मुख्यमंत्री ने मिड-डे मील रसोइयों को दिया रक्षाबन्धन का उपहार

  • मुख्यमंत्री ने पी0एम0 पोषण योजना के अन्तर्गत कार्यरत 3.53 लाख से अधिक मिड-डे मील रसोइयों को रक्षाबन्धन का उपहार दिया।
  • मुख्यमंत्री ने रसोइयों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक, परिधान किट एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड प्रदान कर सम्मानित किया।
  • रसोइयों का मानदेय 2,000 रु0 से बढ़ाकर 3,000 रु0 प्रतिमाह किया गया, रसोइयों एवं उनके परिवार को 05 लाख रु0 प्रतिवर्ष तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा।
  • दुर्घटना आदि की स्थिति में 02 लाख रु0 का सुरक्षा कवच, ड्रेस की धनराशि 500 रु0 से बढ़ाकर 1,000 रु0 बच्चों का स्वस्थ बचपन ही समर्थ प्रदेश और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला।
  • रसोइया केवल विद्यालय में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का कार्य नहीं करतीं, बल्कि वह देश के बचपन को स्वस्थ और समर्थ बनाने के महत्वपूर्ण अभियान की सहभागी।
  • रसोइया जिस विद्यालय में कार्य करती, वहां रसोईघर की स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को समय से पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दें।
  • पी0एम0 पोषण योजना के अन्तर्गत निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिलेट, मौसमी फल और स्थानीय उत्पादों को भी योजना में प्राथमिकता दी जा रही।
  • भोजन की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए, बाहरी व्यक्तियों के अनावश्यक प्रवेश पर रोक, स्वच्छ रसोई तथा सुरक्षित भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • आज ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया गया।
  • प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास में बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा, निपुण भारत अभियान के माध्यम से बच्चों में भाषा, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के प्रति समझ विकसित हो रही।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रसोइया केवल विद्यालय में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का कार्य नहीं करतीं, बल्कि वह देश के बचपन को स्वस्थ और समर्थ बनाने के महत्वपूर्ण अभियान की सहभागी हैं। स्वस्थ एवं समर्थ बचपन विकसित भारत की आधारशिला बनेगा। पी0एम0 पोषण योजना के माध्यम से लाखों बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में रसोइयों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आज यहां पी0एम0 पोषण योजना के अन्तर्गत कार्यरत मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने रसोइयों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक, परिधान किट एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।


मुख्यमंत्री ने पी0एम0 पोषण योजना के अन्तर्गत कार्यरत मिड-डे मील रसोइयों का मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने, दुर्घटना की स्थिति में 02 लाख रुपये की सहायता का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने, रसोइयों एवं उनके परिवार को प्रतिवर्ष 05 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा की निःशुल्क सुविधा से आच्छादित करने तथा ड्रेस के लिए मिलने वाली धनराशि 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री जी के समक्ष प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबन्धक दीपेश राज ने रसोइयों के 02 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा से सम्बन्धित एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले रसोइयों को 1,000 रुपये मानदेय के रूप में प्राप्त होता था। जिसे बढ़ाकर 2,000 रुपये किया गया था। अब इस मानदेय में और वृद्धि करते हुए 3,000 रुपये किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जनधन खातों और डी0बी0टी0 व्यवस्था के माध्यम से सरकारी योजनाओं की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और गरीब तथा वंचित वर्ग को उसका अधिकार सीधे प्राप्त हो रहा है।


रसोइयों को अब सामाजिक सुरक्षा की गारण्टी भी प्राप्त होगी। भारतीय स्टेट बैंक के साथ किए गए समझौते के तहत दुर्घटना की स्थिति में इनके परिवार को 02 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध होगी। इसी प्रकार रसोइया और उसके परिवार के सदस्य प्रतिवर्ष 05 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकेंगे। अब किसी रसोइया या उसके परिवार के सदस्य के बीमार होने पर उपचार के लिए आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा और निर्धारित प्रक्रिया के अन्तर्गत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी उपचार की सुविधा प्राप्त होगी। धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए प्रधानमंत्री जी ने एल0पी0जी0 कनेक्शन की सुविधा प्रदान की है। बच्चों के पोषण के साथ रसोइयों के स्वास्थ्य की चिंता भी सरकार की जिम्मेदारी है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रसोइया जिस विद्यालय में कार्य करती हैं, वहां रसोईघर की स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को समय से पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दें। पी0एम0 पोषण योजना के अन्तर्गत निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिलेट, मौसमी फल और स्थानीय उत्पादों को भी योजना में प्राथमिकता दी जा रही है। भोजन की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। बाहरी व्यक्तियों के अनावश्यक प्रवेश पर रोक, स्वच्छ रसोई तथा सुरक्षित भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।


अब रसोइयों को मानदेय वृद्धि, 02 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर, 05 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और ड्रेस के लिए 1,000 रुपये की धनराशि आदि सुविधाओं का एक साथ लाभ मिल रहा है। सरकार की अपेक्षा है कि रसोइया बहनें विद्यालयों में स्वच्छता और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था को और मजबूत करें तथा बच्चों के स्वस्थ भविष्य के निर्माण में अपना योगदान देती रहें। प्रदेश सरकार रसोइयों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरन्तर कार्य करती रहेगी। बच्चों का स्वस्थ बचपन ही समर्थ प्रदेश और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है तथा इस संकल्प को पूरा करने में रसोइयों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है।


