सनातन परंपरा के अनुसार बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में पावन पंचकोशी का संकल्प। महादेव, माता मणिकर्णिका और बाबा काल भैरव सभी का मंगलमय करें, देश-प्रदेश की रक्षा करें। काशी की इस पावन माटी और यहाँ की जनता की सेवा ही मेरा परम धर्म है। धर्म और सेवा का यह संकल्प अनवरत जारी रहेगा।
प्रियंका गुप्ता
वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय पूर्व मंत्री ने आज बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में सनातन परंपरा के अनुसार पावन पंचकोशी का संकल्प लेकर यात्रा की। यात्रा के शुभारंभ से पूर्व मैदागीन स्थित बड़ा गणेश का आशीर्वाद लिया, फिर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के चरणों में हाजिरी लगाकर हर भय-बाधा से मुक्ति की प्रार्थना की। इसके पश्चात मणिकर्णिका घाट पर मणिकर्णिकेश्वर महादेव और उनके पास ही विराजमान शक्ति स्वरूपा माता मणिकर्णिका का दर्शन-पूजन किया।
साथ ही, भगवान विष्णु के चक्र द्वारा निर्मित पावन चक्रपुष्करिणी कुंड (मणिकर्णिका कुंड) का भी पूजन कर इस पावन परिक्रमा यात्रा को शुरू किया। उन्होने महादेव, माता मणिकर्णिका और बाबा काल भैरव से प्रार्थना की कि सभी की यात्रा मंगलमय करें, देश-प्रदेश की रक्षा करें।
मणिकर्णिका घाट से शुरू हुआ आस्था का कारवां अपने प्रथम पड़ाव श्कंदवाश् पहुँचा। काशी के सबसे प्राचीन और स्थापत्य कला के बेजोड़ प्रतीक श्री कर्दमेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अजय राय ने कहा कि यहाँ के कण-कण में रची-बसी भक्ति मन को अद्भुत ऊर्जा से भर देती है। इसके उपरान्त यात्रा का द्वितीय पड़ाव, ‘मां भीमचण्डी’ राजातालाब पर हुआ, जहां ‘मां भीमचण्डी’ का दर्शन पूजन किया।
Read Also :झूठी-साज़िश गढ़ रहे, फैलाएँ भ्रम-जाल
पंचकोशी परिक्रमा के मध्य में, वरुणा नदी के पावन तट पर स्थित तृतीय पड़ाव ‘रामेश्वर महादेव’ पहुँचने का सौभाग्य मिला। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम द्वारा स्थापित इस अलौकिक शिवलिंग का दर्शन कर मन तृप्त हो गया। धर्म और सेवा का यह संकल्प अनवरत जारी रहेगा।भक्ति और जनसंवाद का यह सफर आगे बढ़ते हुए अपने चतुर्थ पड़ाव ‘शिवपुर’ पहुँचा। कपिलेश्वर महादेव और पांचो पंडवा के दर्शन-पूजन किए।
अजय राय ने कहा कि यात्रा के दौरान क्षेत्र के देवतुल्य बुजुर्गों, नौजवान साथियों और संतों से मिलकर मिल रहा भरपूर आशीर्वाद ही मेरी असली पूंजी है। महादेव की असीम अनुकंपा से आज पंचकोशी परिक्रमा का विराम अपने अंतिम पड़ाव ‘कपिलधारा’ पर हुआ। कपिल महामुनी द्वारा स्थापित कपिलेश्वर महादेव के चरणों में वंदन कर इस कठिन लेकिन आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा को पूर्ण किया। काशी की इस पावन माटी और यहाँ की जनता की सेवा ही मेरा परम धर्म है।



