सुनियोजित दंगे खतरे की घंटी: विचार मंच

 – श्याम कुमार

   लखनऊ, आज बुद्धिजीवियों की पुरानी एवं महत्वपूर्ण संस्था ‘विचारमंच’ द्वारा कोरोना की बंदिशों के कारण दूरभाष पर अपनी नियमित संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ‘बंगलुरु का दंगा’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली व बंगलुरु के दंगे इस बात की खतरे की घंटी हैं कि देशद्रोही तत्वों ने फर्जी सेकुलरवाद की आड़ में देशभर में अपनी जड़ें बहुत मजबूत कर ली हैं तथा उन तत्वों का यदि कड़ाई से उन्मूलन नहीं किया गया तो भविष्य में हमारे देश को गृहयुद्ध की आग में झोंक दिए जाने की आशंका है। न्यायपालिका एवं मानवाधिकार आयोग को भी देशहित में इस खतरे को समझना चाहिए।

     मुख्य वक्ता के रूप में जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार राजेश राय ने कहाकि आजादी के बाद दीर्घकालीन कांग्रेसी शासनकाल में मजहबपरस्ती के नाम पर हमारे यहां देशद्रोही तत्वों को खूब संरक्षण एवं प्रोत्साहन दिया गया तथा मुसलिम हमलावरों ने जिस प्रकार हिंदुओं का दमन किया था, वही दमनचक्र कांग्रेस द्वारा भी किया गया। नेहरू तो घोर हिंदूविरोधी थे ही, कांग्रेस के अन्य प्रधानमंत्रियों ने भी इस नीति का अनुसरण किया कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।

जिन्नावादी मुसलिम कट्टरता ने देश का विभाजन करा दिया था तथा यदि काबू न किया गया तो ये कट्टरपंथी देश का एक और बंटवारा करा डालेंगे। दिल्ली व बंगलुरु के दंगे  साम्प्रदायिक शक्तियों के सुनियोजित षड्यंत्रों का परिणाम हैं।

      संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार श्याम कुमार ने कहाकि आज देश में जितनी भी समस्याएं हैं, सब जवाहरलाल नेहरू द्वारा पैदा की गईं। जब इस सिद्धांत को स्वीकार कर मजहब के नाम पर देश का विभाजन कर दिया गया कि हिंदू व मुसलिम दो अलग कौमें हैं, जो एक साथ नहीं रह सकतीं तो नेहरू ने बड़ी संख्या में मुसलिम आबादी को पाकिस्तान जाने से रोककर भारत का भविष्य अंधकारमय कर डाला।

     वरिष्ठ मजदूर नेता एवं राजनीतिक विश्लेषक सर्वेश चंद्र द्विवेदी ने कहाकि हिंदुओं को उदारता का जो रोग है, उसी के परिणामस्वरूप देशद्रोही तत्वों की ताकत बढ़ती जा रही है। फेसबुक पर किसी एक टिप्पणी से नाराज होकर बंगलुरु में हिंसक दंगा किया गया तथा करोड़ों की सम्पत्ति नष्ट कर दी गई। लेकिन जब हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया जाता है तो उदारता के रोग से ग्रस्त हिंदू कुछ नहीं बोलता। ओवैसी ने कौशल्या को बदचलन व राम को नाजायज औलाद कहा, लेकिन कोई विरोध नहीं हुआ। हिंदू स्वयं अपने देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया करता है। हाल में एक नए व्यंग्यकार ने, जो अवकाशप्राप्त आईएएस अधिकारी हैं, अपनी रचना में भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी का आपत्तिजनक उल्लेख किया था, किन्तु किसी हिंदू ने विरोध नहीं किया। बल्कि फेसबुक में
उनकी रचना की तारीफों के पुल बांध दिए गए। समाजसेवी शैलेंद्र पटेल(कन्नौज) ने कहाकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह पूरे देश में देशद्रोही तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

दंगाइयों से पूरा हर्जाना वसूल किया जाय। कट्टरपंथी मुसलमान सिर्फ अपने मजहब के सगे हैं, अन्य किसी के नहीं। समाजसेवी रवितेश प्रताप सिंह सोमवंशी ने कहाकि सरकार देशद्रोही तत्वों का अविलम्ब सफाया करे, अन्यथा वे पूरे देश में दंगों की पुनरावृत्ति करेंगे। सरकार को ‘शाहीनबाग’ के
समय ही देशद्रोहियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी। प्रसिद्ध व्यंग्यकार जमुना प्रसाद उपाध्याय ने कहाकि बनातवाला, उवैसी, मौलाना बुखारी, जफरयाब जिलानी, शहाबुद्दीन-जैसी साम्प्रदायिक शक्तियों का असली विरोध भारतीय संस्कृति व हिंदू से है और इसीलिए वे देश के वातावरण को बार-बार अशांत करने का षड्यंत्र करते रहते हैं। आश्चर्य है कि कांग्रेस ने बंगलुरु दंगे की निंदा नहीं की। अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए।

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