मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद के संचालक मण्डल की 172वीं बैठक की अध्यक्षता की।
किसानों के मेधावी पाल्यों के लिए संचालित मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
प्रदेश की मण्डियों का आधुनिकीकरण एवं पुनरुद्धार करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए, ताकि किसानों को बेहतर,
पारदर्शी एवं सुविधाजनक विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो सके।
बैठक में वर्ष 2026-27 के 3025.49 करोड़ रु0 के बजट सहित किसान कल्याण, कृषि विपणन एवं मण्डी व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
मण्डी स्थलों में पी0पी0पी0 मॉडल पर कृषि उपज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाए, इस सम्बन्ध में नियमों को अधिक व्यावहारिक एवं निवेश अनुकूल बनाया जाए।
अधिकाधिक मण्डियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से अधिकाधिक किसानों को जोड़ने, प्रत्येक जनपद में ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मण्डी समितियों की आय वर्ष 2024-25 के 1991.33 करोड़ रु0 से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2305.80 करोड़ रु0 पहुंची, 15.79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसानों के मेधावी पाल्यों के लिए संचालित मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके। प्रदेश की मण्डियों का आधुनिकीकरण एवं पुनरुद्धार करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए, ताकि किसानों को बेहतर, पारदर्शी एवं सुविधाजनक विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो सके। मण्डियों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था सहित सभी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद के संचालक मण्डल की 172वीं बैठक की मुख्यमंत्री अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में वर्ष 2026-27 के 3025.49 करोड़ रुपये के बजट सहित किसान कल्याण, कृषि विपणन एवं मण्डी व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मण्डी स्थलों में पी0पी0पी0 मॉडल पर कृषि उपज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाए। इस सम्बन्ध में नियमों को अधिक व्यावहारिक एवं निवेश अनुकूल बनाया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य, मूल्य संवर्धन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री जी ने अधिकाधिक मण्डियों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से अधिकाधिक किसानों को जोड़ने तथा प्रत्येक जनपद में ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 का संशोधित आय-व्यय अनुमान तथा वर्ष 2026-27 का बजट अनुमोदित किया गया। वर्ष 2026-27 के लिए 2228.59 करोड़ रुपये की अनुमानित प्राप्तियों तथा 3025.49 करोड़ रुपये के व्यय प्रावधान को स्वीकृति प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रदेश की मण्डी समितियों की आय वर्ष 2024-25 के 1991.33 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2305.80 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जिससे 15.79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। बजट में मण्डी स्थलों के निर्माण एवं विस्तार, सम्पर्क मार्गों के निर्माण एवं मरम्मत, ग्रामीण हाट, किसान बाजार, गोवंश आश्रय स्थलों, छात्रावास निर्माण, मण्डी समितियों के लिए भूमि क्रय तथा अन्य विकास कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। पूर्व में स्वीकृत निर्माण कार्यों को गति देने के लिए 1212.02 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है।
संचालक मण्डल ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना तथा मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकाण्ड दुर्घटना सहायता योजना की अवधि 01 जुलाई 2025 से 30 जून, 2030 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। इन दोनों योजनाओं के संचालन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 30 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है, जिससे दुर्घटना अथवा खेत-खलिहान में अग्निकाण्ड जैसी परिस्थितियों में किसानों एवं उनके परिवारों को समयबद्ध आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।
बैठक में मूल्य समर्थन योजना
(पी0एस0एस0) के अन्तर्गत दलहन एवं तिलहन खरीद व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं को ब्याज मुक्त कार्यशील पूँजी उपलब्ध कराने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। परिषद के वित्तीय एवं प्रशासनिक विषयों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री जी ने विगत बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए, सभी किसान हितैषी एवं विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।



