
रक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने 19 करोड़ रु0 की लागत से 02 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में निर्मित नौसेना शौर्य वाटिका का लोकार्पण किया। लखनऊ में नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन सम्मान व गौरव का क्षण,आने वाले समय में यह शौर्य वाटिका न केवल लखनऊ के लिए एक प्रेरणास्थल बनेगी, बल्कि एक टूरिस्ट हब के लखनऊ की पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उ0प्र0 तेजी से विकास केरास्ते पर अग्रसर, यहां की सुदृढ़ कानून व्यवस्था स्वयं में मिसाल। लखनऊ अब तहजीब व संस्कृति का शहर होने केसाथ-साथ राष्ट्रभक्ति व सैन्य गौरव का प्रतीक बन रहा। जो राष्ट्र अपनी सेनाओं का सम्मान करता, वही दुनिया में सम्मान प्राप्त करता,इस भाव के साथ मुख्यमंत्री जी ने शौर्य वाटिका के लिए प्राइम लोकेशन पर भूमि उपलब्ध करायी देश की नौसेना ’नभः स्पृशं दीप्तम्’ अर्थात ‘आकाश कीऊंचाइयों को छूने’ की विराट सोच की प्रतीक:-मुख्यमंत्री
जब सैनिक माइनस डिग्री तापमान, झुलसा देने वाली गर्मी तथा समुद्र की लहरों का मुकाबला करते हुए। देश की सीमाओं की रक्षा करता, तब 140 करोड़ भारतीय चैन की नींद सो पाते। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदान किये गये पंचप्रणों में सेना ववर्दीधारी बल के प्रति सम्मान का भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण। महत्वपूर्ण चौराहों पर सेना के निवृत्त टैंक रखे जाने चाहिए,इससे युवाओं के मन में भारतीय सेना जाने के प्रति एक भाव उत्पन्न होगा। नागरिकों का कर्तव्य है कि वह सैनिकांे के प्रति सम्मान का भाव रखें, इसी भावको अंगीकार करते हुए नौसेना की शौर्य वाटिका तथा म्यूजियम की स्थापना की गयी इस शौर्य वाटिका में लोगों को भारत की नौसेना के पराक्रम की जानकारी मिलेगी, यह जीवन की चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा देगा।
लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां जल सीमाओं के सजग प्रहरियों की वीरता, अदम्य साहस एवं आधुनिक तकनीकी दक्षता को समर्पित 19 करोड़ रुपये की लागत से 02 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में निर्मित नौसेना शौर्य वाटिका (नौसेना शौर्य संग्रहालय का द्वितीय चरण) का लोकार्पण किया। रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि लखनऊ में नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन सम्मान व गौरव का क्षण है। आने वाले समय में यह शौर्य वाटिका न केवल लखनऊ के लिए एक प्रेरणा स्थल बनेगी, बल्कि एक टूरिस्ट हब के लखनऊ की पहचान बनेगी। यह सभी चीजें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश की तस्वीर है। उत्तर प्रदेश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। लखनऊ अब तहजीब व संस्कृति का शहर होने के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति व सैन्य गौरव का भी प्रतीक बन रहा है। अब उत्तर प्रदेश बदल चुका है। आज यह ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ के लिए जाना जाता है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री जी के मजबूत नेतृत्व का परिणाम है। मुख्यमंत्री जी ने जिस प्रकार प्रदेश की कानून व्यवस्था को सम्भाला है, वह स्वयं में मिसाल हैै। उत्तर प्रदेश की जनता महसूस करती है कि प्रदेश अब लहलहा व जगमगा रहा है तथा तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले उत्तर प्रदेश की पहचान गुण्डाराज तथा बिगड़ी हुई कानून-व्यवस्था से होती थी। लोग भय के माहौल में जीते थे। निवेशक प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था के कारण निवेश करने से कतराते थे। प्रदेेश वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया के लिए जाना जाने लगा था।
