सच्चे जननेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी

श्याम कुमार

सीधासादा देदीप्यमान चेहरा तथा अत्यंत योग्य, ईमानदार, चरित्रवान व कठोर परिश्रमशील व्यक्तित्व! उपेक्षित होने के बावजूद पार्टी के प्रति पूर्णरूपेण समर्पित। यह पहचान है उस सच्चे जननेता की, जिसका नाम लक्ष्मीकांत वाजपेयी है, जो भारतीय जनता पार्टी का एक बहुमूल्य रत्न है।वर्ष २०१२ से १६के बीच लगभग चार वर्ष तक लक्ष्मीकांत वाजपेयी जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे तो उनकी सादगी एवं अपेक्षित अनुशासन चर्चा का विषय हो गया था। उन्हें लोगों ने स्कूटर की सवारी करते देखा तो विस्मय हुआ था। उस समय मैंने उनका स्कूटरवाला चित्र खींचा था और उन्हें भेंट किया था।उन्होंने मितव्यवयिता की थी और फालतू वाहनों को भाजपा के केन्द्रीय मुख्यालय में दिल्ली भेज दिया था। इससे प्रदेश कार्यालय में कुछ लोग नाराज हुए थे।


मेरठ निवासी लक्ष्मीकांत वाजपेयी जब प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे, उस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बहुत दुर्दशापूर्ण स्थिति में थी। मायावती का साथ देकर पार्टी ने अपनी दुर्गति कर डाली थी।अनुशासनहीनता अलग पार्टी का विनाश कर रही थी। परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश में पार्टी चौथे नंबर पर पहुंच गई थी। उसका उसी तरह सफाया हो रहा था, जैसी दुर्दशापूर्ण स्थिति आज कांग्रेस पार्टी की है।सुंदरसिंह भंडारी भारतीय जनता पार्टी के अतियोग्य नेतृत्वकर्ताओं में थे। उन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रभारी बनाया था। वह सादगी और आदर्श से परिपूर्ण थे तथा कड़ा अनुशासन बनाए रखते थे। गलती करने पर प्रदेश के बड़े-बड़े नेताओं को झिड़क देते थे।


सुन्दरसिंह भंडारी के देहावसान के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा गुटबंदी का शिकार होने लगी। उस समय पार्टी के कुछ लोगों ने पार्टी के ही दूसरे लोगों को नीचा दिखाने के लिए कतिपय पत्रकारों को भी अपने गुट में शामिल कर लिया था।ऐसी विषम स्थिति में प्रदेश में पार्टी की बागडोर लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने संभाली थी।लक्ष्मीकांत वाजपेयी प्रसिद्ध वैद्य हैं तथा उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनते ही यहां भाजपा का इलाज शुरू कर दिया था। उन्होंने दिनरात परिश्रम कर पार्टी की ढीली चूलें ठीक कीं और उसमें जान फूंकने लगे।


प्रदेश में हताशा से ग्रस्त भाजपाई आरामतलबी के शिकार हो गए थे तथा सड़कों पर उतरना भूल चुके थे। ऐसी स्थिति में लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने पार्टी को जीवंत करने के लिए जो कड़ा परिश्रम किया, उसकी उस समय की पत्रकार बिरादरी साक्षी है।उन्होंने भाजपाइयों को तरह-तरह के धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सड़क पर उतारा और जोश भरा। प्रदेश में जिस पार्टी को जनता भूलने लगी थी, उसका नाम फिर गूंजने लगा। उत्तर प्रदेश में भाजपा पुनः जीवंत हो गई।


लक्ष्मीकांत वाजपेयी दारुलशफा में सामने नीचे वाले आवास में रहते थे। जब वह वहां मौजूद होते थे तो कोई भी व्यक्ति किसी भी समय उनसे मिल सकता था।उससे पहले लक्ष्मीकांत वाजपेयी जब भाजपा-बसपा की गठबंधन सरकार में राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) थे तो उनका सख्त आदेश था कि किसी भी छोटे से छोटे व्यक्ति को उनके पास आने से नहीं रोका जाय। हर व्यक्ति उनके पास पहुंचकर निःसंकोच अपनी समस्या का उल्लेख कर सकता था।पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष बनने पर उन्होंने यहां वही व्यवस्था लागू की। उन्होंने न केवल पार्टी के लोगों की, बल्कि आम लोगों की भी फरियाद सुनने की व्यवस्था की थी। यह व्यवस्था उन्होंने प्रदेशभर में पार्टी की इकाईयों में भी लागू की थी।


लक्ष्मीकांत वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के अतिलोकप्रिय नेता हैं तथा वह मेरठ से चार बार विधायक निर्वाचित हुए। उनके मार्ग में अनेक प्रकार के रोड़े अटकाए गए।यह उनकी भारी लोकप्रियता ही है कि लगातार मांग की जा रही है कि उन्हें पुनः मुख्यधारा में सक्रिय किया जाय। एक समय तो लोगों ने उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की थी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योग्य व ईमानदार लोगों को महत्व देते हैं, इसलिए आशा की जा रही थी कि वह लक्ष्मीकांत वाजपेयी को सांसद बनाकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देंगे, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ।जब लक्ष्मीकांत वाजपेयी प्रदेश अध्यक्ष थे तो वह वरिष्ठ पत्रकारों का बड़ा सम्मान करते थे। पार्टी के विभिन्न पदों पर आसीन लोगों का भी उस समय वरिष्ठ पत्रकारों के साथ बड़ा सम्मानपूर्ण व्यवहार रहता था। इस समय पार्टी में वरिष्ठ पत्रकारों के प्रति उस शिष्टाचार का अभाव देखा जा रहा है। लक्ष्मीकांत वाजपेयी होली एवं दीपावली पर पत्रकारों को, विशेष रूप से वरिष्ठ पत्रकारों को, बड़े सम्मान के साथ भेंट भेजा करते थे। अब उस भावना का अभाव मिलता है।


लक्ष्मीकांत वाजपेयी की एक विशेषता यह भी थी कि वह प्रायः पत्रकारवार्ताएं किया करते थे, जिससे अखबारों में पार्टी की सक्रियता प्रकट होती रहती थी। वह पत्रकारवार्ता के बाद पत्रकारों के लिए दोपहरभोज की व्यवस्था रखते थे। वह भोज बहुत सामान्य, किन्तु आत्मीयतापूर्ण वातावरण में हुआ करता था। लक्ष्मीकांत वाजपेयी पूरे समय मौजूद रहकर स्वयं व्यवस्था पर नजर रखते थे।हाल में भाजपा-कार्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम था, जिसके बाद दोपहरभोज रखा गया था। वहां एक कोने में गुलाबजामुन की व्यवस्था थी। एक व्यक्ति पत्रकारों को एक-एक गुलाबजामुन दे रहा था। एक पत्रकार ने जब दो गुलाबजामुन देने को कहा तो उसने झिड़ककर देने से मना कर दिया था। इस पर पत्रकार ने वह गुलाबजामुन भी वापस कर दिया था। वह दृश्य देखकर मुझे लक्ष्मीकांत वाजपेयी का आत्मीयतापूर्ण दोपहरभोज याद आ गया था।गत दिवस अमित शाह के कार्यक्रम में भी पार्टी के एक व्यक्ति ने वरिष्ठ पत्रकार से अनुचित व्यवहार किया था।

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