उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में किसका होगा राजतिलक ….!

राज्यसभा चुनाव भाजपा के 7 व सपा के 3 उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे,11 वीं सीट पर होगी टक्कर।सपा से जयंत,आज़मी व आलोक रंजन का नाम लगभग तय।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक सीट के लिए 37 विधायकों का वोट जरूरी है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व की दृष्टि से 11 में से 7 सीटों पर भाजपा की जीत पक्की है। वहीं सपा गठबंधन भी 3 सीटें जीत लेगा। आखिरी एक सीट के लिए गुणा-गणित तेज होगी। अपने कोटे की जीत के बाद भाजपा और सपा दोनों ही गठबंधन के पास 14-14 अतिरिक्त विधायक बचेंगे। बाकी दलों का साथ, सेंधमारी, क्रॉसवोटिंग के खेल में जो आगे रहेगा, वह 11वीं सीट जीत लेगा। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा गठबंधन के 273,सपा गठबंधन के 125 (सपा-111, रालोद-8 व सुभासपा-6),कांग्रेस व जनसत्ता दल(लोकतांत्रिक) के 2-2 व बसपा का एक विधायक है।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और फिर विधान परिषद के चुनाव के बाद अब राज्यसभा चुनाव ने दस्तक दे दिया है। उत्तर प्रदेश में कुल 11 राज्यसभा सीटों के लिए अगले महीने 10 जून को चुनाव होना है। एक बार फिर से मुख्य लड़ाई के केंद्र में भाजपा और समाजवादी पार्टी ही हैं। हालांकि भाजपा गठबंधन का पलड़ा अधिक वजनदार है।


उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के जिन 11 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें सबसे ज्यादा 5 भाजपा के ही हैं। बाकी 3 सपा, 2 बसपा और 1 कांग्रेस के सांसद हैं।उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 36-37 विधायकों का वोट जरूरी है। ऐसे में 11 में से 7 सीटों पर बीजेपी की जीत तय है। वहीं सपा गठबंधन भी 3 सीटें जीत लेगा। आखिरी एक सीट के लिए जोड़-तोड़ व गुणा-गणित तेज होगी। अपने कोटे की जीत के बाद भाजपा और सपा दोनों ही गठबंधन के पास 14-14 अतिरिक्त विधायक बचेंगे। बाकी दलों का साथ, सेंधमारी व क्रॉसवोटिंग के खेल में जो आगे रहेगा, वह 11वीं सीट जीत लेगा।वैसे कांग्रेस सपा को ही समर्थन दे सकती है,वही बसपा व जनसत्ता दल का भाजपा के साथ जाना तय है।


उत्तर प्रदेश से 4 जुलाई को जिन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें भाजपा के शिव प्रताप शुक्ला, जयप्रकाश निषाद, संजय सेठ, जफर उल इस्लाम, सुरेंद्र सिंह नागर हैं। 6 वर्ष पूर्व संजय सेठ,ज़फ़र उल इस्लाम व सुरेन्द्र सिंह नागर समाजवादी पार्टी के कोटे से राज्यसभा गए थे,जो बीच में सपा छोड़ भाजपा में चले गए।ये तीनों इन्हीं से रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव में राज्यसभा में गए। वहीं समाजवादी पार्टी की तरफ से वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह, सुखराम सिंह यादव और विश्वम्भर प्रसाद निषाद हैं। बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ के अलावा कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस और बसपा अपने उम्मीदवार को जीत नहीं दिला पाएंगी।भाजपा से शिवप्रताप शुक्ला,सुरेन्द्र सिंह नागर व संजय सेठ का पुनः राज्यसभा जाना लगभग तय हैं।सपा से जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है,उनको पुनः मौका नहीं मिलेगा।सपा सूत्रों से पता चला है कि सपा से राज्यसभा के लिए तीनों नाम लगभग तय हैं।जिसमें महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व महाराष्ट्र विधानसभा में मानखुर्द-शिवाजीनगर से सपा विधायक अबू हासिम आज़मी, पूर्व नौकरशाह आलोक रंजन व रालोद प्रमुख जयंत चौधरी का नाम चर्चा में है।ज्यादातर आज़मी व आलोक रंजन के नाम पर सहमत नहीं हैं।सामाजिक न्याय के पक्षधर एक समूह ने सपा पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लौटनराम निषाद का नाम प्रस्तावित किये हैं।कुछ लोगों की राय है कि रामशंकर विद्यार्थी(राजभर) व सर्वेश अम्बेडकर जैसे वैचारिक लोगों को राज्यसभा में भेजना चाहिए।आलोक रंजन से सपा के वोटबैंक में न तो कोई वृद्धि होगी और न राज्यसभा में मजबूती से पार्टी नीति का पक्ष ही रख पाएंगे।अबू हासिम आज़मी जब खुद विधायक हैं तो राज्यसभा में भेजने का कोई औचित्य नहीं है।

अप्रत्यक्ष रूप से होता है राज्यसभा सदस्यों का चुनाव
जहां लोकसभा के लिए हर पांच साल में आम चुनाव होते हैं, वहीं राज्‍यसभा के लिए हर दो साल में चुनाव कराया जाता है। लोकसभा सांसद चुनने के लिए जनता सीधे वोट डालती है, मगर राज्‍यसभा सांसद का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से नहीं होता। जनता की ओर से चुने गए विधायक के जरिए राज्‍यसभा सदस्‍य चुने जाते हैं। संविधान के अनुसार राज्‍यसभा में अधिकतम 250 सदस्‍य हो सकते हैं, जिनमें से 238 का चुनाव होता है और बाकी 12 राष्‍ट्रपति की ओर से नामित किए जाते हैं। राज्‍यसभा के हर सदस्‍य का कार्यकाल 6 साल का होता है।

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