Sunday, March 8, 2026
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जानें कब रंगभरी एकादशी

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जानें कब रंगभरी एकादशी
जानें कब रंगभरी एकादशी

जानें कब रंगभरी एकादशी

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को रंगभरी एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यतानुसार इसी दिन भगवान शिव मां पार्वती को पहली बार काशी में लेकर आए थे। इसीलिए यह एकादशी बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता हैं। रंगभरी एकादशी के दिन से काशी में होली का पर्व शुरू हो जाता है जो आगामी छह दिनों तक चलता है। एकादशी तिथि पर रंगभरी एकादशी व्रत रखा जाता है। इस विशेष अवसर पर भगवान विष्णु,शिव और पार्वती माता का विधि-विधान से पूजा किया जाता है। वर्ष 2023 में यह व्रत 03 मार्च दिन शुक्रवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु, महादेव और माता पार्वती की पूजा करने से साधकों को विशेष लाभ मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

वृषभ राशि – वृषभ राशि के जातकों को रंगभरी एकादशी पर खुशखबरी प्राप्त हो सकती है। इस दिन आय में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। साथ ही जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा, इसकी भी संभावना है। नौकरी पेशा लोगों के लिए भी यह समय उत्तम माना जा रहा है।

मिथुन राशि रंगभरी एकादशी पर विधि विधान से की गई पूजा से मिथुन राशि के जातकों को लाभ मिलेगा। माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और व्यापार में वृद्धि के संकेत दिख रहे हैं। साथ ही पदोन्नति का योग भी बन रहा है। इस दौरान परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहेगा।

रंगभरी एकादशी कैसे मनाते हैं। फाल्गुन मास के रंगभरी एकादशी के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होने के बाद पूजा स्थान में भगवान शिव और गौरी माता की मूर्ति स्थापित करें। अब माता गौरी और भगवान शिव की पुष्प, गंध, अक्षत, धूप, अबीर, गुलाल, बेलपत्र आदि से पूरे मनपूर्वक पूजा-अर्चना करें। इसके बाद माता गौरी और भगवान शिव को रंग-गुलाल अर्पित करें। गौरी माता का पूजन करते समय श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। शुद्ध देशी घी का दीया जलाकर,कपूर के साथ माँ की आरती करें। भगवान शिव की नगरी काशी के लिए रंगभरी एकादशी का दिन बहुत खास होता है। रंग-गुलाल से मनती हैं रंगभरी एकादशी। इस दिन भगवान शिव और माता गौरा, अपने गणों के साथ रंग-गुलाल से होली खेलते हैं। इस हर्षोल्लास के पीछे एक खास वजह है, यह दिन भगवान शिव और माता गौरी के वैवाहिक जीवन में बड़ा महत्व रखता है।

धनु राशि – धनु राशि के जातकों के लिए रंगभरी एकादशी नए और सकारात्मक बदलाव लेकर आ रही है। इस दौरान आर्थिक स्थिति में सुधर होगा और स्वास्थ संबंधित सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी। व्यापार में वृद्धि के अवसर भी दिखाई दे रहे हैं।

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मेष राशि – रंगभरी एकादशी के दिन मेष राशि के जातकों को भगवान विष्णु, शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलेगा। इस दिन उन्हें आय में वृद्धि या धन लाभ भी हो सकता है। नौकरी के नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।

रंगभरी एकादशी के दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार करके उनको दूल्हे के रूप में सजाकर गाजे-बाजे, नाचते हुए बाबा विश्वनाथ जी के साथ माता गौरा का गौना कराया जाता है। इसी के साथ पहली बार माता पार्वती ससुराल के लिए प्रस्थान करती हैं और काशी में रंगोत्सव का आरंभ हो जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता गौरा को विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे। इस उपलक्ष्य में भोलेनाथ ने अपने गणों के साथ रंग-गुलाल उड़ाते हुए खुशियां मनाई थी। तब से हर वर्ष काशी (बनारस) में भोलेनाथ माता पार्वती के साथ रंग-गुलाल से होली खेलते हैं। फिर माता गौरा का गौना कराया जाता है, तभी से रंगभरी एकादशी पर काशी में बाबा विश्वनाथ का यह पर्व बहुत ही खास तरीके से मनाया जाता है। यह पर्व खुशहाल जीवन के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। जानें कब रंगभरी एकादशी