Sunday, March 1, 2026
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उत्तर प्रदेश में बदहाल प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था,योगी जी बयानों से बन रहे हैं वीर-कांग्रेस

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उत्तर प्रदेश में बदहाल है प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था, मुख्यमंत्री जी बयानों से बन रहे हैं वीर। 2017 के पहले ही नहीं वरन सभी गैर कांग्रेसी सरकारों ने बर्बाद किया प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था। योगी राज में गरीब बच्चों के जूते मोजे के वितरण, शिक्षक भर्ती, मिड-डे मील में व्यापक भ्रष्टाचार, कहीं नमक रोटी तो कहीं मरा हुआ चूहा। योगी जी बतायें कि महंगाई के इस दौर में 1200 रुपये में कैसे आयेंगे यूनिफार्म, जूता, मोजा, स्वैटर, स्कूल बैग एवं अन्य जरूरी सामान।प्रदेश के लगभग एक दर्जन मुख्यमंत्री भाजपा, जनसंघ एवं उनके समर्थन से बने, योगी जी का किस पर है निशाना….?

डा0 उमा शंकर पाण्डेय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की गैर कांग्रेसी सरकारों में प्राथमिक शिक्षा का स्तर दिनों दिन गिरता गया और प्राईवेट स्कूलों की भीड़ बढ़ती गयी। निजी विद्यालयों को सरकारी संरक्षण मिलता रहा और सरकारी विद्यालय भ्रष्टाचार एवं र्दुव्यवस्था के शिकार होतेे चले गये। कांग्रेस की सरकारों के दौर में जहां प्राथमिक शिक्षा की प्रत्येक कक्षा में एक शिक्षक की नियुक्ति होती थी वहीं आज तमाम विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहें हैं। किसी-किसी विद्यालय में एक शिक्षक एक ही कमरें में, एक साथ दो कक्षाओं के विद्यार्थियों का पढाने को मजबूर हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री जी द्वारा ‘‘वर्ष 2017 के पहले 70 फीसदी बच्चों के नंगे पैर स्कूल जाने’’ की बात उनका बड़बोलापन है, और वह बयानों से वीर बनने का प्रयास कर रहें हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता डॉ0 उमा शंकर पाण्डेय ने कहा कि लखनऊ में शिक्षकों के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने तमाम बड़ी-बड़ी बातें की लेकिन जमीनी हकीकत उनके बयानों से भिन्न है। प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी है। आदर्श व्यवस्था के तहत एक शिक्षक के ऊपर 40 से अधिक बच्चों का बोझ नहीं होना चाहिए, बच्चों की संख्या 121 से 200 के बीच होने पर 5 शिक्षक बच्चों को पढ़ा सकते हैं। लेकिन शिक्षकों की व्यापक कमी के चलते यह महज एक सपना बनकर रह गया है। योगी सरकार ने बीच-बीच में शिक्षा के बजट में व्यापक कटौतियां भी की, वर्ष 2020-21 के शिक्षा बजट में 191 करोड़ रूपये की बड़ी कटौती की गयी थी। योगी सरकार द्वारा शिक्षकों की व्यापक कमी की हो रही आलोचनाओं के दबाव में आयोजित 69 हजार शिक्षकों की भर्ती भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी, और इससे सम्बन्धित तमाम मामले न्यायलय में विचाराधीन हैं।

योगी जी के कार्यकाल के दौरान आयी एनसएओ ( नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ) की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश देश में सबसे कम साक्षरता वाले राज्यों में नीचे से दूसरे स्थान पर है जबकि मध्य प्रदेश नीचे से पहले स्थान पर है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भी उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर की स्थिति कमोबेश यही थी। तब देश में साक्षरता की दृष्टि से यह प्रदेश 29 वें स्थान पर था। कांग्रेस पार्टी ने पूरे देश में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए 1988 में ‘‘समग्र साक्षरता अभियान’’ की शुरूआत की थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग एक दर्जन मुख्यमंत्री भाजपा, जनसंघ, अथवा इनके समर्थन से बने, इसके बावजूद मुख्यमंत्री जी का यह बयान अपने ही पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों पर कटाक्ष प्रतीत होता है।  उन्होंने कहा कि योगी जी ने प्रत्येक बच्चे को यूनिफार्म, जूता, मोजा, स्वैटर, स्कूल बैग एवं अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए 1200 रुपये आवंटित किये हैं वह बताएं कि महंगाई के इस दौर में यह कैसे संभव है।

प्रवक्ता डा0 उमा शंकर पाण्डेय ने आगे कहा कि योगी जी के शासनकाल में प्राथमिक शिक्षा, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी है। जनपद मिर्जापुर के एक प्राथमिक सरकारी विद्यालय में मिड-डे मील के नाम पर बच्चों के नमक और रोटी खाने की खबर वॉयरल हुई थी। वहीं जनपद मुजफ्फरनगर में मीड-डे मील में मरा हुआ चूहा मिला था। जनपद सोनभद्र में एक लीटर दूध में बाल्टी भर पानी मिलाकर बच्चों को परोसने का मामले सामने आया। कई प्राईमरी स्कूल ऐसीे खबरों में छाये रहे जहां परिसर में गाय बंधी है अथवा कहीं चूड़ी की दुकान सजी हुई है। ऐसी सैकड़ों दुखद और शर्मनाक घटनायें समय-समय पर इस सरकार को आइना दिखाती रहीं हैं। योगी सरकार में प्राथमिक शिक्षा विभाग ने भ्रष्टाचार के अनेकों कीर्तिमान स्थापित किये। जिसमें सबसे शर्मनाक बच्चों के जूते मोजे के वितरण में करोड़ों के घोटाले का मामला सुर्खियों में छाया था। उन्होंने प्रष्न करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी किसी एक न्याय पंचायत का नाम बतायें जहां पर स्थित सभी प्राथमिक विद्यालय मानकों के अनुसार संचालित किये जा रहें हैं।