रक्षा मंत्रीने कहा कि जब शौर्य वाटिका निर्माण प्रस्तावित हुआ था, तब मुख्यमंत्री जी ने अत्यन्त सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखायी। जो राष्ट्र अपनी सेनाओं का सम्मान करता है, वही दुनिया में सम्मान प्राप्त करता है। इस भाव के साथ मुख्यमंत्री जी ने शौर्य वाटिका के लिए प्राइम लोकेशन पर भूमि उपलब्ध करायी। रिकॉर्ड समय में इस कार्य को पूरा करवाने के लिए मुख्यमंत्री जी सराहना के पात्र हैं। आमतौर पर जब हम भारतीय नौसेना का नाम सुनते हैं, तो हमारे मन में समुद्र की लहरें, मुम्बई का गेटवे ऑफ इण्डिया, विशाखापट्टनम का बन्दरगाह और कोच्चि के जहाज का स्मरण होता है। आम धारणा के अनुसार नेवी का अस्तित्व समुद्री इलाकों तक ही सीमित है, तो फिर लखनऊ जैसे समुद्र से दूर स्थित शहर में शौर्य वाटिका आवश्यकता क्यों पड़ी। इसका जवाब देश के इतिहास व भूगोल की गहरी समझ में छिपा है।

रक्षा मंत्री जी ने कहा कि भूगोल के अनुसार भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है। एक ओर सीमाओं पर हमारे जवान खड़े रहते हैं, वहीं दूसरी ओर समुद्र में नौसेना उपस्थित रहती है। हिन्द महासागर से हमारी अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा व अन्य आवश्यकताएं जुड़ी हुई हैं। हिन्द महासागर की सुरक्षा करने वाले जवान पूरे भारत से आते हैं। नेवी पूरे देश के लिए एक एसेट है। इसकी ताकत नागरिकों के विश्वास व संकल्प से आती है। रक्षा मंत्री जी ने कहा कि गोमती नदी लखनऊ की जीवनधारा है। इस नदी के नाम पर हमारे देश में एक युद्धपोत भी है। इसे वर्ष 1988 में देश की नौसेना में शामिल किया गया था। जिस प्रकार गोमती नदी आगे चलकर गंगा जी में समाती है और इसके पश्चात गंगा सागर में पहुंचकर अनन्त समुद्र से जुड़ जाती है, उसी प्रकार आई0एन0एस0 गोमती ने हिन्द महासागर में जाकर लखनऊ को गौरवान्वित किया है। प्रत्येक जहाज के आगे उसका आधिकारिक चिन्ह ‘क्रेस्ट’ लगा होता है। आई0एन0एस0 गोमती के ‘क्रेस्ट’ पर लखनऊ का छतर मंजिल भी अंकित था। जब यह जहाज हिन्द महासागर में अपनी ताकत का प्रदर्शन करता था, उस समय इसकी पहचान सीधे-सीधे छतर मंजिल और गोमती नदी से जुड़ी थी। इसका तात्पर्य है कि गोमती नदी और लखनऊ का नाता नेवी के साथ लम्बे समय से रहा है। इसी अटूट बंधन का उत्सव मनाने के लिए आज नौसेना शौर्य वाटिका की शुरुआत की गयी है।
रक्षा मंत्री जी ने कहा कि इस पार्क में सब कुछ वास्तविक है। यहां असली युद्ध सामग्री है, जो कभी आई0एन0एस0 गोमती की शान थी। पोत के अन्दर जाने पर विशालकाय मिसाइल दिखेगी, जो दुश्मन के जहाजों पर सटीक वार करने में पूरी तरह से सक्षम है। इसके टारपीडो ट्यूूब पानी के अन्दर घात लगाकर बैठी पनडुब्बियों का सफाया कर सकते हैं। इसके रडार सैकड़ों किलोमीटर दूर से आते खतरे को पहले ही भांप लेते थे। मुख्य तोप की गर्जना सुनकर दुश्मन के होश उड़ जाते थे। इसके अलावा नेवी में प्रयोग होने वाले सर्विलांस एयरक्राफ्ट, मल्टीरोल हेलीकॉप्टर और टारपीडो आदि अब लखनऊ की धरती पर स्थापित हो चुके हैं। रक्षा मंत्री जी ने कहा कि यह पार्क कोई साधारण पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीवन्त प्रेरणा स्थल है। यह शौर्य वाटिका आने वाली पीढ़ियों को आजादी और सुरक्षा की कीमत बताएगी। ऐसे में यह शौर्य वाटिका हमें सोचने पर मजबूर करेगी कि सैनिकों की वजह से हमारी जिन्दगी सुरक्षित है। हमारी जिंदगी में उनका बहुत बड़ा योगदान है। सबसे पहली और आवश्यक चीज हमारी सुरक्षा होती है, जो हमारी सेनाएं हमें प्रदान कर रही हैं। इसी कारण हम यहां सुरक्षित वातावरण में त्यौहार मना पाते हैं, व्यापार कर पाते हैं और अपने बच्चों को ठीक से पढ़ा पाते हैं।
