उत्तर प्रदेश कारागार विभाग में डिप्टी जेलर के पदों की कमी को देखते हुए महानिदेशक कारागार ने एक सराहनीय और महत्वपूर्ण पहल की है। अब जेल अधीक्षक आवश्यकता के अनुसार हेड वार्डरों से डिप्टी जेलर स्तर के कार्य ले सकेंगे। इसके लिए सहायक के रूप में तैनात हेड वार्डरों को आवश्यक प्रशिक्षण दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। इस फैसले से जेल प्रशासन के कार्यों में तेजी आने के साथ-साथ व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राकेश यादव
लखनऊ। अब जेल अधीक्षक जेलों में तैनात हेड वार्डरों से डिप्टी जेलर का काम ले सकते है। प्रोन्नति प्रक्रिया के विलंबित होने और विभाग में सृजित पदो के अनुपात में डिप्टी जेलरों की संख्या कम होने की वजह यह फैसला महानिदेशक कारागार पीसी मीणा ने लिया है। महानिदेशक कारागार ने प्रदेश के समस्त वरिष्ठ अधीक्षक और अधीक्षकों को पत्र भेजकर इस निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। महानिदेशक कारागार की इस सराहनीय पहल से जेलों के संचालन में मदद मिलने के साथ ही जेलों की सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद हो सकेगी।
मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश की जेलों में सृजित पदों के अनुपात में डिप्टी जेलरों की संख्या काफी कम है। बताया गया है कि विभाग में बीते दो वर्ष से हेड वार्डर से डिप्टी जेलर पद पर प्रोन्नत प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। इससे विभाग में डिप्टी जेलरों की संख्या काफी कम हो गई है। जिन जेलों में आठ डिप्टी जेलर होने चाहिए वहां पर तीन चार और जहां पर चार होनी चाहिए वहां पर एक दो डिप्टी जेलर से काम चलाया जा रहा है। डिप्टी जेलरों की संख्या कम होने से जेलों का कार्य बाधित होने के साथ जेलों के संचालन में अधीक्षकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इन व्यवधानों को देखते हुए महानिदेशक कारागार पीसी मीणा ने एक सराहनीय पहल की है। इस पहल के तहत बीती 20 अगस्त को प्रदेश के समस्त वरिष्ठ एवं जेल अधीक्षकों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि डिप्टी जेलरों की संख्या कम होने की वजह से अधीक्षक हेड वार्डर से डिप्टी जेलर का काम ले सकते है। उन्होंने अपने जारी निर्देश में कहा है कि विभाग में डिप्टी जेलर के 50 प्रतिशत पद खाली होने पर बंदियों के प्रवेश और रिहाई के अतिरिक्त अधीक्षक किसी हेड वार्डर को डिप्टी जेलर की समस्त ड्यूटियों या कोई ड्यूटी करने के लिए अधिकृत कर सकता है। उन्होंने कहा है कि सहायक के रूप में लगाए गए हेड वार्डरों को डिप्टी जेलर पद के प्रशासनिक, लिपिकीय, स्टोर कीपिंग आदि के कार्यों में अपने स्तर पर प्रशिक्षित कराया जाना सुनिश्चित करेंगे।
बगैर प्रोन्नति पाए सेवानिवृत हो रहे हेड वार्डर
प्रदेश के कारागार विभाग में वर्ष 2024 से हेड वार्डर से डिप्टी जेलर पद पर प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। प्रोन्नत नहीं होने से दर्जनों की संख्या में हेड वार्डर सेवानिवृत हो गए है। सूत्रों का कहना है उच्च न्यायालय इलाहाबाद और लखनऊ के प्रोन्नत पर रोक लगाए जाने की वजह से इस संवर्ग की डीपीसी नहीं हो पाई है। उधर विभागीय हेड वार्डरों का आरोप है कि अधिकारियों के मनमानी की वजह से हेड वार्डर प्रोन्नति नहीं हो पा रही है। प्रोन्नत नहीं होने से विभाग में डिप्टी जेलरों की संख्या काफी कम हो गई है। इस कमी को दूर करने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।




