अंधा बांटे रेवड़ी घरय घराना खाय

डॉ. अम्बरीष राय

‘अंधा बांटे रेवड़ी घरय घराना खाय ‘ कभी जब इस कहावत को सुना था तो लगा नहीं था कि इसका इस कदर दंश भी झेलना पड़ेगा. शहर में पानी है. प्रदेश में पानी है. घरों में घुसा आवारा पानी है. अभागों को आँखों मे पानी है. लेकिन सत्ता और उसके समर्थकों की आँखों में पानी नहीं है. कबका मर चुका है. झक्क सुफेद दाढ़ी बढ़ाया राष्ट्र नायक श्वेत मार्ग पर चलने के अभिनय में है.

सफेद दाढ़ी वाला बाजीगर एक दिन अपने भगवाधारी सूबेदार को बोला. बोला कि एक से लेकर मेरे पास दस नम्बर है, बोलो कौन सा लोगे? सूबेदार बोला कि सारे रंग हमारे हैं, सारे नम्बर हमारे हैं, चलो फ़िलहाल नम्बर एक उठा लेते हैं. और इस तरह से रेवड़ियों की लाइन से स्मार्ट प्रदेश का तमगा लेकर उसे उत्तर प्रदेश के माथे पर चिपका दिया गया.

बड़ी बड़ी होर्डिंग्स से लेकर प्रचार के एलईडी वाहन उत्तरप्रदेश को ख़ासकर लखनऊ वालों को याद दिलाते रहे कि अबे तुम स्मार्ट प्रदेश की स्मार्ट सिटी के स्मार्ट सीटियन हो. कुछ लोग चौड़े हो गए तो कुछ पहले से भी सिकुड़ भी गए. सचिवालय की फाइलों से लेकर ठेकेदारों की जेबों तक पहुँची गर्मी से स्मार्ट प्रदेश की एलईडी रौशन हो गई. झूठ की पालिस से चमकाए गए शहर लोगों को मुँह चिढ़ाते रहे, मगर मजाल कि कोई चूं भी कस सके.

जोगी जी बाह जोगी जी गाती भांड़ बिरादरी सीवर झेलती गोमती में क्या डूबती. तो एक दिन इंद्रदेव को ठिठोली सूझी. उनका हास्यविनोद हम पर भारी पड़ा. उनके भेजे बादलों ने इतना जश्न मनाया कि सब पानी पानी हो गया. इंद्रदेव का पानी उत्तर प्रदेश का स्मार्ट बहा ले गया. स्मार्ट सिटी डुबा गया. स्मार्ट सीटियन हाँफते डाँपते अपने स्मार्ट का सियापा पीट रहे हैं

मेरे गृह जनपद आज़मगढ़ में एक कहावत है कि जहाँ गइलीं डाढ़ा रानी, उहां पड़ल पाथर पानी. पाठक चाचा हमेशा कहते रहे कि ई ससुरा कुल (अटल बिहारी वाजपेयी कालीन भाजपा ) जब आवयने, तब तब आपदा आवयले. पाठक चाचा मिज़ाज़ से कांग्रेसी थे. हम लोगों का दुर्भाग्य कि अब वो हम लोगों के बीच नहीं रहे.

ख़ैर उनकी बात पर हम लोग हँसते थे, सोचते थे कि चचा का कांग्रेसी सत्ता जाने का दर्द है. और ऐसी बातों को मानने में मुझे आज भी सहजता नही होती. मोदी काल में मुझे पाठक चाचा बहुत याद आते हैं. ये इतने बड़े वाले हैं कि प्राकृतिक आपदा ना आए तो नोटबन्दी जैसी आपदा ले आए. आपदा.. आपदा.. बस आपदा..

प्रभु हम पर रहम करो! जैसे हम यूपी वालों के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं, वैसे ही महंत जी के भी हैं. स्मार्ट प्रदेश का सचिवालय पानी में, मंत्रियों के घर पानी में, राजधानी के पॉश इलाके पानी में, योगी सरकार पानी में.. आप ये भी कह सकते हैं कि हेलल हेलल भइसियां पानी में…

गंगा में बहती लाशों के साथ दुनिया में मशहूर हुए योगी जी के पास अभी और भी कीर्तिमान बनाने के लिए पूरा इक्कीस (2021) बचा है. फिर आचार संहिता लगेगी. फिर चुनाव होंगे. फिर परिणाम आएंगे. फिर से पूजा पाठ होगा.

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