क्या हरीश चौधरी को दोबारा से मंत्री बनाया जाएगा…?

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उत्तर प्रदेश का रिजल्ट आने से पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जुबेर खान और धीरज गुर्जर को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया था।क्या हरीश चौधरी को दोबारा से मंत्री बनाया जाएगा…?

एस0 पी0 मित्तल

इसे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राजनीतिक दूरदर्शिता ही कहा जाएगा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम आने से पहले ही पूर्व विधायक जुबेर खान को मेवात विकास बोर्ड और धीरज गुर्जर को राजस्थान बीज निगम का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। जुबेर और धीरज यूपी चुनाव में कांग्रेस के सहप्रभारी रहे। दोनों ने राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के साथ मिलकर कांग्रेस का जिताने की भरपूर कोशिश की, लेकिन जनता ने साथ नहीं दिया। इसलिए 403 में से कांग्रेस को मात्र 2 ही सीट मिली। राजस्थान की राजनीति से जुड़े इन दोनों नेताओं को सीएम गहलोत ने खास तौर से उत्तर प्रदेश भेजा था। लेकिन शायद सीएम गहलोत को यूपी चुनाव का अंदाजा था, इसलिए उन्होंने रिजल्ट आने से पहले ही जुबेर खान और धीरज गुर्जर को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। जिस तरह जुबैर और धीरज को उपकृत किया है,उसे देखते हुए ही यह सवाल उठा है कि क्या हरीश चौधरी को भी दोबारा से कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा?

जिस प्रकार जुबेर और धीरज को यूपी भेजा गया उसी प्रकार हरीश चौधरी को भी पंजाब में प्रभारी बनाकर भेजा गया था। चौधरी को जब पंजाब का प्रभारी बनाया तब वे राजस्थान में राजस्व मंत्री थे। लेकिन पंजाब का प्रभारी बनाने के साथ ही हरीश चौधरी से इस्तीफा ले लिया गया। कांग्रेस का जो हश्र यूपी में हुआ वही हश्र पंजाब में भी हुआ। पंजाब में कांग्रेस के हाथ से सत्ता ही निकल गई। लेकिन इसमें अकेले हरीश चौधरी का दोष नहीं है। पंजाब चुनाव की पूरी कमान राहुल गांधी के हाथों में थी। यह सही है कि हरीश चौधरी, राहुल गांधी के प्रमुख सलाहकारों में से एक थे। हो सकता है कि हार की समीक्षा के दौरान हरीश चौधरी को भी जिम्मेदार माना जाए। लेकिन जब जुबेर खान और धीरज गुर्जर को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जा सकता है तो फिर हरीश चौधरी को मंत्री का पद क्यों नहीं लौटाया जा सकता है? पंजाब के कांग्रेस नेताओं ने भले ही हरीश चौधरी के आचरण को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हो, लेकिन राजस्थान के बाड़मेर में हरीश चौधरी का खास प्रभाव है। चौधरी के समर्थक चाहते हैं कि उन्हें फिर से कैबिनेट मंत्री बनाया जाए। अब देखना होगा कि इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क्या निर्णय लेते हैं।

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