
महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह कदम जल्दबाज़ी में उठाया गया है। उनका कहना है कि सरकार जनगणना और संभावित जातिगत गणना से बचना चाहती है, क्योंकि इससे आरक्षण को लेकर नई बहस खड़ी हो सकती है। इस बयान के बाद महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
राजेन्द्र चौधरी
महिला आरक्षण के नाम पर ये जल्दीबाज़ी बता रही है कि अब भाजपा जा रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि सच तो ये है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है क्योंकि जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की भी बात उठेगी और फिर आरक्षण की भी, जो भाजपा और उनके संगी-साथी कभी भी देना नहीं चाहते हैं। भाजपा को ये भी अच्छी तरह याद है कि ‘पीडीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ अर्थात् महिला भी है। ये बिल पीडीए का हक़-अधिकार मारने की एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है। एक बड़ा चुनावी सच ये भी है कि भाजपा की चुनावी घपलेबाजी का अब पूरी तरह से भंडाफोड़ हो गया है। ‘पीडीए प्रहरी’ एक विचार की तरह हर प्रदेश और हर दल ने स्वीकार कर लिया है। भाजपा पर चौकन्नी नज़र रखी जा रही है, इसीलिए अब भाजपा को चुनावी हेराफेरी का कोई और मौका आसानी से नहीं मिलेगा और सच्चे वोट ही, चुनाव का सच्चा नतीजा तय करेंगे। अब हर तरह से भाजपा की कलई खुल गयी है, इसीलिए उसके समर्थक और वोटरों का अकाल पड़ गया है। भाजपा निराशा के इस दौर से उबरने के लिए ये बिल ला रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की यही राजनीतिक चाल रहती है जब पुराने लोग ये समझ जाते हैं कि भाजपा किसी की सगी नहीं है तो हर बार भाजपा कुछ नये लोगों को अपने लुभावने जुमलों से गुमराह करती है। इस बार भाजपा महिलाओं को लेकर ये पुरानी चाल चल रही है लेकिन सफल नहीं होगी क्योंकि भाजपा राज में सबसे ज़्यादा दुखी तो महिलाएं ही हैं। भाजपा की कमीशनखोरी व चंदा वसूली की वजह से जो महंगाई बढ़ी है उससे उनकी रसोई सूनी हो गयी है, रही-सही कसर सिलेंडर की बेतहाशा बढ़ती क़ीमतों ने पूरी कर दी है। अखिलेश यादव ने कहा कि हर महिला अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है लेकिन भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच तो सरकारी स्कूल तक बंद करवा दे रही है। महिलाओं का दर्द क्या होता है ये मेरठ के दुकानदारों के परिवार की महिलाओं की आँखों में आए आँसू भी बयां कर रहे हैं और नोएडा की मजदूर और मेड के रूँधे गले के बयान भी।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर ये बिल इतना ही सही है तो इसे मेरठ-नोएडा की पारिवारिक और कामगार महिलाओं के बीच बैठकर घोषित किया जाए। हम महिला आरक्षण के साथ है पर उस भाजपाई चालबाज़ी के खि़लाफ़ हैं, जो एक साज़िश के तहत की जा रही है। भाजपाई और उनके संगी-साथी देश की सबसे बड़ी आबादी के वर्ग मतलब ‘पिछड़े वर्ग’ की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठे हैं। ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं। दरअसल उसके पीछे भाजपाइयों की मंशा ये है कि जनगणना न करनी पड़े क्योंकि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आँकड़े भी देने पड़ेंगे और जातिवार आरक्षण भी। ये भाजपा का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों का अधिकार लूटा जा रहा है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट पार्टियों को मिलनी चाहिए। ये लोकतंत्र के खि़लाफ़ ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं।






















