रामकथा में सामाजिक समरसता

अयोध्या। संस्कृति विभाग उ0प्र0 एवं पर्यटन विभाग उ0प्र0 के संयुक्त तत्वावधान में अयोध्या शोध संस्थान (संस्कृति विभाग) अयोध्या द्वारा रामकथा पार्क, नयाघाट अयोध्या में 29 व 30 अगस्त 2021 को भव्य रामायण काॅन्क्लेव समारोह के अन्तर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वितीय दिवस की प्रस्तुतियों का प्रथम सत्र परिचर्चा से प्रारम्भ हुआ जो कि ‘रामकथा में सामाजिक समरसता’ विषय पर आधारित रही। परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय एवं अतिथि वक्ताओं के रूप में अयोध्या के मिथिलेश नन्दिनीशरण, जगद्गुरु वासुदेवाचार्य ‘विद्याभास्कर’, डाॅ0 भरत दास, रामानन्द दास, डाॅ0 सुनीता शास्त्री, डाॅ0 जनार्दन उपाध्याय, यतीन्द्र मिश्र ने प्रतिभाग कर भगवान राम एवं रामकथा से जुड़े अन्य पहलुओं पर अपने-अपने विचार प्रकट किये। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डाॅ0 लवकुश द्विवेदी ने सभी माननीयों का अंगवस्त्र आदि भेंट कर सम्मान किया।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वितीय सत्र का प्रारम्भ अयोध्या के विख्यात पखावज वादक राज कुमार झा द्वारा भगवान राम के चरित्र को पखावज के बोल एवं ताल के संग सजीव किया। राम विनोद शरण, अयोध्या ने पारम्परिक समैया गायन में भजनों एवं बधाई गीत को बहुत ही सुरीले अंदाज में पेश किया। अयोध्या के ही सत्य प्रकाश मिश्र द्वारा उप शास्त्रीय संगीत के माध्यम से कई भजनों को प्रस्तुत किया गया जिसमें ‘चदरिया झीनी रे झीना’ ने श्रोताओं को तालिया बजाने पर विवश कर दिया। द्वितीय सत्र की अन्तिम प्रस्तुति में अयोध्या के संत गायक मिथिला बिहारी दास द्वारा विभिन्न राम भजनों को बड़े ही संगीतमयी अंदाज में पेश किया गया। जिसने अयोध्या के संत समाज में राम और संगीत के महत्व एवं प्रभाव का आभास कराया।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तृतीय सत्र में देवेन्द्र पाठक एवं साथी कलाकारों ने अपने भजनों द्वारा वातावरण को संगीत मय कर दिया। राजीव रंजन पाण्डेय एवं साथी कलाकारों द्वारा पखावज, सारंगी, तबला आदि वाद्ययन्त्रों के माध्यम से जुगलबंदी की बेहतरीन प्रस्तुति की गयी। श्रृंखला में अगली प्रस्तुति शीतला वर्मा, अयोध्या एवं साथी कलाकारों द्वारा अवधी लोकनृत्य की प्रस्तुति की गयी जिसने दर्शकों को ऐसा रोमांचित किया कि दर्शक दीर्घा में उठा तालियों का शोर कलाकारों को और उत्साहित कर गया। तृतीय प्रस्तुति में गोण्डा के शिवपूजन शुक्ला एवं साथी कलाकारों ने अवधी भजनों के माध्यम से श्रोताओं को झूमने एवं गुनगुनाने पर विवश कर दिया। तत्पश्चात पारंपरिक लोक गायन एवं सुमधुर भजनों के रूप में बस्ती से पधारी कुसुम वर्मा ने अपनी कला से सभी को परिचित कराया। अगली प्रस्तुति डाॅ0 कल्पना एस0 वर्मन, अयोध्या एवं साथियों द्वारा अवधी लोक गायन रही। अयोध्या के ही मुकेश कुमार एवं साथी कलाकारों द्वारा फरुवाही लोक नृत्य की प्रस्तुति ने एक बार फिर दर्शकों को टकटकी लगाये रहने पर मजबूर कर दिया। सायं कालीन कार्यक्रम की अन्तिम प्रस्तुति में सुल्तानपुर की निष्ठा शर्मा एवं साथी कलाकारों ने लोकप्रिया गायन एवं भजनों के द्वारा सत्र का संगीतमयी समापन किया।


अन्तिम एवं रात्रि कालीन सत्र में जनपद की सुप्रसिद्ध कविता व्याख्याता डाॅ0 मानसी के संचालन में रामकथा पर आधारित कवि सम्मेलन ने अयोध्या के हिन्दी एवं कविता प्रेमियों को आनन्दित होने का अवसर प्रदान किया। काव्य पाठ में अयोध्या के कवि जमुना उपाध्याय, अशोक टाटम्बरी, लखनऊ की व्याख्या मिश्रा, विभोर चैधरी, बाराबंकी से अनिल बौझड़, जगदीप शुक्ल ‘अंचल’, शिव कुमार व्यास, अम्बेडकर नगर के अभय निर्भीक तथा बस्ती से रामायण धर के विभिन्न रसों से ओतप्रोत अपने-अपने कविता पाठन ने श्रोताओं पर ऐसा जादू किया कि पंडाल में बैठे श्रोता देर रात्रि तक कार्यक्रम का लुत्फ लेते रहे।क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र, संस्कृति विभाग, प्रशासनिक अधिकारी रामतीरथ, अयोध्या शोध संस्थान द्वारा सराहनीय प्रस्तुतियों के माध्यम से आयोजन एवं कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी कलाकारों को पुष्प गुच्छ देकर धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गयी। कार्यक्रम का संचालन देश दीपक मिश्र द्वारा किया गया।

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