राजस्थान में शिक्षकों का बुरा हाल

संविदा पर लगे नर्सिंग कर्मियों की जयपुर में भूख हड़ताल शुरू। घर पर भूखों मरने के बजाए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने ही मर जाएंगे।राजस्थान में पातेय वेतन शिक्षकों का भी बुरा हाल।

एस0 पी0 मित्तल

03 मार्च से जयपुर के शहीद स्मारक पर राजस्थान भर के संविदा नर्सिंग कर्मियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। अनेक महिलाओं के साथ छोटे छोटे बच्चे भी बैठे हुए हैं। सरकारी अस्पतालों में संविदा पर नियुक्त नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से रात और दिन मेहनत कर रहे हैं। कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर संक्रमित मरीजों की सेवा की। उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बजट में संविदा पर लगे नर्सिंग कर्मियों को नियमित करने की घोषणा करेंगे। लेकिन इसके उल्टे सरकार ने नर्सिंग कर्मियों की जो भर्ती निकाली है, उसमें संविदा पर लगे नर्सिंग कर्मियों को प्राथमिकता देने का कोई उल्लेख नहीं है। सरकार एक ओर सीधी भर्ती कर नर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति कर रही है तो दूसरी ओर हजारों नर्सिंग कर्मी संविदा के अनुरूप मात्र 6 हजार रुपए मासिक पारिश्रमिक पर काम कर रहे हैं।

नर्सिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि नर्सिंग के कार्य में अनुभव महत्वपूर्ण होता है। जो नर्सिंग कर्मी संविदा पर पिछले कई वर्षों से सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे हैं उन्हें यदि नियमित कर दिया जाए तो सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता में और अधिक वृद्धि होगी। पदाधिकारियों ने कहा कि जब सरकार को जरूरत थी, तब संविदा पर नर्सिंग कर्मियों को रख लिया। लेकिन आज ऐसे कार्मिकों का कोई सम्मान नहीं किया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में 6 हजार रुपए के पारिश्रमिक पर काम करना बेहद मुश्किल है। हम अपने बच्चों को सही तरीके से घर पर नहीं रख पा रहे हैं। हमारे सामने भूखों मरने की स्थिति है। घर पर मरने के बजाए हम अब जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने ही भूख हड़ताल कर मर जाएंगे। शहीद स्मारक पर बैठे नर्सिंग कर्मियों ने कहा कि गत विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में संविदा कर्मियों को नियमित करने का वादा किया था। लेकिन कांग्रेस की सरकार बने तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी संविदा कर्मियों को नियमित नहीं किया गया है। चिकित्सा विभाग में ही नहीं बल्कि पंचायती राज, ग्रामीण विकास, जलदाय विभाग आदि में भी संविदा पर हजारों कार्मिक काम कर रहे हैं। सरकार को अपने वादे के मुताबिक इन सभी संविदा कर्मियों को नियमित करना चाहिए।

पातेय वेतन शिक्षकों का भी बुरा हाल-

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पातेय वेतन के नाम से पहचाने जाने वाले हजारों शिक्षकों का भी बुरा हाल है। सरकार ने पूर्व में शिक्षकों को अस्थाई तौर पर पदोन्नति दे दी, लेकिन उनका वेतन नहीं बढ़ाया। यानी जो वेतन मिल रहा था, उसी आधार पर शिक्षकों को द्वितीय श्रेणी, लेक्चरर, हैड मास्टर, आदि के पदों पर पदोन्नति दे दी गई। ऐसे शिक्षक चाहते हैं कि मौजूदा समय में जिन पदों पर काम कर रहे हैं उन्हीं पर स्थाई नियुक्ति दी जाए। लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। पातेय वेतन वाले शिक्षक पिछले कई वर्षों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। कई शिक्षकों को हैडमास्टर से पुन: लेक्चरर या द्वितीय श्रेणी का अध्यापक बना दिया गया है। इससे शिक्षकों को मानसिक तानव के दौर से भी गुजरना पड़ रहा है। पातेय वेतन शिक्षक संघ के प्रतिनिधि दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से आग्रह किया है कि ऐसे शिक्षकों को मौजूदा पदों पर ही नियुक्ति दी जाए। पातेय वेतन शिक्षकों के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9664309124 पर पंडित दिनेश शर्मा से ली जा सकती है।

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