Wednesday, June 3, 2026
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‘नो पीयूसीसी,नो फ्यूल’ नीति से प्रदूषण पर लगेगी लगाम, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

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‘नो पीयूसीसी,नो फ्यूल’ नीति से प्रदूषण पर लगेगी लगाम, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
‘नो पीयूसीसी,नो फ्यूल’ नीति से प्रदूषण पर लगेगी लगाम, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न। वर्ष 2026 में एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण में 30-35 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई करें सुनिश्चित। 1 अक्टूबर 2026 से “नो पीयूसीसी,नो फ्यूल” व्यवस्था होगी लागू।


लखनऊ। 
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे कार्यों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण और वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जागरूक किया जाए। मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 के दौरान एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण के स्तर में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क धूल, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी वेस्ट), हरित आवरण विस्तार तथा पराली प्रबंधन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप किए जा रहे हैं।


    उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में सभी प्रमुख गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए विभिन्न पोर्टलों, मोबाइल एप्लीकेशनों, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और डैशबोर्ड का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाए। इससे सड़क सफाई, सड़क पुनर्विकास, हरितीकरण, निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों की वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सकेगी। उन्होंने सभी विभागों को निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करने तथा नियमित समीक्षा के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। वाहन क्षेत्र में ‘नया सफर’ योजना के माध्यम से पुराने एवं प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर बीएस-6, सीएनजी एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। एनसीआर के जिलों में लगभग 26.19 लाख एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों की पहचान की गई है। जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान 37,156 वाहनों को स्क्रैप किया गया तथा 460 वाहनों को जब्त किया गया है। इसके अतिरिक्त 1 अक्टूबर 2026 से “नो पीयूसीसी, नो फ्यूल” व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे स्थापित किए जाएंगे।


  सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में इन शहरों में 100 ई-बसें संचालित हैं। वायु गुणवत्ता की निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए एनसीआर-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 43 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) स्थापित किए जाने हैं। इनमें से 25 स्टेशन संचालित हैं, जबकि शेष 18 नए स्टेशन अक्टूबर 2026 तक स्थापित किए जाएंगे। औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत 725 वायू प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) स्थापित कर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सर्वर से जोड़ा जा चुका है। साथ ही 665 उद्योगों में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCD) की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिनमें से 179 इकाइयों में यह व्यवस्था स्थापित की जा चुकी है तथा 100 इकाइयों में इंस्टालेशन एवं रेट्रोफिटिंग का कार्य प्रक्रियाधीन है तथा अन्य इकाइयों में चरणबद्ध रूप से स्थापना कराई जा रही है।


    सड़क धूल नियंत्रण के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं मेरठ में कुल 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिस पर लगभग 3,666 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। वर्तमान तक 143.8 किलोमीटर सड़क पुनर्विकास कार्य पूर्ण किया जा चुका है। यांत्रिक सड़क सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने हेतु 108 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों की आवश्यकता आंकी गई है, जबकि वर्तमान में 45 मशीनें उपलब्ध हैं और 50 मशीनों की खरीद प्रक्रिया प्रगति पर है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी वेस्ट) प्रबंधन के अंतर्गत कुल 37 सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाने हैं, जिनमें से 29 केंद्र संचालित हो चुके हैं तथा शेष केंद्रों की स्थापना की कार्यवाही जारी है। सभी निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, जियो-टैगिंग तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) आधारित प्रणाली विकसित की जा रही है।


    नगर ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) प्रबंधन के अंतर्गत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद एवं मेरठ में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे के वैज्ञानिक संग्रहण एवं प्रसंस्करण की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। नोएडा में 600 टीपीडी क्षमता की टॉरिफाइड चारकोल परियोजना तथा 300 टीपीडी क्षमता की बायोगैस परियोजना विकसित की जा रही है। साथ ही बायोमास एवं कूड़ा जलाने की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। इसके अतिरिक्त पौधारोपण, पराली प्रबंधन, सीबीजी संयंत्रों की स्थापना, बायोमास उपयोग, ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, मेट्रो एवं आरआरटीएस विस्तार, अंतिम मील कनेक्टिविटी तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को भी कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।