
तू भी पायेगा कभी, फूलों की सौगात।
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥
काँटों वाली राह में, रखना मन विश्वास,
मेहनत की हर बूँद का, मिलता है आभास।
अंधियारी हर रात के, पीछे छिपा प्रभात—
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥
टूटे सपनों पर कभी, करना नहीं विलाप,
संघर्षों की आग में, तपता जीवन-आप।
पत्थर भी घिसकर बने, मंदिर की औकात—
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥
दुनिया चाहे रोक ले, कहे तुझे कमजोर,
हिम्मत वाले पा गए, मंज़िल हर इक ओर।
सच्चे मन की साधना, देती नव शुरुआत—
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥
सूखे पत्तों की तरह, झरते चाहे ख्वाब,
फिर भी मन की शाख पर, खिलते नए गुलाब।
सौरभ कहे समय सदा, बदलें सब जज़्बात—
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥
—–डॉ. सत्यवान सौरभ
























