
कारागार मुख्यालय अफसरों का चौंकाने वाला खुलासा। एक साल बाद भी रिलीव नहीं हुए स्थानांतरित जेलकर् लंबे समय से परिक्षेत्र कार्यालयों मे जमे बाबुओं के नहीं किए जाते तबादले। एआईजी जेल प्रशासन की मनमाफिक वसूली से जेल अधिकारी-कर्मी दोनों आहत।
राकेश यादव
कारागार मुख्यालय के अधिकारियों की महिमा अपरंपार है। इस विभाग में कुछ कर्मियों के तबादले होते ही नहीं और जिसके होते भी है तो वह रिलीव नहीं होते है। मुख्यालय में तैनात ऐप महानिरीक्षक कारागार (एआईजी प्रशासन) ने पिछले स्थानांतरण सत्र में मोटी रकम लेकर बड़ी संख्या में अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और बाबुओं के तबादले किए। स्थानांतरण के एक साल बाद भी दर्जनों की संख्या में कर्मियों को आज तक रिलीव नहीं किया गया। दिलचस्प बात यह है कि वसूली कर किए गए इन कर्मियों के स्थानांतरित जनपदों में ज्वाइन न करने के बाद भी इनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसको लेकर विभागीय कर्मियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक स्थानांतरण पत्र 2025-26 में सीतापुर जिला कारागार में तैनात वरिष्ठ सहायक नईम खान का तबादला जिला कारागार बंदायू किया गया था। इसी प्रकार बंदायू जिला कारागार में तैनात वरिष्ठ सहायक सोने लाल का तबादला जिला कारागार सीतापुर किया गया था। यह तो सिर्फ बानगी है। इसकी प्रकार विभाग के दर्जनों की संख्या में वार्डर और हेड वार्डर के तबादले किए गए जिसमें बड़ी संख्या में वार्डर और हेड वार्डर आज तक रिलीव नहीं किए गए है। सूत्रों की माने तो जेल अधिकारी कर्मियों की कमी का हवाला देकर स्थानांतरित सुरक्षाकर्मियों को रिलीव ही नहीं करते हैं। वसूली देकर स्थानांतरण करवाने वाले इन कर्मियों को रिलीव नहीं होने के कारण दोहरी मार झेलने को विवश होना पड़ रहा है।
सूत्रों की माने तो स्थानांतरण के बाद रिलीव नहीं होने वाले कर्मियों के साथ ही इस विभाग में कुछ बाबुओं का स्थानांतरण ही नहीं होता है। स्थानांतरण सिर्फ उन्हीं बाबुओं का होता है जो मोटी रकम देकर अपनी मनपसंद जेल पर जाना चाहते है। जानकारों का कहना है आगरा, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर, कानपुर जेल परिक्षेत्र ने दर्जनों की संख्या में ऐसे बाबू है जो पिछले 20-25 साल से एक ही परिक्षेत्र में जमे हुए है। आगरा परिक्षेत्र में रंजना कमलेश, पवन शर्मा, कानपुर परिक्षेत्र में विमल यादव इसका जीता जागता उदाहरण है। लंबे समय से एक ही परिक्षेत्र में जमे बाबुओं का इतना जबरदस्त कॉकस बना हुआ है कि यह परिक्षेत्र की जेलों के सुरक्षाकर्मियों को मनमाफिक कमाऊ जेलों पर स्थानांतरित करवाने का ठेका तक ले लेते है। मुख्यालय बाबुओं से सेटिंग गेटिंग कर यह इन सुरक्षाकर्मियों को मनमाफिक जेलों पर स्थानांतरित तक करवा देते है। इस संबंध में जब एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने सीयूजी (9454418152) फोन को कई प्रयासों के बाद भी उठाया नहीं।
वसूली के समाप्त की गई अस्थाई ड्यूटी!
स्थानांतरण सत्र 2025-26 में सत्र समाप्त होने के मोटी रकम लेकर करीब एक दर्जन जेलरों की कमाऊ जेलों पर अस्थाई ड्यूटी लगाई गई थी। इसमें आजमगढ़ से गाजियाबाद, गाजियाबाद से बागपत और फिर बागपत से जेलर विकास कटियार को फिरोजाबाद भेजा गया। इसी प्रकार झांसी में तैनात कृष्ण मुरारी गुप्ता को पहले फतेहगढ़ फिर सुल्तानपुर फिर बागपत भेजा गया। एटा से प्रदीप कश्यप को पहले नैनी सेंट्रल जेल फिर अयोध्या भेजा गया। यह तो बानगी है। इस प्रकार कई जेलरों को अस्थाई ड्यूटी पर तैनात किया गया। वर्ष 2026-27 की स्थानांतरण नीति के आते ही सभी जेलरों की अस्थाई ड्यूटी खत्म कर उन्हें अपने मूल तैनाती स्थल पर जाने का निर्देश दिया गया। इसके बाद भी विकास कटियार और केएम गुप्ता आज भी फिरोजाबाद और बागपत में जमे हुए हैं। बताया गया है जेल पर जेलर भी होने की वजह से इन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। जबकि बागपत जेल में एक प्रोन्नत जेलर होने के बाद भी अस्थाई ड्यूटी कर रहे जेलर को हटाया नहीं गया है। सूत्रों की माने तो अधिकारियों ने पुनः वसूली के लिए जेलरों की अस्थाई ड्यूटी को समाप्त कराया है। वसूली कर नई जेलों पर तैनाती के लिए यह कदम उठाया गया है।
























