डीआईजी जेल मुख्यालय को मिला स्पष्टीकरण..!

परिक्षेत्र के बजाए डीआईजी जेल मुख्यालय को मिला स्पष्टीकरण..! नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो होगी कार्यवाही। जेल मुख्यालय के दो बाबुओं के निलंबन का मामला। डीआईजी जेल मुख्यालय को मिला स्पष्टीकरण..!

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राकेश यादव

लखनऊ। पत्रावली में लापरवाही बरतने के आरोप में दो बाबुओं के निलंबन के मामले में डीआईजी जेल मुख्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिले पर डीआईजी मुख्यालय के खिलाफ भी कार्यवाही किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि स्पष्टीकरण की वजह से डीआईजी मुख्यालय को किसी जेल परिक्षेत्र का प्रभार नहीं सौंपा गया है। यह अलग बात है कि मुख्यालय डीआईजी को परिक्षेत्र के बजाए दो परिक्षेत्र का अपीलीय अधिकारी जरूर नामित कर दिया गया है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक स्थानांतरण सत्र के दौरान शासन ने जेल मुख्यालय से एक जेल अधिकारी का ब्यौरा तलब किया था। मुख्यालय के बाबुओं ने फाइल को डीआईजी जेल मुख्यालय के समक्ष प्रस्तुत करने के बाद विभाग के मुखिया आईजी जेल को बगैर दिखाए ही शासन को भेज दिया। जबकि नियमानुसार बाबू फाइल तैयार कर अधीक्षक मुख्यालय के समक्ष पेश करते है। अधीक्षक के बाद यह फाइल डीआईजी मुख्यालय के पास जाती है। डीआईजी फाइल को आईजी के अवलोकन कराने के बाद शासन भेजते हैं।

मुख्यालय के एक दर्जन बाबुओं का हुआ पटल परिवर्तन

कारागार मुख्यालय के मुखिया पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक कारागार ने पांच प्रशासनिक अधिकारियों समेत एक दर्जन बाबुओं के पटल परिवर्तन किए हैं। वीके सिंह से निर्माण/नजारत वापस लेकर गोपनीय और आईजी कैंप कार्यालय का प्रभार सौंपा हैं। इसी प्रकार पंकज पाठक को आधुनिकीकरण के साथ नजारत, सुरेश गंगवार को संपरीक्षा के साथ निर्माण, अर्चना को जनसूचना हटाकर सिर्फ उद्योग और कमल कनौजिया को कंट्रोल रूम से साथ जनसूचना दिया गया है। इसी प्रकार प्रधान सहायक कुमुद निरंजन को प्रोबेशन से हटाकर नजारत, श्रवण वर्मा को सामा वन से हटाकर डीआईजी मुख्यालय कैंप कार्यालय, वरिष्ठ सहायक एजाज अहमद को सामा दो से हटाकर अभिलेख, राकेश कुमार को जनसूचना से हटाकर सामा दो, कनिष्ठ सहायक सृजल कश्यप को अधिष्ठान एक से हटाकर आधुनिकीकरण और प्रिया पांडेय को प्रशिक्षण सेल से हटाकर सामान्य अनुभाग एक में तैनात किया गया है। इसमें कई बाबुओं का पटल परिवर्तन अभी कुछ दिन पहले ही हुआ था। चर्चा है कि कई अनुभवहीन बाबुओं को कमाऊ पटल सौंप दिए गए, वहीं कई वरिष्ठ को मौका तक नहीं दिया गया।

सूत्र बताते है कि डीआईजी मुख्यालय ने विभागाध्यक्ष को दिखाए बगैर ही अधीक्षक की फाइल को शासन भेज दिया। इसकी जानकारी होने के बाद हरकत में आए विभाग के मुखिया आईजी जेल ने आनन फानन में फाइल तैयार करने वाले गोपनीय अनुभाग के बाबू संजय श्रीवास्तव और विनय कुमार रावत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके अलावा इसी मामले में डीआईजी जेल मुख्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया। विभाग में चर्चा है कि नोटिस मिलने की वजह से ही डीआईजी जेल मुख्यालय को विभाग के नौ जेल परिक्षेत्र में से किसी एक परिक्षेत्र का भी प्रभार नहीं दिया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कार्यों में शिथिलता बरतने की वजह से उन्हें जेल परिक्षेत्र की जिम्मेदारी से दूर रखा गया है। उधर इस संबंध में जब डीजी पुलिस/आईजी जेल पीवी रामाशास्त्री से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई। मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डीआईजी से स्पष्टीकरण मांगे जाने की पुष्टि की है। डीआईजी जेल मुख्यालय को मिला स्पष्टीकरण..!

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