भाजपा सरकार के शासनकाल में जिस तरह शंकराचार्य जी और साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ सामने आई हैं, उसने न केवल धार्मिक समाज को आहत किया है, बल्कि सत्ता और आस्था के टकराव को भी उजागर कर दिया है। जिन संत-महात्माओं को सदियों से सनातन परंपरा का मार्गदर्शक माना जाता रहा है, उन्हीं के सम्मान और अधिकारों पर सवाल खड़े होना यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या शासन व्यवस्था अब धार्मिक मर्यादाओं से ऊपर स्वयं को मानने लगी है।
अखिलेश यादव ने कहा है कि शंकराचार्य जी और सभी साधु-संत हम सब की शोभा हैं। तमाम अनुयायी उनसे मिलने और आशीर्वाद लेने आते हैं, यही सनातन धर्म की परम्परा है। भाजपा सनातन परम्परा को तोड़ रही है। साधु-संतों और शंकराचार्य जी को जानबूझकर अपमानित कर रही है। भाजपा सरकार ने शंकराचार्य जी और साधु-संतो के साथ दुर्व्यवहार किया है। भाजपा को अधिकारियों के माध्यम से ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। भाजपा सरकार देश का संविधान, कानून, भाईचारा, परम्परा तोड़ रही है। इस सरकार में किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हो रहा है। भाजपा सरकार ने शंकराचार्य जी और साधु-संतो के साथ किया दुर्व्यवहार
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर कोई अधिकारी शंकराचार्य जी से उनका परिचय और प्रमाण पत्र मांग रहा है तो सनातन धर्म का इससे बड़ा अपमान कोई और नहीं हो सकता है। भाजपा सरकार ने सनातन धर्म, शंकराचार्य, साधु-संतों माघ मेला और देश का अपमान किया है। हम लोग साधु-संतों शंकराचार्य जी से आशीर्वाद लेकर जनता की सेवा करेंगे। जो साधु-संत सच्चाई और सत्य के मार्ग पर चलते हैं वही असली संत होते है। कुछ लोग सरकार के हिसाब से चलते है, वह सच्चे संत नहीं है। भाजपा सरकार मनमानी पर उतारू है। लोगों की आवाज और सच्चाई को दबाना चाहती है। जो लोग भाजपा के हिसाब से काम नहीं करते है उनको तमाम तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है। नोटिस भेजी जाती हैं। सीबीआई और ईडी से परेशान किया जाता है।
अंततः सवाल सिर्फ शंकराचार्य जी या साधु-संतों के सम्मान का नहीं, बल्कि उस संवैधानिक मर्यादा का है जहाँ सत्ता को आस्था के प्रति संवेदनशील और विनम्र होना चाहिए। यदि सरकारें धर्म और परंपरा के संरक्षकों को ही अपमानित करेंगी, तो यह टकराव समाज में अविश्वास और असंतोष को जन्म देगा। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब शासन बल नहीं, बल्कि संवाद और सम्मान के मार्ग पर चले। भाजपा सरकार ने शंकराचार्य जी और साधु-संतो के साथ किया दुर्व्यवहार