रक्षा मंत्री जी ने कहा कि यह शौर्य वाटिका और म्यूजियम केवल स्थापत्य कला या बनावट का नमूना भर नहीं है। यह हमें हमारी सेनाओं की याद दिलाती रहेगी। मेरा प्रयास रहता है कि जिन उपकरणों ने दशकों तक हमारी सेवा की है, वह रिटायर होने के पश्चात हमारे स्कूल, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रदर्शित हांे। जब हमारी नई पीढ़ी उन्हें देखेगी और अपने हाथों से स्पर्श करेगी, तो उनके अन्दर राष्ट्र निर्माण का जोश उत्पन्न होगा। आज रूस-यूक्रेन विवाद और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के साथ-साथ सम्पूर्ण दुनिया में उथल-पुथल मची है, जो हमें यह संदेश दे रही है कि दुनिया की शांति और समृद्धि की चाभी समुद्री मार्गों की सुरक्षा में निहित है।हमारी तीनों सेनाओं का पराक्रम ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान देखने को मिला। उस समय नेवी पूरी ताकत के साथ अरब सागर में मौजूद थी। वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस बात पर सदैव बल दिया गया कि भारत सही मायनों में ताकतवर तभी कहलाएगा, जब सेनाओं को हथियार के लिए दुनिया के दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत का विज़न देश के सामने रखा। भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46,000 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। जून समाप्त होते-होते यह बढ़कर पौने दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका होगा। वर्ष 2014 तक भारत का डिफेन्स एक्सपोर्ट 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, लेकिन यह बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है।
प्रदेश के जवानों ने प्रत्येक युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा की है। इसी सोच के तहत लखनऊ में डी0आर0डी0ओ0 की प्रयोगशालाएं प्रारम्भ की गयी हैं। डिफेन्स कॉरिडोर के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बना रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस का भी निर्माण हो रहा है, जो देश की डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत कर रहा है। आज डिफेन्स के साथ-साथ हेल्थ, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, ट्रेड एण्ड कॉमर्स, रोड्स, हाई-वे, एयरपोर्ट्स आदि क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहां भारत की परम्परा, विरासत और सुरक्षा से जुड़े हुए स्थल देखना चाहेगा, तो नौसेना शौर्य वाटिका उसका नया केन्द्र बनेगा। आई0एन0एस0 गोमती लम्बे समय तक भारतीय नौसेना में रहकर समुद्री सुरक्षा करते हुए वर्ष 2022 में नौसेना से सेवानिवृत्त हुआ। सेवानिवृत्ति के पश्चात इस पोत को लखनऊ की जीवनदायिनी गोमती नदी के तट पर स्थापित किया गया है। जब व्यक्ति बड़ी सोच व बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता है, तो उसके सकारात्मक परिणाम आते हैं। यह देश व प्रदेश के युवाओं को प्रेरणा प्रदान करने वाला अवसर है। उन्हें यहां भारत की नौसेना के बारे में जानकारी मिलेगी। पता चलेगा कि किन सम-विषम परिस्थितियों में हमारे सैनिक कार्य करते हैं। यह उन्हंे जीवन की चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नौसेना अपने लक्ष्य को लेकर चलती है। यह ’नभः स्पृशं दीप्तम्’ अर्थात ‘आकाश की ऊंचाइयों को छूने’ की विराट सोच का प्रतीक है। संकुचित सोच व संकुचित भाव के साथ हम बड़ा लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते। बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विराट सोच होनी चाहिए। प्रधानमंत्री जी ने विकसित भारत की जिस संकल्पना को हमारे समक्ष रखा है, उसमें उन्होंने प्रत्येक भारतवासी से कहा कि विकसित भारत के लिए सभी को पंचप्रण से जुड़ा होगा। इन पंचप्रण में सबसे महत्वपूर्ण सेना व वर्दीधारी बल के प्रति सम्मान का भाव रखना है। जब सैनिक माइनस डिग्री तापमान, झुलसा देने वाली गर्मी तथा समुद्र की लहरों का मुकाबला करते हुए देश की सीमाओं की रक्षा करता है, तब 140 करोड़ भारतीय चैन की नींद सोते हैं। इस स्थिति में देश का नागरिक देश के विकास के बारे में सकारात्मक सोच को आगे बढ़ाने में सफल होता है तथा देश आगे बढ़ता है।
सुरक्षा के बेहतर वातावरण में ही विकास की योजनाएं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ती हैं। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में कर्फ्यू व दंगे का माहौल था। पेशेवर माफिया व अपराधी सक्रिय थे। निवेश व विकास की सम्भावनाएं क्षीर्ण हो जाती हैं। जब देश का सैनिक पूरी प्रतिबद्धता के साथ सुरक्षा के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तो नागरिकों का भी कर्तव्य बनता है कि वह भी अपने सैनिक के प्रति सम्मान का भाव रखें। इसी भाव को अंगीकार करते हुए नौसेना की इस शौर्य वाटिका तथा म्यूजियम की स्थापना की गयी है। रक्षा मंत्री जी की प्रेरणा से नौसेना की टीम ने प्रदेश सरकार के साथ मिलकर इस कार्य को समय-सीमा के अन्तर्गत पूर्ण किया। जब हम सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत होंगे, तो दुनिया भी हमसे मैत्री करेगी। कमजोर के समक्ष कोई नहीं झुकता। हमारी ऋषि परम्परा ने सदैव इसकी प्रेरणा दी है। जब हम अधूरी बात करते हैं, तो वह अर्थ का अनर्थ कर देता है। ऋषि परम्परा ने बताया है कि ‘अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च’ अर्थात सामान्य जीवन में अहिंसा सर्वाेच्च धर्म होना चाहिए, लेकिन अगर सामने वाला देश व समाज की सुरक्षा के लिए खतरा है तो उसके लिए अन्ततः हिंसा ही अपनानी पड़ेगी। देश के दुश्मन के लिए यही हमारा धर्म है, जिस पर देश की सेना मजबूती के साथ खड़ी है।
लखनऊ में नई प्रेरणा के रूप में एक ओर ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री ने 25 दिसम्बर, 2025 को किया था, वहीं दूसरी ओर नौसेना के शौर्य व पराक्रम के प्रतीक के रूप में म्यूजियम के रूप में नया केन्द्र प्राप्त हुआ है। आज इसके प्रथम चरण के कार्य का लोकार्पण किया जा रहा है। इसमें आगे के कार्य को बढ़ाया जाएगा। महत्वपूर्ण चौराहों पर सेना के निवृत्त टैंक रखे जाने चाहिए। इससे युवाओं के मन में भारतीय सेना जाने के प्रति एक भाव उत्पन्न होगा। इससे वह सेना के प्रति सम्मान का भाव रखेगा तथा उसे राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा मिलेगी। राष्ट्रभक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह तथा नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के0 त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर ले0ज0 अनिंद्य सेनगुप्ता, वाइस एडमिरल सी0आर0 प्रवीण नायर, ले0ज0 सी0जे0 जयचन्द्रन, मेजर जनरल मनीष कुकरेती, सांसद डॉ0 दिनेश शर्मा व बृज लाल, विधान परिषद सदस्य इं0 अवनीश कुमार सिंह, मुकेश शर्मा, उमेश द्विवेदी, राम चन्द्र प्रधान, डॉ0 लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक जयदेवी, योगेश शुक्ला, डॉ0 राजेश्वर सिंह, ओ0पी0 श्रीवास्तव, अमरेश कुमार, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।























