चेटीचंड के जुलूस में झांकियों को लेकर होड़

इस बार अजमेर में चेटीचंड और महावीर जयंती के जुलूस को लेकर दोनों समुदायों में उत्साह।कोरोना की वजह से गत दो वर्षों से नहीं निकले जुलूस। चेटीचंड के जुलूस में झांकियों को लेकर होड़, तो महावीर जयंती पर 8 हजार लोगों का सामूहिक भोज।

एस0 पी0 मित्तल

कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले दो वर्षों से अजमेर में सिंधी समुदाय के आराध्य देव भगवान झूलेलाल की जयंती पर चेटीचंड और महावीर जयंती पर जैन समुदाय के जुलूस नहीं निकल सके। लेकिन इस बार दो अप्रैल को चेटीचंड और 14 अप्रैल को महावीर जयंती का जुलूस निकालने के लिए दोनों ही समुदाय के लोगों में भारी उत्साह है। दोनों ही समुदाय के प्रतिनिधि पिछले दो वर्ष की कसर निकाल लेना चाहते हैं। इन समुदायों के युवाओं में भी भारी उत्साह दिख रहा है। दोनों ही समुदायों की अजमेर में खासी आबादी है। पहले बात सिंधी समुदाय के चेटीचंड जुलूस की। अजमेर में झूलेलाल महाराज की जयंती पर दो बड़े कार्यक्रम होते हैं। एक सिंधी संस्कृति के अनुरूप पखवाड़ा मनाया जाता है। इस पखवाड़े में 15 दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस पखवाड़े का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से अवगत कराना होता है। सिंधी समुदाय के प्रतिनिधि मानते हैं कि आजकल परिवारों में सिंधी भाषा नहीं बोली जाती है। जो बच्चे कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूलों में पढ़ते हैं उन्हें तो सिंधी भाषा बिल्कुल भी नहीं आती है। जबकि सिंधी भाषा एक समृद्ध भाषा है। पखवाड़े के माध्यम से युवा पीढ़ी को सिंधी संस्कृति से अवगत करवाना होता है। यह पखवाड़ा पूज्य चेटीचंड पखवाड़ा उत्सव समिति के तत्वावधान में मनाया जाता है।

समिति के अध्यक्ष कंवल प्रकाश किशनानी और विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े हरि चंदनानी ने बताया कि अजमेर शहर में करीब डेढ़ लाख की आबादी सिंधी समुदाय की है। इसलिए पखवाड़े के विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में सिंधी समुदाय के लोग भाग ले रहे हैं। चंदनानी ने बताया कि दूसरा बड़ा कार्यक्रम चेटीचंड का जुलूस निकालना होता है। इस जुलूस में भी सिंधी संस्कृति से जुड़ी झांकियां प्रदर्शित की जाती है। सब जानते हैं कि देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से बड़ी संख्या में सिंधी समुदाय के लोग शरणार्थी बनकर अजमेर आए थे। लेकिन पिछले 75 सालों में अपने पुरुषार्थ के बल पर सिंधी समुदाय ने अजमेर में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। यही वजह है कि जुलूस में झांकियों के प्रदर्शन को लेकर होड़ लगी रहती है। समुदाय के विभिन्न संगठन चाहते हैं कि उनकी झांकियों का जुलूस में प्रदर्शन हो। यह जुलूस देहली गेट स्थित पूज्य झूलेलाल सेवा ट्रस्ट की ओर से निकाला जाता है। ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रभु लौंगानी ने बताया कि जुलूस में इस बार पचास से भी अधिक झांकियां प्रदर्शित होंगी। जुलूस 2 अप्रैल को दोपहर डेढ़ बजे देहली गेट स्थित झूलेलाल मंदिर से शुरू होगा और देर रात को इसी मंदिर पर समाप्त होगा। जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगा। जुलूस का सौ से भी ज्यादा स्थानों पर स्वागत किया जाएगा। झूलेलाल जयंती के कार्यक्रमों की और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9649750811 पर हरि चंदनानी से ली जा सकती है।

महावीर जयंती का जुलूस:- 14 अप्रैल को अजमेर में महावीर जयंती का जुलूस भी धूमधाम से निकाला जाएगा। जुलूस समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार ढिलवारी और प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने बताया कि इस बार जैन समुदाय में भी जुलूस को लेकर भारी उत्साह है। जुलूस 14 अप्रैल को केसरगंज स्थित जैन मंदिर से शुरू होगा और इसी मंदिर पर समाप्त होगा। जुलूस में सुप्रसिद्ध सोनी जी की नसिया से रथ और अन्य उपकरण प्रदर्शन होंगे। इनमें हाथी, घोड़े, बैंड, नगाड़े आदि भी शामिल हैं। जैन समुदाय के सभी परिवारों के सदस्य जुलूस में भाग लेंगे। शाम को 4 बजे मेरवाड़ा एस्टेट होटल के परिसर में जैन समाज का सामूहिक भोज रखा गया है। इस भोजन में करीब 8 हजार लोग भाग लेंगे। महावीर जयंती के जुलूस के बाद सामूहिक भोज की परंपरा बरसों से चली जा रही है।

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