कोरोना कालखण्ड में प्रदेश में वापस लौटे कामगारों और श्रमिकों के लिए भोजन की व्यवस्था में भी रसोइयों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक करोड़ से अधिक लोगों के लिए विभिन्न स्थानों पर भोजन की व्यवस्था में रसोइयों की भूमिका उल्लेखनीय रही। महाकुम्भ-2025 के दौरान प्रयागराज के आसपास के जनपदों में बनाए गए होल्डिंग एरिया में भी बेसिक शिक्षा परिषद की रसोइयों ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया। सरकार ने कोरोना कालखण्ड में निराश्रित हुए बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना प्रारम्भ की। सरकार का प्रयास है कि जिन बच्चों और परिवारों को पहले किसी ने नहीं पूछा, उन्हें भी योजनाओं का लाभ मिले और उनका भविष्य सुरक्षित हो।


डबल इंजन की सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए निरन्तर कार्य कर रही है। रसोइया, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, आशा वर्कर, ग्राम चौकीदार, होमगार्ड और पी0आर0डी0 जवान सहित विभिन्न वर्गों के मानदेय में वृद्धि के साथ उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल मानदेय बढ़ाना नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा की गारण्टी उपलब्ध कराना है।


वर्ष 2017 से पूर्व बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति किसी से छिपी नहीं थी। विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं का अभाव था, बच्चों को निःशुल्क यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग और पुस्तकें समय से उपलब्ध नहीं होती थीं। आज ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया गया है। विद्यालयों में फर्श, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, पेयजल, रसोईघर, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और पुस्तकालय जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। प्रदेश के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, पुस्तकालय, किचन, पेयजल, शौचालय और अन्य अवस्थापना सुविधाओं के विकास के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी प्राचीन काल से ही ज्ञान की आराधना की भूमि रही है। उत्तर प्रदेश के शिक्षक देश के विभिन्न राज्यों में अपने ज्ञान का प्रसार कर रहे हैं। पिछली सरकारों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया। आज प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास में बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है। निपुण भारत अभियान के माध्यम से बच्चों में भाषा, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के प्रति समझ विकसित हो रही है। बाल वाटिका और आंगनबाड़ी स्तर से ही बच्चों को सीखने की बेहतर आधारभूमि उपलब्ध कराई जा रही है। गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, पुस्तकें और स्वेटर की व्यवस्था की गई है। अब कोई गरीब बच्चा भीषण गर्मी में नंगे पैर या सर्दी में बिना स्वेटर के विद्यालय जाने को मजबूर नहीं होगा।


प्रदेश में ड्रॉपआउट दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों को शिक्षा के साथ एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों से जोड़ने, विद्यालयों की अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने तथा निपुण लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में निरन्तर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में हुए इन सुधारों का उद्देश्य केवल विद्यालयों की तस्वीर बदलना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को बदलना है। प्रदेश में श्रमिकों के बच्चों के लिए राज्य के 18 मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 18 हजार बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का विस्तार सभी 825 विकासखण्डों तक करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है और इन विद्यालयों को आठवीं के बाद 12वीं तक संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। इन विद्यालयों में आई0सी0टी0 लैब जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गम्भीर रूप से दिव्यांग बच्चों को स्कॉर्ट अलाउंस, दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेण्ड तथा दिव्यांग बच्चों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी और हियरिंग एड जैसे सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहली से आठवीं कक्षा तक के पूर्ण दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल पाठ्य पुस्तकें तथा अल्पदृष्टि बच्चों को इनलार्ज प्रिन्ट की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने का कार्य भी किया जा रहा है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 10 हजार से अधिक स्पेशल एजुकेटर तैनात किए गए हैं।


माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से पुराने और जर्जर विद्यालय भवनों को नए भवनों में परिवर्तित करने का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में नकलविहीन परीक्षा व्यवस्था स्थापित की गई है। पहले परीक्षाओं और परिणामों में कई महीने लग जाते थे, जबकि अब निर्धारित समयसीमा में परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह नई शिक्षा व्यवस्था की कार्यकुशलता और गुणवत्ता का प्रमाण है। उत्तर प्रदेश आज शिक्षा, सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। 2017 से पूर्व प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, लेकिन आज प्रदेश दंगा और कर्फ्यू से मुक्त होकर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। आज बेटियां और महिलाएं सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ रही हैं, विद्यालय बेहतर हुए हैं, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है तथा प्रदेश की पहचान देश-दुनिया में सम्मान के साथ हो रही है।


उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में रसोइयों की मेहनत और सेवा का सम्मान करते हुए उनके मानदेय में वृद्धि के साथ स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। जिस प्रकार माताएं अपने घर के बच्चों के लिए भोजन तैयार कर उनकी चिंता करती हैं, उसी प्रकार विद्यालयों में रसोइयां सैकड़ों बच्चों की सेवा करती हैं। रसोइया अपने विद्यालयों में स्वच्छता और पौष्टिक भोजन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें।


बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व और जनकल्याणकारी मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों की शिक्षा, शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य तथा रसोइयों सहित विभाग के प्रत्येक कार्मिक के हितों के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। वर्ष 2017 से पूर्व बेसिक शिक्षा विभाग की व्यवस्थाएं चरमराई हुई थीं, जबकि आज विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं, शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुआ है। पी0एम0 पोषण योजना पर आधारित लघु फिल्म के माध्यम से योजना की उपलब्धियों, पौष्टिक भोजन की विविधता, रसोइयों की भूमिका, स्वच्छता, किचन गार्डन, मातृ समितियों तथा अनुश्रवण व्यवस्था की जानकारी दी गई। इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य इन्जी0 अवनीश कुमार सिंह, रामचन्द्र प्रधान, विधायक नीरज बोरा, सलाहकार मुख्यमंत्री अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबन्धक दीपेश राज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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