भारतीय संविधान निर्माता की जयंती

१४ अप्रैल का दिन भारत एवं भारतीयों के लिए बहुत ही महत्व पूर्ण है। आज ही के दिन सामाजिक नवजागरण के अग्रदूत और समतामूलक समाज के निर्माणकर्ता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था। १४ अप्रैल को उनकी जयंती मनाई जाती है। डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता के तौर पर जाना जाता है। उनका जन्म 14 अप्रैल को हुआ था। बाबा साहब की जयंती को पूरे देश में लोग उत्साह से मनाते हैं। भारत रत्न अम्बेडकर पूरा जीवन संघर्ष करते रहे। भेदभाव का सामना करते हुए उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। आजादी की लडाई में शामिल हुए और स्वतन्त्र भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए संविधान निर्माण में अतुल्य भूमिका निभाई। बाबा साहेब ने पिछड़े और कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए पूरा जीवन संघर्ष किया। भारतीय संविधान निर्माता की जयंती

साल के 365 दिन इतिहास में तरह-तरह की घटनाओं के साथ दर्ज हैं। इनमें कुछ अच्छी हैं तो कुछ बुरी। 31 मार्च का दिन भी ऐसी ही बहुत सी घटनाओं का साक्षी रहा है। ऐसी ही एक घटना की बात करें तो देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर को 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करके देश और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को नमन किया गया।’बाबासाहब’ भीमराव आंबेडकर ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और जीवनभर सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ते रहे। आजादी के बाद उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई जब उन्हें राष्ट्र के संविधान निर्माण का दायित्व सौंपा गया।

कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए।

ना मस्जिद की बात हो,न शिवालों की बात हो,प्रजा बेरोज़गार है,पहले निवालों की बात हो। मेरी नींद को दिक्कत ना भजन से ना अज़ान से है।मेरी नींद को दिक्कत मरते हुये जवान और खुदकुशी करते किसान से है….!
मनुष्य नश्वर है,उसी तरह विचार भी नश्वर है, एक विचार को प्रचार प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की नहीं तो दोनों मुरझा कर मर जाते हैं।
अन्याय से लड़ते हुये आपकी मौत हो जाती है तो आपकी आने वाली पीढ़िया उसका बदला अवश्य लेगी किन्तु अन्याय सहते सहते यदि मर जाओगे तो आने वाली पीढ़िया भी गुलाम बनी रहेगी। हिम्मत इतनी बडी रखो के किस्मत छोटी लगने लगे।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित महू में हुआ था जिसका नाम आज बदल कर डॉ.अंबेडकर नगर रख दिया गया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। डॉ. भीमराव अंबेडकर जाति से दलित थे। उनकी जाति को अछूत जाति माना जाता था। इसलिए उनका बचपन बहुत ही मुश्किलों में व्यतीत हुआ था। बाबासाहब अंबेडकर सहित सभी निम्न जाति के लोगों को सामाजिक बहिष्कार,अपमान और भेदभाव का सामना करना पड़ता था।

देश आजाद होने के बाद भारत का नया संविधान तैयार करने के लिए 29 अगस्त,1947 को एक ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया गया। इसमें 7 सदस्य थे और कमेटी का अध्यक्ष डा.आंबेडकर को बनाया गया।संविधान का लिखित प्रारूप पेश करना ही इनकी जिम्मेदारी थी। संविधान को बनने में 2 साल,11 माह और 17 दिन का समय लगा। भारतीय संविधान पर संविधान सभा के जिन 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए।उनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। संविधान तैयार करने वाली ड्राफ्टिंग कमेटी में अध्यक्ष के तौर पर आंबेडकर का चयन यूं ही नहीं हुआ था। उनकी राजनीतिक योग्यता और कानूनी दक्षता और भाषायी ज्ञान के कारण उन्हें अध्यक्ष बनाया गया था। इतना ही नहीं, संविधान सभा में उठने वाले सवालों का जवाब देने और प्रावधानों के बीच संतुलन बनाने में आंबेडकर की भूमिका अहम रही थी। जिसका प्रभाव भारतीय संविधान में देखने को मिलता है। इसलिए इन्हें संविधान निर्माता कहा गया।

न ईश्वर,न अल्लाह और न ही राम मेरा समाज था जब गुलाम तब काम न आया कोई भगवान दिलाने हम सब को सम्मान एक ही शेर जन्मा था भीमराव था जिनका नाम।
एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है जिसकी आवश्यकता है वो है न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।
गलत को गलत कहने की क्षमता नहीं है तो आप की प्रतिमा व्यर्थ है।जो धर्म जन्म से एक को श्रेष्ठ और दूसरे को नीच बताये वह धर्म नहीं, गुलाम बनाए रखने का षड़यंत्र है।

डॉ.भीमराव अंबेडकर ने 1907 में मैट्रिकुलेशन पास करने के बाद एली फिंस्टम कॉलेज में 1912 में ग्रेजुएट हुए। 1913 और 15 प्राचीन भारत व्यापार पर एक शोध प्रबंध लिखा था। डॉ भीमराव अंबेडकर ने 1915 में कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए की शिक्षा ली। 1917 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली। नेशनल डेवलपमेंट फॉर इंडिया एंड एनालिटिकल स्टडी विषय पर उन्होंने शोध किया। 1917 में ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में उन्होंने दाखिला लिया लेकिन साधन के अभाव के कारण वह अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। कुछ समय बाद लंदन जाकर लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अधूरी पढ़ाई उन्होंने पूरी की। इसके साथ-साथ एमएससी और बार एट-लॉ की डिग्री भी प्राप्त की। अपने युग के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे राजनेता और एवं विचारक थे। भीम राव आंबेडकर जीवनी कुल 64 विषयों में मा.स्टर थे, 9 भाषाओं के जानकार थे,विश्व के सभी धर्मों के रूप में पढ़ाई की थी।

