आक्रोश है और जनता सही समय पर इसका जवाब देगी।उन्होंने कहा कि मिर्जापुर जनपद में पुलिस प्रशासन और सत्तासंरक्षित नेताओं की मिली भगत एवं संरक्षण में बड़े पैमाने पर अपराध फल फूल रहा है, जिसमें मादक द्रव्यों की तस्करी और गौ तस्करी प्रशासनिक अमले को मिलाकर हो रहा है। इसी बीच कुछ गौ तस्कर पकड़े गए, जो पूर्व में भी इसी तरह के अपराध में कई बार जेल जा चुके हैं। उन लोगों ने पुलिस एवं सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से गौ तस्करी की बात कबूला। तब पुलिस ने विभागीय एवं सत्तासंरक्षित नेताओं को बचाने के लिए अपना दल कमेरावादी के जिलाध्यक्ष व ग्रामप्रधान को फंसाया।
चुकी श्याम बहादुर पटेल के ग्रामसभा में भी एक सरकारी गौशाला है, जहां बाकायदा खंड विकास अधिकारी, ADO पंचायत, गांव के सेक्रेटरी की देख रेख में गौशाला केयरटेकर की नियुक्ति होती है। अन्य गौशालाओं के अलावा यहां से भी शिकायत प्राप्त हुई। जिसकी जांच जिले के अधिकारियों के देखरेख में होनी चाहिए थी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उपयोग किया गया। गांव के ग्रामप्रधान जो एक जनप्रतिनिधि होता है, उन्हें बिना किसी जांच के राजनीतिक षड्यंत्र के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (fir) में नाम न होने के बावजूद, पकड़े गए लोगों द्वारा प्रारंभिक पूछताछ में उनका नाम ना आने के बावजूद मुकदमा लिखे जाने के चार दिन बाद विवेचना में सत्ताधारी नेताओं के दबाव में पूरे मामले की जांच को प्रभावित करके बड़े संगठित अपराध का विषयांतर करने के लिए श्याम बहादुर पटेल का नाम विवेचना में पर्चा काट कर बढ़ा दिया गया।
उन्होंने कहा हद तो तब हो गई जब एक मुकदमे में जमानत हो जाने के बाद कहीं अन्यत्र का दूसरा मुकदमा जबरन लाद दिया गया। प्रथम मुकदमे में श्याम बहादुर पटेल सक्षम न्यायालय में जाकर जमानत करा लेते हैं, न्यायालय भी विषय की संदिग्धता को देखते हुए तत्काल राहत और जमानत देता है। जब जमानतदार के प्रपत्रों के सत्यापन के लिए पुलिस के पास कागजात जाते हैं तो नेताओं के दबाव में इसी तरह के एक अन्य थाने के अन्य मुकदमे में श्री श्याम बहादुर पटेल का नाम बढ़ा देती है। जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पूरी तरह से साजिश के तहत उनकी और संगठन की राजनीतिक छवि को धूमिल करने के लिए इस तरह का कृत्य किया जा रहा है। जिसे किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।























