मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR के बाद भी वोटर लिस्ट में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कई जगह एक ही व्यक्ति के नाम पर कई-कई वोट दर्ज हैं। अखिलेश यादव ने इसे छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि “बहुत मोटी गड़बड़ी” बताते हुए भाजपा पर चुनाव में बेईमानी करने और चुनाव आयोग पर उसके इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। आखिर मतदाता सूची की इन कथित खामियों पर चुनाव आयोग और भाजपा का क्या रुख है?
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि मतदाता सूची के एसआईआर के बाद भी वोटरलिस्ट में गड़बड़िया हैं। फर्जी वोट हैं। कई जगह एक-एक व्यक्ति के दो-दो तीन-तीन और चार-चार और 10 वोट हैं। चुनाव आयोग ने भी इन गड़बिड़यों को स्वीकार किया है। आयोग कह रहा है कि छोटी-मोटी गलती है। यह छोटी-मोटी नहीं, बहुत मोटी गड़बड़ी है। पूर्व मंत्री विद्या चौधरी के आवास पर पहुंचकर उनका हालचाल जानने के बाद मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा देश जानता है कि जब भाजपा हारने लगती है तो बेईमानी और चोरी करती है। भाजपा चुनाव आयोग की मिलीभगत से बेईमानी करती है। चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम करता है। अगर हम सब विपक्ष और आम जनता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं तो भाजपा को क्यों दर्द होता है? भाजपा क्यों सामने आती है?
मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावों में वोटों की लूट और बेइमानी पर अधिकारियों पर कार्रवाई होना चाहिए। समाजवादी पार्टी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों उपचुनाव में वोटों की चोरी और धांधली को लेकर चुनाव आयोग से सबूत के साथ शिकायतं की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है। चुनाव आयोग को भाजपा के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए। निष्पक्ष काम करना चाहिए। निष्पक्ष दिखना चाहिए। आज पूरे देश में चुनाव आयोग की विश्वनीयता और कार्यप्रणाली पर सवाल क्यों खड़े हो गये हैं?



