कैदियों की फरारी में बहाली का बड़ा खुलासा! कारागार मुख्यालय चुस्त, शासन रह गया सुस्त। सुरक्षाकर्मी हुए बहाल, अधीक्षकों को बहाली का इंतजार। सात माह पहले प्रदेश की दो जेलों से हुई थी चार कैदियों की फरारी।
राकेश यादव
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में कार्यप्रणाली को लेकर शासन सुस्त और कारागार मुख्यालय चुस्त नजर आ रहा है। इस सच की पुष्टि करीब सात माह पूर्व प्रदेश की दो जेलों से हुई चार कैदियों की फरारी के बाद हुई कार्यवाही कर रही है। मुख्यालय की चुस्ती से फरारी के निलंबित हुए सभी सुरक्षाकर्मियों को बहाल कर अन्य जेलों पर तैनात कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर शासन की सुस्ती की वजह से जेल के निलंबित अधीक्षकों को आज भी बहाली का इंतजार है। उधर विभाग के आला अफसरों ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है।
मिली जानकारी के मुताबिक बीती पांच जनवरी को कन्नौज जिला जेल में सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर दो बंदी फरार हो गए थे। घटना के बाद हरकत में शासन ने जेल अधीक्षक को और मुख्यालय ने हेकर, एक डिप्टी जेलर समेत छह सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसी प्रकार 29 जनवरी को अयोध्या जेल से दो कैदी फरार हो गए। इस फरारी की घटना पर जेल अधीक्षक, जेलर, दो डिप्टी जेलर के अलावा 12 सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि निलंबित जेल अधीक्षकों की बहाली नियुक्ति आधिकारी प्रमुख सचिव कारागार होने से शासन और जेलर, डिप्टी जेल, सुरक्षाकर्मियों का नियुक्ति आधिकारी डीजी जेल होने से बहाली कारागार मुख्यालय से होती है। डीजी जेल ने मुस्तैदी दिखाते हुए फरारी के बाद निलंबित हुए दोनों जेलों के जेलर और सुरक्षाकर्मियों को समयबद्ध कार्यवाही पूरी कार्यवाही कर बहाल कर अन्यत्र जेलों पर तैनात भी कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर घटना को हुए करीब सात माह पूरा हो जाने के बाद भी शासन निलंबित जेल अधीक्षकों की औपचारिक कार्यवाही पूरी नहीं कर पाया। मातहतों के बहाल होने और अन्यत्र तैनाती हो जाने के बाद भी अधीक्षकों को आज भी बहाली का इंतजार है। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
प्रोन्नत डिप्टी जेलरों की बहाली बनी मुसीबत
कन्नौज और अयोध्या जेल से हुई चार कैदियों की फरारी के मामले में दो डिप्टी जेलरों का भी अभी तक बहाल नहीं किया गया है। एक डिप्टी जेल कन्नौज और एक डिप्टी जेलर अयोध्या में तैनात था। सूत्रों का कहना है कि करीब एक साल पूर्व हेड वार्डर से डिप्टी जेलर पद पर प्रोन्नत हुए आर्थिक रूप से कमजोर डिप्टी जेलर एआईजी जेल प्रशासन कार्यालय में बाबुओं से सेटिंग गेटिंग करने मे सफल नहीं हो पाने की वजह से बहाल नहीं हो पाए। उधर एआईजी प्रशासन के निजी सचिव सियाराम से जब बात कराने की बात कही तो उसने बताया कि वह एआईजी से बात नहीं करा सकते हैं।