डॉ. भीमराव अंबेडकर छुआछूत की पीड़ा को जन्म से ही झेलते आए थे। जाति प्रथा और ऊंच-नीच का भेदभाव वह बचपन से ही देखते आए थे और इसके स्वरूप उन्होंने काफी अपमान का सामना किया। डॉ भीमराव अंबेडकर ने छुआछूत के विरुद्ध संघर्ष किया और इसके जरिए वे निम्न जाति वालों को छुआछूत की प्रथा से मुक्ति दिलाना चाहते थे और समाज में बराबर का दर्जा दिलाना चाहते थे। 1920 के दशक में मुंबई में डॉ भीमराव अंबेडकर ने अपने भाषण में यह साफ-साफ कहा था कि “जहां मेरे व्यक्तिगत हित और देश हित में टकराव होगा वहां पर मैं देश के हित को प्राथमिकता दूंगा परंतु जहां दलित जातियों के हित और देश के हित में टकराव होगा वहां मैं दलित जातियों को प्राथमिकता दूंगा।” वे दलित वर्ग के लिए मसीहा के रूप में सामने आए जिन्होंने अपने अंतिम क्षण तक दलितों को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष किया। सन 1927 में अछूतों को लेने के लिए एक सत्याग्रह का नेतृत्व किया। और सन 1937 में मुंबई में उच्च न्यायालय में मुकदमा जीत लिया।

सफलता कभी भी पक्की नहीं होती है,असफलता भी कभी अंतिम नहीं होती है।
अपनी कोशिश को तब तक जारी रखो,जब तक आपकी जीत इतिहास ना बन जाए।

भारत रत्न बाबासाहेब अंबेडकर के पास 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के बेहतर जानकार थे। भीमराव अंबेडकर के पास लगभग 32 डिग्रियां थी। बाबासाहेब आजाद भारत के पहले कानून मंत्री थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मात्र 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की थी। वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ‘डॉक्टर ऑल साइंस’ नामक एक दुर्लभ डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले भारत के ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं। प्रथम विश्व युद्ध की वजह से उनको भारत वापस लौटना पड़ा। कुछ समय बाद उन्होंने बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में नौकरी प्रारंभ की। बाद में उनको सिडनेम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनोमिक्स मे राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर के रूप में नौकरी मिल गयी। कोल्हापुर के शाहू महाराज की मदद से एक बार फिर वह उच्च शिक्षा के लिए लंदन गए।

धर्म मनुष्य के लिए बना है,न कि मनुष्य धर्म के लिए।
आप मन से स्वतंत्र हैं तभी,आप वास्तव में स्वतंत्र हैं।

मंदिर जाने वाले लोगों की लंबी कतारें,जिस दिन पुस्तकालय की ओर बढ़ेगी।
उस दिन इस देश को महाशक्ति, बनने से कोई रोक नही सकता है।

भीम राव आंबेडकर अगर आज जीवित होते तो समाज में आरक्षण पर शुरू से ही अपनी नजर रखते। इसके साथ ही आरक्षण नीति में कुछ बुनियादी बदलाव उनकी मांग होती। वे दूसरी पीढ़ी को आरक्षण का फायदा कतई भी नहीं लेने देते। क्योंकि अब यह जरूरत नहीं,बेजा फायदा था।आरक्षित कोटे से एक अवसर पाने वाले दलित परिवार बेहतर आर्थिक और शैक्षणिक स्तर हासिल कर चुके थे। बाबा साहब इसे सामान्य वर्ग में आना ही मानते थे। गरीबी सिर्फ दलितों में नहीं थी। गांवों में लाखों परिवार भी उसी लंबी गुलामी की पैदाइश थे इसके अलावा भूमिहीन, गरीब और मजदूरी पर आश्रित है। अगर बाबा साहेब होते तो इसको नजर अंदाज कर ही नहीं सकते थे। वे पहले शख्स होते जो बीस साल बाद आर्थिक आधार पर सबका साथ, सबका विकास चाहते। तब ऊंची जाति के उपेक्षित और प्रतिभाशाली लोग भी सिर्फ उन्हीं की शरण में जाते और वे ही सर्वोत्तम न्यायसंगत रास्ता निकालते।वे अनुसूचित जाति,जनजाति के नौकरी प्राप्त अफसर-कर्मचारियों के संगठन बनाए जाने के खुलकर खिलाफ होते। वे कहते-आरक्षितों के संगठन बनाकर आरक्षण को राजनीतिक ढाल मत बनाइए। वर्ना हम दिशा भटक जाएंगे। आप मजबूत हो गए हैं तो दूसरे कमजोरों की सहायता कीजिए।

भारत के झंडे पर अशोक चक्र लगवाने वाले डाॅ. भीमराव अम्बेडकर ही थे। डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर लगभग 9 भाषाओं को जानते थे। भीमराव अंबेडकर ने 21 साल की उम्र तक लगभग सभी धर्मों की पढ़ाई कर ली थी। भीमराव अंबेडकर ऐसे पहले इन्सान थे जिन्होंने अर्थशास्त्र में PhD विदेश जाकर की थी। भीमराव अंबेडकर के पास लगभग 32 डिग्रियां थी। बाबासाहेब आजाद भारत के पहले कानून मंत्री थे। बाबासाहेब ने दो बार लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार हार गए थे। भीमराव अम्बेडकर हिन्दू महार जाति के थे, जिन्हें समाज अछूत मनाता था। भीमराव अम्बेडकर कश्मीर में लगी धारा 370 के खिलाफ थे। भारतीय संविधान निर्माता की जयंती


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