Saturday, April 18, 2026
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महिला आरक्षण बिल पर भाजपा भ्रमित:डिम्पल यादव

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महिला आरक्षण बिल पर भाजपा भ्रमित:डिम्पल यादव
महिला आरक्षण बिल पर भाजपा भ्रमित:डिम्पल यादव

 राजेन्द्र चौधरी

महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। मैनपुरी से सपा सांसद डिम्पल यादव ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे पर भ्रम फैला रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिला सशक्तिकरण के पक्ष में रही है, लेकिन सरकार की मंशा पर संदेह इसलिए है क्योंकि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी किए बिना आरक्षण लागू करने की बात की जा रही है। डिम्पल यादव ने सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब जनगणना कराने का वादा किया गया था, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण के नाम पर लाया गया यह संशोधन राजनीतिक फायदे के लिए हो सकता है, जिससे आने वाले चुनावों में सत्ता पक्ष को बढ़त मिले।

मैनपुरी से सपा सांसद डिम्पल यादव ने कहा है कि सत्ता पक्ष जिस तरह की भूमिका बना रहा है उससे लगता है विपक्ष महिला आरक्षण के साथ नही है। जब 2013 में नारी वंदन अधिनियम पास हुआ था तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने मिलकर सर्वसहमति से उसे पास किया था। भाजपा भ्रांति फैला रही है। भाजपा सरकार महिला आरक्षण से सम्बन्धित जो संशोधन लाई है उसके पीछे सरकार की मंशा क्या है? क्या सरकार महिलाओं का वाकई सशक्तिकरण चाहती है या इस विधेयक को लाकर खुद के सशक्तिकरण की तरफ काम कर रही है। डिम्पल यादव ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का पक्ष रहा है कि पहले जनगणना हो फिर परिसीमन व्यवस्था लागू हो। फिर आरक्षण लागू हो। इस पर सभी सहमत है। गृहमंत्री ने भी कहा था कि वे जनगणना कराएंगे। अभी तक वे घरों की गिनती पिछले तीन साल में करा पाये है। भाजपा की सरकार ने 2024 से ही जनगणना क्यों नहीं शुरू की? ढाई साल निकाल दिए। क्यों अब सरकार जल्दबाजी दिखा रही है? संविधान संशोधन क्यों ला रही है? संविधान क्यों बदलना चाहती है? क्योंकि ये सत्ता में बने रहना चाहते है इसीलिए परिसीमन प्रक्रिया को अपने हथियार के रूप में प्रयोग कर महिलाओं को 2029 में संसद में नहीं देखना चाहते है।


डिम्पल यादव ने कहा कि परिसीमन के काम में डिलिमिटेशन कमीशन की जगह चुनाव आयोग को लगाया गया है और 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा रहा है। कहीं न कहीं ये प्रश्नचिह्न उठता है कि ये क्यों चाहते हैं कि संविधान कमजोर हो। भाजपा नेतृत्व ने कल गारंटी की बात की। इन्होंने हर वर्श 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार देने की गारंटी दी थी। किसानों को दोगुनी आय की गारंटी दी थी, अब तक क्या कोई गारंटी पूरी हुई। यूपी में होली दीवाली पर मुफ्त सिलेण्डर देने का वादा भी इन्होंने पूरा नहीं किया। आवारा पशुओं से बचाव की बात कर रहे थे, लेकिन इनका एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। नोटबंदी से भ्रष्टाचार, आतंकवाद खत्म करने का वादा किया था बल्कि भ्रष्टाचार और आतंकवादी की घटनाए सबसे ज्यादा भाजपा की सरकार में हुई है।

नक्सलवाद खत्म नहीं हुआ बल्कि नक्सलवादी और आतंकवादी घटनाओं में सबसे ज्यादा जवान शहीद हुए। शहीद का दर्जा और पेंशन शहीद परिवारों को क्यों नहीं दिया जा रहा है? उनके परिवार के बारे में नहीं सोचा गया। आंगनवाड़ी महिलाएं गांवों में संघर्ष कर रही है। यूपी में स्कूल बंद किए गए है। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त है। पोषण देने का काम बंद है, बच्चियों, महिलाओं की सुरक्षा कहां है? हाथरस कांड हुआ। उत्तराखण्ड कांड हुआ जब 19 साल की लड़की अंकिता भंडारी को मारा गया। तो भाजपा की कोई महिला नही खड़ी हुई। मणिपुर की घटना में किसी भाजपा की महिला सांसद ने आवाज नहीं उठाई।


    श्रीमती यादव ने कहा कि भाजपा को सत्ता का मोह हो गया है। भाजपा गरीबों, पिछड़ों को उनका हक और सम्मान नहीं देना चाहती हैं। भाजपा आधी आबादी एसएसी-एसटी महिलाओं, अल्पसंख्यक और ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण क्यों नहीं दे रही है। हर धर्म और हर वर्ग की महिलाएं आगे बढ़े, आरक्षण संशोधन बिल में महिलाओं के साथ अन्याय नहीं हो। उत्तर प्रदेश में नेताजी ने पंचायती व्यवस्था में एससी एसटी और ओबीसी के साथ जनरल कैटेगरी को भी आरक्षण दिया था। जातीय जनगणना की मांग समाजवादी पार्टी की है। जातीय जनगणना से ही सबको सम्मान और अधिकार मिलेगा। भाजपा सत्ता से जाने के डर से महिला आरक्षण बिल लायी है लेकिन भाजपा का यह दांव भी खाली जायेगा। उसे अगले चुनाव में सत्ता से बाहर जाना तय है।