मौसम वैज्ञानिकों का आकलन 18 जुलाई से अच्छी वर्षा की सम्भावना

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मानसून की स्थिति की समीक्षा की।मौसम वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार आगामी 18 जुलाई से अच्छी वर्षा की सम्भावना,ताजा स्थिति के अनुसार सभी प्रमुख नदियों, नहरों और जलाशयों में पर्याप्त जलराशिप्रदेश सरकार द्वारा नहरों, नलकूपों के विस्तार से सिंचाई सुविधा को बेहतर बनाया गया।यद्यपि विलम्ब से बोआई उपज को प्रभावित करती है, किन्तु हमें वैकल्पिक प्रबन्ध के सम्बन्ध में तैयार रहना होगा, सभी परिस्थितियों के लिए हमारी कार्ययोजना तैयार रहनी चाहिए।कृषि, सिंचाई, राहत, राजस्व आदि सम्बन्धित विभाग अलर्ट मोड में रहें, प्रत्येक जनपद में कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों से सतत संवाद बनाये रखें।कहीं भी पेयजल का अभाव न हो, विन्ध्य और बुन्देलखण्ड क्षेत्रों में पेयजल की सुचारु आपूर्ति बनी रहे।वन विभाग वन्य जीवों के लिए तथा पशुपालन विभाग पशुओं के पेयजल की व्यवस्था को बेहतर बनाये रखे, बरसात पर निर्भर जलाशयों में जल की उपलब्धता के लिए विशेष वैकल्पिक प्रयास किए जाएं।

लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ताजा स्थिति के अनुसार सभी प्रमुख नदियों, नहरों और जलाशयों में पर्याप्त जलराशि है। यह संतोषप्रद स्थिति है। उत्तर प्रदेश में आमतौर पर 15 जून तक बरसात का मौसम प्रारम्भ हो जाता रहा है, जो कि 15 सितम्बर तक जारी रहता है। खेती-किसानी की समृद्धि के लिए प्राकृतिक वर्षा अमृत है। इस बार मॉनसून में देरी हुई है। हालांकि प्राकृतिक वर्षा जल से सिंचाई के साथ-साथ प्रदेश सरकार द्वारा नहरों, नलकूपों के विस्तार से सिंचाई सुविधा को बेहतर बनाया गया है। प्रदेश में मानसून की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर कम वर्षा के कारण कृषि उपज में होने वाले प्रभावों के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण किया गया। उन्होंने कहा कि अल्प वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बोआई का कार्य प्रभावित हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार आगामी 18 जुलाई से अच्छी वर्षा की सम्भावना है। यद्यपि विलम्ब से बोआई उपज को प्रभावित करती है, किन्तु हमें वैकल्पिक प्रबन्ध के सम्बन्ध में तैयार रहना होगा। सभी परिस्थितियों के लिए हमारी कार्ययोजना तैयार रहनी चाहिए।


कृषि, सिंचाई, राहत, राजस्व आदि सम्बन्धित विभाग अलर्ट मोड में रहें। प्रत्येक जनपद में कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों से सतत संवाद बनाये रखें। उन्हें सही जानकारी उपलब्ध हो। बांदा, चन्दौली, हमीरपुर, देवरिया, जालौन जिलों के साथ-साथ बलिया, बस्ती, गोरखपुर, महराजगंज, संतकबीरनगर और श्रावस्ती जैसे जनपदों पर विशेष ध्यान दिया जाना अपेक्षित है। आगामी एक सप्ताह हमारे लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी पेयजल का अभाव न हो। विन्ध्य और बुन्देलखण्ड क्षेत्रों में पेयजल की सुचारु आपूर्ति बनी रहे। वन विभाग वन्य जीवों के लिए तथा पशुपालन विभाग पशुओं के पेयजल की व्यवस्था को बेहतर बनाये रखे। बरसात पर निर्भर जलाशयों में जल की उपलब्धता के लिए विशेष वैकल्पिक प्रयास किए जाएं।प्रस्तुतिकरण के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि दक्षिणी पश्चिमी मॉनसून के प्रभाव से इस वर्ष 13 जुलाई तक मात्र 76.6 मिलीमीटर वर्षा हुई है। जो कि सामान्य वर्षा 199.7 मिलीमीटर से लगभग 62 प्रतिशत कम है। इस बीच एकमात्र आगरा जनपद ऐसा रहा जहां सामान्य वर्षा हुई। ललितपुर, फिरोजाबाद, वाराणसी और हापुड़ में सामान्य (80 प्रतिशत से 120 प्रतिशत) और खीरी, देवरिया, एटा और बिजनौर में सामान्य से कम (60 प्रतिशत-80 प्रतिशत) वर्षा हुई है। 19 जिले ऐसे हैं, यहां अब तक सामान्य से 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक ही वर्षा दर्ज की गई है।


खरीफ अभियान 2022-23 के अन्तर्गत 13 जुलाई की अद्यतन स्थिति के अनुसार प्रदेश में 96.03 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष 42.41 लाख हेक्टेयर की बोआई हो सकी है, जो कि लक्ष्य का मात्र 44.16 प्रतिशत ही है। इसमें 45 प्रतिशत हिस्सा अकेले धान की बोआई का है। गत वर्ष इसी तिथि तक 53.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर बोआई हो चुकी थी।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र, कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एम0एस0एम0ई0 नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग, राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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