राष्ट्र प्रेरणा स्थल से उठा ‘विकसित भारत’ का संकल्प!

लखनऊ की धरती आज एक नई प्रेरणा की साक्षी बनी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ —जो आत्मसम्मान, एकता और सेवा का प्रतीक बन चुका है। लखनऊ की धरती से प्रधानमंत्री मोदी ने दिया ऐसा संदेश, जिसने उत्तर प्रदेश की पहचान ही बदल दी…

सुशासन दिवस के अवसर पर लखनऊ की धरती आज इतिहास की गवाह बनी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ — एक ऐसा स्थल, जो आत्मसम्मान, एकता और सेवा की भावना को जीवंत करता है।लखनऊ में आकार लेता राष्ट्र प्रेरणा स्थल आधुनिक भारत की वैचारिक यात्रा को समर्पित एक ऐसा राष्ट्रीय परिसर है, जहां विचार, राष्ट्रबोध और लोकतांत्रिक चेतना एक साथ सजीव होती है। यहां स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमाएं केवल स्मरण के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की तीन सशक्त वैचारिक धाराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह स्थल नागरिकों को यह समझाने का माध्यम बनता है कि भारत का लोकतंत्र व्यक्तियों से नहीं, बल्कि उनके विचारों और जीवन मूल्यों से आगे बढ़ता है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सशक्त राष्ट्र की अवधारणा को रेखांकित करती है। उनका जीवन भारत की संप्रभुता और वैचारिक स्पष्टता के लिए सतत संघर्ष का उदाहरण है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा ‘एकात्म मानववाद’ के उस विचार को मूर्त रूप देती है, जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के संतुलित विकास की परिकल्पना निहित है। यह प्रतिमा सामाजिक समरसता, अंत्योदय और मानवीय गरिमा के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनती है।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का लखनऊ में स्थापित होना विशेष अर्थ रखता है, क्योंकि यह वही नगर है, जिसने उन्हें लंबे समय तक अपना सांसद चुना। अटल जी का व्यक्तित्व लोकतांत्रिक मर्यादा, संवाद, सुशासन और राष्ट्रहित के संतुलन का प्रतीक रहा है। उनकी प्रतिमा लखनऊ और राष्ट्र दोनों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बनेगी। यह गौरवपूर्ण स्थल शीघ्र ही माननीय नरेन्द्र मोदी के करकमलों से राष्ट्र को अर्पित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल उत्तर प्रदेश की उस सोच का परिचायक है, जहां विकास के साथ विचार, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को समान महत्व दिया गया है। यह स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देने वाला है कि सशक्त भारत का निर्माण केवल भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि मजबूत विचार, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों की निरंतर साधना से होता है।

230 करोड़ की लागत से 65 एकड़ भूमि पर निर्मित ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के प्रवेश द्वार पर भारतमाता की प्रतिमा, जो राष्ट्रीय भावना की प्रतीक है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की 65 फीट ऊँची कांस्य से बनी भव्य प्रतिमाएं, जो राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देती हैं।। यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल उस सोच का प्रतीक है, जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है। हमारा हर कदम, हर प्रयास, हर संकल्प — राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित होना चाहिए। तीनों महापुरुषों के जीवन तथा उनकी विचारधारा पर आधारित संग्रहालय । दो लाख क्षमता का रैली स्थल तथा स्टेज। मनोरंजन हेतु एम्फी थिएटर। मेडिटेशन सेंटर, विश्राम केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड तथा कैफेटेरिया की व्यवस्था। कमल के आकार में बना यह भवन 98000 वर्गफुट में फैला है।

विश्व विख्यात मूर्तिकारों- श्रीराम सुतार तथा मंटू राम द्वारा निर्मित । मूर्तियों तथा स्टेज पर प्रोजेक्शन मैपिंग की भी व्यवस्था है, जिससे शाम को जीवंत दृश्य दिखेगा। वाचनालय तथा आंतरिक सभा की भी व्यवस्था है, जिसमें भविष्य में कार्यक्रम भी कराए जा सकें। सम्पूर्ण परिसर में 1.72 किलोमीटर सिंथेटिक ट्रैक का भी निर्माण कराया है, जिससे आसपास की आबादी को टहलने की सुविधा मिले। संग्रहालय में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से भारतीय राष्ट्रवाद तक की झलक। तीनों महापुरुषों के जीवन तथा उनकी विचारधारा पर आधारित संग्रहालय । दो लाख क्षमता का रैली स्थल तथा स्टेज। मनोरंजन हेतु एम्फी थिएटर। मेडिटेशन सेंटर, विश्राम केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड तथा कैफेटेरिया की व्यवस्था।मुझे गर्व है कि मैं उत्तर प्रदेश से सांसद हूं। आज यूपी की चर्चा विकास, एक्सप्रेस-वे और रोजगार के लिए होती है। डबल इंजन सरकार का असर साफ दिख रहा है… उत्तर प्रदेश आज 21वीं सदी के भारत में अपनी अलग पहचान बना रहा है। सबका प्रयास ही विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करेगा।

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