Saturday, February 28, 2026
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सात वर्ष बाद पीडिता को मिला रेरा से न्याय

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सात वर्ष बाद बाद पीडिता को मिला रेरा से न्याय
सात वर्ष बाद बाद पीडिता को मिला रेरा से न्याय

सात वर्ष बाद बाद पीडिता को मिला रेरा से न्याय।  बिल्डर की मनमानी के कारण याचिनी को नहीं मिला फ़्लैट। बिल्डर लोगों के पैसे रोंककर बना रहे हैं पैसा, पीड़ित लगा रहे चक्कर:- विजय कुमार पाण्डेय

अजय सिंह

लखनऊ। लखनऊ निवासिनी डॉ० अनुपमा तिवारी की शिकायत यू.पी. रेरा की लखनऊ पीठ ने दिनांक 8 जनवरी 2026 को विराज कांस्ट्रक्शन कम्पनी के खिलाफ आदेश पारित किया है जिसमें पीडिता के अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय रहे । मामला यह था कि, डॉ० अनुपमा तिवारी ने वर्ष 2014 में लोटस कोर्ट (फेज-1), बीबीडी ग्रीन सिटी, लखनऊ परियोजना में एक आवासीय फ्लैट बुक किया था। बाद में यूनिट संख्या LC/T4/803 विराज कांस्ट्रक्शन द्वारा आवंटित की गई तथा दिनांक 3 जून. 2019 को विक्रय अनुबंध हुआ।

अनुबंध की शर्तों के अनुसार विराज कांस्ट्रक्शन को 30 जून, 2021 तक पीडिता को कब्जा दिया जाना था, जिसके एवज में कुल रु.35,35,291/- जमा किए गए किन्तु विराज कांस्ट्रक्शन ने तो ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (O.C.)/कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (C.C.) प्राप्त किया गया और न ही कब्जा सौंपा । विराज कांस्ट्रक्शन के मनमानी के कारण याचिनी एक तरफ बैंक से लिए गए लोन पर ब्याज दे रही थी तो दूसरी तरफ ढाई से तीन लाख वार्षिक किराया जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा था l

जिससे थककर याचिनी ने माननीय रेरा का दरवाजा खटखटाया जहाँ बिल्डर द्वारा याचिनी का जबरदस्त विरोध किया गया लेकिन दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली के आधार पर रेरा ने पाया कि पीडिता के साथ विराज कांस्ट्रक्शन ने गलत किया है, तत्पश्चात प्राधिकरण ने आदेशित किया कि विराज कांस्ट्रक्शन अगस्त 2026 तक निर्माण पूर्ण कर O.C./C.C. प्राप्त करे तथा 30.06.2021 से वास्तविक कब्जा अथवा O.C./C.C. प्राप्ति की तिथि (जो भी बाद में हो) तक जमा राशि पर SBI MCLR + 1% की दर से विलंबित अवधि लगभग 4 वर्ष 7 माह ब्याज का भुगतान 9% वार्षिक दर से अनुमानित ब्याज लगभग रु.14,57,162/- सहित कुल राशि लगभग रु.49,92,453/- अदा करे, जिस पर आगे भी ब्याज देय रहेगा। प्राधिकरण ने आगे कहा कि निर्धारित समय में आदेश का अनुपालन न होने की स्थिति में अधिनियम, 2016 की धारा 63 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत विधिक कार्यवाही भी विराज कांस्ट्रक्शन के विरुद्ध की जाएगी।